खगड़िया: सरकारी नौकरी पाने का सपना पाले बैठे हजारों युवाओं के साथ एक बार फिर से बड़ा खेल हो गया है। बिहार पुलिस रेडियो ऑपरेटर प्रतियोगी परीक्षा में चयन कराने के नाम पर करोड़ों रुपए ठगने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश हुआ है। खगड़िया पुलिस ने इस मामले में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया है और अब खबर है कि जांच का जिम्मा आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंपा जा सकता है। पुलिस मुख्यालय को इसकी औपचारिक अनुशंसा जल्द ही भेजी जाएगी, ताकि इस बड़े खेल में हुए आर्थिक लेन-देन, मनी ट्रेल और गिरोह के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
यह मामला सिर्फ परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े का नहीं है, बल्कि एक गहरी जड़ जमा चुके संगठित ठगी नेटवर्क का हिस्सा है। ये वो गिरोह है जो सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले मासूम युवाओं को झांसा देता है और उनकी गाढ़ी कमाई लूट लेता है।
पुलिस भी मान रही है कि ये सिर्फ चंद लोगों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक बड़े जाल के कई धागे हैं जिन्हें सुलझाना बाकी है। यह पूरी कहानी बताती है कि कैसे कुछ शातिर लोग युवाओं की उम्मीदों का सौदा करते हैं और कैसे उनका यह काला धंधा छह जिलों तक फैला हुआ था।
गैंग का 'पक्का नौकरी' वाला फर्जीवाड़ा
इस पूरे मामले की पड़ताल करते हुए खगड़िया के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने बुधवार को एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने साफ-साफ बताया कि अब तक की जांच में कहीं से भी प्रश्नपत्र लीक होने या परीक्षा प्रणाली में किसी तरह की गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है।
इसका मतलब ये है कि ये गैंग पेपर लीक करके नहीं, बल्कि सीधे-सीधे नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों को ठग रहा था। एसपी सिंह ने स्पष्ट किया कि आरोपी अभ्यर्थियों को परीक्षा में चयन सुनिश्चित कराने और सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा भरोसा दिलाकर पैसे ऐंठते थे।
यह मामला पूरी तरह से एक सुनियोजित और संगठित ठगी का प्रतीत हो रहा है, जहां युवाओं के सपनों को भुनाया जा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के सदस्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे। उन्हें पूरा यकीन दिलाया जाता था कि अगर वे मोटी रकम देंगे, तो उनकी नौकरी पक्की समझो।
इस 'गारंटी' के बदले में, हर अभ्यर्थी से 5 लाख रुपए से लेकर 7 लाख रुपए तक वसूले जाते थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि इसी तरीके से करोड़ों रुपए का अवैध कारोबार किया गया है।
अब पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि कुल कितनी बड़ी रकम की ठगी हुई है और यह सारा पैसा किन-किन लोगों के पास पहुंचा। इस मनी ट्रेल को खंगालना ही जांच की सबसे अहम कड़ी है, जो असली चेहरों को बेनकाब करेगी।
खगड़िया से नवादा तक फैला था ठगों का जाल
जांच में जो बातें सामने आई हैं, वो वाकई चौंकाने वाली हैं। गिरोह का यह नेटवर्क केवल खगड़िया तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दूर-दूर तक फैले हुए थे।
पुलिस ने खुलासा किया है कि इस गैंग के संपर्क भोजपुर, पटना, वैशाली, नवादा, अरवल और खगड़िया सहित कुल छह जिलों में मिले हैं। पुलिस का साफ मानना है कि यह एक अंतरजिला संगठित गिरोह है, यानी अलग-अलग जिलों में इसके सदस्य काम कर रहे थे और हर किसी की अपनी-अपनी भूमिका तय थी।
जांच एजेंसियां इस संभावना पर भी काम कर रही हैं कि इस बड़े नेटवर्क के तार सिर्फ बिहार के इन छह जिलों तक ही नहीं, बल्कि दूसरे जिलों और यहां तक कि अन्य राज्यों तक भी फैले हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह ठगी का मामला और भी बड़ा और जटिल हो सकता है।
यह बात बताती है कि कैसे संगठित अपराध एक बड़े पैमाने पर काम करते हैं और कैसे वे राज्य की सीमाओं को लांघकर अपने काले धंधे को अंजाम देते हैं। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ये शातिर अपराधी एक बड़ा नेटवर्क बनाकर काम करते थे, जिसे तोड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है।
छह जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी, 15 आरोपी गिरफ्तार
जैसे ही इस बड़े ठगी के मामले का खुलासा हुआ, पुलिस ने जरा भी देर नहीं की। फौरन एक्शन लेते हुए छह जिलों में एक साथ विशेष अभियान चलाकर व्यापक छापेमारी की गई।
इस ताबड़तोड़ कार्रवाई में अब तक कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए लोगों में कथित सॉल्वर गैंग के कई सदस्य शामिल हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे परीक्षाओं में नकल कराने या फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने का ठेका लेते थे।
इनके अलावा, कुछ अभ्यर्थी भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं, जिन्होंने शायद इस ठगी में शामिल होने की कोशिश की थी। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि गिरफ्तार लोगों में एक वीक्षक (इनविजिलेटर) और एक परीक्षा केंद्राधीक्षक (एग्जाम सेंटर सुपरिंटेंडेंट) भी शामिल हैं।
यह दर्शाता है कि यह गिरोह परीक्षा व्यवस्था में भी सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस के अनुसार, इन सभी आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में अहम सबूत भी मिले हैं। पुलिस ने कई मोबाइल फोन, बैंक चेक, एटीएम कार्ड, एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, कुछ वाहन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
बरामद हुए मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अब फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि उनसे कोई छिपी हुई जानकारी निकाली जा सके। इसके साथ ही, पुलिस इन आरोपियों के बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और डिजिटल भुगतान के सभी रिकॉर्ड्स को भी खंगाल रही है।
जांच का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि ठगी की गई करोड़ों रुपए की रकम किन-किन खातों में जमा हुई और किन-किन लोगों के बीच बांटी गई। यह सब कुछ मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराध की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है, जिसे EOU जैसी विशेष एजेंसी ही सुलझा सकती है।
इसीलिए खगड़िया पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच EOU को सौंपने की सिफारिश की है, ताकि एक बड़े स्तर पर इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश हो सके और युवाओं के साथ हुए इस धोखे का हिसाब हो सके।


