सोलन: हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में आज एक महीने से चला आ रहा मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव का सस्पेंस खत्म होने वाला है। दोपहर बाद तीन बजे नगर निगम की बैठक बुलाई गई है, जहाँ इस बात पर मुहर लगेगी कि शहर का नया मुखिया कौन होगा। चुनावी रणभेरी बजने से पहले ही सियासत खूब गर्म है और शतरंज की बिसात पर मोहरे बिछाए जा रहे हैं। बीजेपी के पास भले ही पूर्ण बहुमत है, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस भी मैदान में उतरने की तैयारी में है, ताकि कोई भी मौका हाथ से न जाने पाए।
मामला थोड़ा पेचीदा इसलिए भी है क्योंकि बीजेपी के दो पार्षदों पर अवैध अतिक्रमण के आरोप लगे हैं। सोलन के डीसी ने इन आरोपों पर अंतिम फैसला लेने के लिए डिविजनल कमिश्नर को फाइल भेज रखी है।
अगर इन शिकायतों पर कोई फैसला नहीं होता, तो बीजेपी आसानी से मेयर और डिप्टी मेयर बना लेगी। लेकिन अगर पार्षदों की सदस्यता रद्द होती है, तो खेल में थोड़ा रोमांच बढ़ सकता है, हालांकि अभी भी बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है।
बीजेपी का बहुमत और पार्षदों की 'घेराबंदी'
सोलन नगर निगम में बीजेपी के पास कुल 10 पार्षद हैं। इसके अलावा, एक निर्दलीय पार्षद भी फिलहाल बीजेपी के खेमे में बताए जा रहे हैं, जिससे उनकी कुल संख्या 11 हो जाती है।
कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं और विधायक के एक वोट को मिलाकर उनके पास 7 वोट होते हैं। बीजेपी ने अपनी रणनीति के तहत अपने सभी 10 पार्षदों और उस एक निर्दलीय पार्षद को सोलन शहर से बाहर कसौली के एक होटल में ठहरा रखा है।
इस कदम को 'घेराबंदी' कहा जा रहा है, ताकि कांग्रेस को किसी भी तरह के 'सियासी सेंधमारी' का मौका न मिले। ये सभी पार्षद सीधे चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कसौली से सोलन पहुँचेंगे।
अतिक्रमण का आरोप और कानूनी दांव-पेंच
जैसा कि हमने बताया, बीजेपी के दो पार्षदों पर अवैध अतिक्रमण के आरोप लगे हैं। ये आरोप ऐसे वक्त में सामने आए हैं जब मेयर-डिप्टी मेयर का चुनाव होना है।
डीसी सोलन ने इस मामले से जुड़ी फाइल डिविजनल कमिश्नर को भेज दी है। फिलहाल, इस पर कोई फैसला नहीं आया है।
बीजेपी के लिए राहत की बात ये है कि अगर अतिक्रमण के आरोपों के चलते इन दो पार्षदों की सदस्यता रद्द भी हो जाती है, तो भी उनके पास निर्दलीय पार्षद को मिलाकर 9 वोट बचते हैं। कांग्रेस के पास तब भी केवल 7 वोट ही रहेंगे (6 पार्षद + 1 विधायक)।
ऐसे में संख्याबल के हिसाब से बीजेपी को अभी भी कोई बड़ी चुनौती नहीं दिख रही है।
निर्दलीय पार्षद का रुख और डिप्टी मेयर की कुर्सी
सोलन के वार्ड नंबर 3 से गौरव राजपूत ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था। पहले खबरें थीं कि गौरव राजपूत कांग्रेस को समर्थन दे सकते हैं, जिससे चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती थी, खासकर अगर बीजेपी के दो पार्षदों की सदस्यता रद्द हो जाती।
गौरव राजपूत ने चुनाव से पहले बीजेपी से टिकट माँगा था, लेकिन उन्हें तब नजरअंदाज कर दिया गया था। अब सूत्र बताते हैं कि बीजेपी ने गौरव राजपूत को मना लिया है और उन्हें डिप्टी मेयर का पद सौंप सकती है।
गौरव राजपूत पहले भी मनोनीत पार्षद रह चुके हैं, जिससे उनका अनुभव भी काम आएगा। बीजेपी की यह चाल निर्दलीय पार्षद का समर्थन पक्का करने और अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए मानी जा रही है।
मेयर पद के दावेदार और कांग्रेस की रणनीति
मेयर पद के लिए बीजेपी ने अभी तक अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं, लेकिन सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है, उसके मुताबिक सुषमा शर्मा मेयर बन सकती हैं। सुषमा शर्मा वार्ड नंबर 2 से चार बार चुनाव जीत चुकी हैं और उनका अनुभव और जनाधार काफी मजबूत माना जाता है।
वहीं, संख्याबल में पीछे होने के बावजूद कांग्रेस भी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। कांग्रेस मेयर पद के लिए वार्ड नंबर 9 से पार्षद मीनाक्षी शर्मा और डिप्टी मेयर के लिए वार्ड नंबर 13 से नरेंद्र नीटू को मैदान में उतार सकती है।
भले ही कांग्रेस को जीत की उम्मीद कम हो, लेकिन वे चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं और एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाना चाहते हैं।
क्यों हुई मेयर-डिप्टी मेयर चुनाव में देरी?
आपको बता दें कि सोलन समेत तीन अन्य नगर निगमों के चुनाव 17 मई को हुए थे और मतगणना 31 मई को की गई थी। इसके बाद 30 जून को सभी निर्वाचित पार्षदों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी।
लेकिन उस दिन मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हो पाया था। इसकी मुख्य वजह कांग्रेस पार्षदों द्वारा चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करना था।
कांग्रेस ने उस दिन कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया था, जिसके चलते चुनाव टल गया था। अब एक महीने बाद फिर से बैठक बुलाई गई है और उम्मीद है कि आज शहर को अपना नया मेयर और डिप्टी मेयर मिल जाएगा।
आज का दिन सोलन की सियासत के लिए बेहद अहम होने वाला है, जहाँ सारे कयासों पर विराम लगेगा।


