अमृतसर: विदेश में पढ़ाई का सपना... और उसमें भी ऑस्ट्रेलिया का नाम सुनकर पंजाब के नौजवानों की आंखें चमक उठती हैं। परिवार के लाखों रुपए का निवेश, ढेरों उम्मीदें और सुनहरे भविष्य की कल्पना। लेकिन अब इस सपने पर एक और महंगाई की मार पड़ने वाली है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने स्टूडेंट वीजा आवेदन शुल्क में सीधे 25 फीसदी का इजाफा कर दिया है। इसका मतलब है कि अब एक स्टूडेंट वीजा के लिए आपको पहले से कहीं ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। यह सिर्फ पैसों का खेल नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की कहानी है जिनके लिए अपने बच्चों को विदेश भेजना एक बड़ा त्याग होता है।
यह फैसला उन हजारों भारतीय, खासकर पंजाबी छात्रों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, जो ऑस्ट्रेलिया जाकर अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। जो फीस पहले 2,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 1.
44 लाख रुपए) थी, अब वह 1 जुलाई, 2026 से बढ़कर 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.64 लाख रुपए) हो जाएगी।
यानी सीधे-सीधे करीब 20,000 रुपए का बोझ और बढ़ गया। सिर्फ वीजा आवेदन शुल्क ही नहीं, बायोमेट्रिक फीस वगैरह जोड़ने पर यह आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के इस कदम के पीछे की वजह और इसका क्या असर होगा, आइए समझते हैं पूरी कहानी।
ऑस्ट्रेलिया ने क्यों बढ़ाई फीस?
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह फैसला अपनी अर्थव्यवस्था में चल रहे नौकरी संकट से निपटने के लिए लिया है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की बढ़ती संख्या उनके घरेलू नौकरी बाजार पर दबाव डाल रही है।
सरकार का मकसद है कि अप्रवासन (इमिग्रेशन) को नियंत्रित किया जा सके और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों के अवसर पैदा किए जा सकें। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर अगर गौर करें, तो स्थिति थोड़ी और साफ हो जाती है।
पिछले कुछ सालों में भारतीय छात्रों को दिए जाने वाले वीजा की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, और यह फीस बढ़ोतरी शायद इसी ट्रेंड को और मजबूत करेगी।
आंकड़ों की जुबानी: वीजा की गिरती मांग
ऑस्ट्रेलिया के वित्त मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय छात्रों को मिलने वाले वीजा की संख्या में पिछले कुछ सालों में लगातार गिरावट आई है। जरा इन आंकड़ों पर नजर डालिए:
- 2022-23 में 1,02,696 भारतीय छात्रों को वीजा जारी किया गया था। यह एक बड़ी संख्या थी।
- लेकिन 2023-24 में यह संख्या घटकर 50,516 रह गई, यानी लगभग आधी हो गई।
- और अब 2024-25 में यह आंकड़ा और नीचे आया है, जहां 48,536 भारतीय छात्रों को वीजा मिला है। यह एक साल पहले की 50,516 की तुलना में कम है।
ये आंकड़े साफ बताते हैं कि वीजा शुल्क बढ़ने के बाद पिछले दो से तीन सालों में छात्र वीजा की मांग में लगातार कमी देखने को मिली है। एक तरफ ऑस्ट्रेलिया अपने यहां आने वाले छात्रों की संख्या कम करना चाहता है, तो दूसरी तरफ बढ़ती फीस भी एक बड़ा कारण बनती जा रही है जिससे छात्र और उनके परिवार अब दो बार सोचने लगे हैं।
फीस बढ़ी, फिर भी आवेदन बढ़े, ये कैसा गणित?
अब यहां एक दिलचस्प मोड़ आता है। एक तरफ तो वीजा फीस बढ़ रही है और वीजा मिलने की संख्या घट रही है, लेकिन दूसरी तरफ 'एसोसिएशन ऑफ एजुकेशन एंड ऑस्ट्रेलियन सेंटर' की रिपोर्ट बताती है कि फीस बढ़ने के बावजूद भारत से आवेदन करने वालों की संख्या लगभग 4 गुना बढ़ी है! यह बात थोड़ी हैरान करने वाली लग सकती है।
आखिर ऐसा क्यों है? जानकारों का मानना है कि भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के लिए विदेश में अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना इतना मजबूत है कि वे इन बढ़ी हुई फीस को भी एक निवेश के तौर पर देखते हैं। उन्हें लगता है कि एक बार ऑस्ट्रेलिया या किसी और अच्छे देश के कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल जाए, तो उनका भविष्य सुरक्षित हो जाएगा।
छात्रों का क्या है नजरिया?
छात्रों का मानना है कि यदि वे विदेश में रहकर किसी अच्छे ऑस्ट्रेलियाई कॉलेज या यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करते हैं, तो वे सिर्फ अपना करियर नहीं बनाते, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा योगदान देते हैं। ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में छात्रों का योगदान करीब 55 अरब डॉलर का है, और इससे लाखों नौकरियों पर भी सीधा या परोक्ष रूप से प्रभाव पड़ता है।
यह दिखाता है कि छात्र खुद को सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि भागीदार मानते हैं जो मेजबान देश की प्रगति में मदद करते हैं।
एक और नया शुल्क: नॉन-रिफंडेबल वीजा आवेदन शुल्क
मामला यहीं खत्म नहीं होता। ऑस्ट्रेलिया ने नॉन-रिफंडेबल वीजा आवेदन शुल्क को भी बढ़ा दिया है।
अब यह शुल्क 750 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (जो मूल खबर के अनुसार करीब 3.77 लाख रुपए बताए गए हैं) तक पहुंच गया है।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह शुल्क वापस नहीं मिलेगा, चाहे आपका वीजा लगे या न लगे। और तो और, संभावना यह भी है कि आने वाले कुछ महीनों में इसे और भी बढ़ाया जा सकता है।
यह उन छात्रों के लिए एक और चुनौती है जो अपने भविष्य के लिए इतनी बड़ी राशि दांव पर लगाते हैं।
कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई अब और महंगी होने जा रही है। यह उन हजारों भारतीय परिवारों के लिए एक कड़ा इम्तिहान है, जिन्होंने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बड़े सपने देखे हैं।
अब देखना होगा कि इस बढ़ी हुई फीस और कड़े नियमों का भारतीय छात्रों की ऑस्ट्रेलिया जाने की चाहत पर कितना असर पड़ता है।


