पूर्णिया: गुरु जम्भेस्वर मंदिर की घंटियां शायद आधी रात के सन्नाटे में खो गई थीं, जब पूर्णिया का गिरजा चौक एक अजीबोगरीब दृश्य का गवाह बना। ये कोई मामूली रात नहीं थी, बल्कि गुरुवार की वो देर रात थी जब एक नौजवान, लहूलुहान और नशे में धुत, सड़क पर बेसुध पड़ा मिला। उसकी हालत ऐसी थी कि देखने वालों का कलेजा मुंह को आ जाए। सिर से टपकता खून, बिखरे हुए कपड़े और शराब की तेज़ गंध – ये सब बता रहा था कि कहानी में सिर्फ़ नशे का नहीं, बल्कि दर्द का भी एक गहरा ज़ख्म छिपा है। ज़ाहिर है, इस नौजवान को देखकर वहां एक भीड़ जमा हो गई। लोग आपस में फुसफुसा रहे थे, कोई फ़ोन निकाल रहा था, लेकिन मदद के लिए आगे आया एक बेनाम हीरो – एक टेंपो चालक, जिसने इंसानियत की मिसाल पेश की और इस घायल नौजवान को मौत के मुंह से खींचकर अस्पताल तक पहुंचाया।
ये कहानी है 22 साल के पिंकू आलम की, जो पूर्णिया ज़िले के केनगर स्थित बेगमपुर के मोहम्मद कलाम महरूम का बेटा है। नियति ने उसे उस रात गिरजा चौक की सड़कों पर ला पटका, जहां वो शराब के नशे में बुरी तरह घायल होकर पड़ा था।
उसकी ये हालत देखकर किसी का भी दिल पसीज जाता। आस-पास खड़े लोग या तो तमाशा देख रहे थे या मोबाइल में तस्वीरें कैद करने में मशगूल थे, लेकिन ऐसे ही वक़्त में मोहम्मद राहगीर नाम का एक टेंपो चालक फरिश्ता बनकर सामने आया।
राहगीर अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जी रहे थे। दालकोला से मुसाफ़िरों को पूर्णिया छोड़कर वो अभी-अभी लौटे थे।
उनकी थकी हुई आंखों ने जैसे ही गिरजा चौक पर ये मंज़र देखा, उनके कदम ठिठक गए। उन्होंने देखा कि एक युवक ज़मीन पर गिरा है, उसके सिर से ख़ून बह रहा है और उसे घेरकर स्थानीय लोगों की भीड़ खड़ी है।
एक टेंपो चालक की दरियादिली
मोहम्मद राहगीर ने बिना एक पल गंवाए, अपनी गाड़ी रोकी और भीड़ के बीच जा पहुंचे। उन्होंने तुरंत स्थिति का जायज़ा लिया।
लोगों की भीड़ तो थी, लेकिन कोई ठोस मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। घायल युवक की हालत लगातार बिगड़ रही थी।
स्थानीय लोगों ने जब देखा कि राहगीर मदद के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने मिलकर उस युवक को राहगीर के टेंपो में बिठा दिया। राहगीर ने भी देर नहीं की और सीधे राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) का रुख किया।
उनका ये फ़ैसला उस रात पिंकू आलम के लिए जीवनदान साबित हुआ। अस्पताल पहुंचने के बाद पिंकू आलम का विधिवत नाम और पता रजिस्टर में दर्ज किया गया और तुरंत इलाज शुरू कर दिया गया।
राहगीर ने एक पल भी नहीं सोचा कि ये कौन है, कहां से आया है। उनके लिए उस वक़्त एक घायल इंसान की जान बचाना सबसे ज़रूरी था, और उन्होंने वो कर दिखाया।
अस्पताल के बेड पर होश में आने के बाद जब पिंकू आलम से उसकी इस हालत के बारे में पूछा गया, तो उसकी आंखों में नमी थी। उसने जो बताया, वो सिर्फ़ शराब का नहीं, बल्कि एक गहरे दर्द का किस्सा था।
पिंकू ने कहा, “मैं अपनी मां के ग़म में शराब पीता हूं।” ये कहते हुए उसकी आवाज़ में एक अजीब-सा ठहराव था।
उसने आगे बताया कि “आज पूरे 80 रुपए का गुड़ वाला देसी शराब पिया है, पूर्णिया में। इस शराब का नशा थोड़ा फीका लगता है।
” पिंकू आलम ने अपना नाम और पूरा पता भी बताया – पिंकू आलम, बेगमपुर, केनगर, ज़िला पूर्णिया। ये बयान दिल दहला देने वाला था।
जहां एक तरफ़ एक युवक नशे की दलदल में फंसा था, वहीं दूसरी तरफ़ उसकी शराबखोरी के पीछे मां को खोने का गहरा ग़म छुपा था। ये सिर्फ़ एक युवक का बयान नहीं था, बल्कि समाज के उस हिस्से की तस्वीर भी थी, जहां लोग अपने दुखों को भुलाने के लिए नशे का सहारा लेते हैं, भले ही वो उन्हें और गहरी खाई में धकेल दे।
पुलिस और प्रशासन का रुख
इस पूरे मामले की जानकारी उत्पाद अधीक्षक नीरज कुमार तक पहुंची। उन्होंने मीडिया को बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आ गया है।
नीरज कुमार ने इस बात का भी आश्वासन दिया कि जो वीडियो सामने आया है, उसके आधार पर पूरी जांच की जाएगी और फिर नियमानुसार उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि क्या ये कार्रवाई सिर्फ़ शराब पीने या बेचने वालों पर होगी, या फिर उस सामाजिक ताने-बाने पर भी ध्यान दिया जाएगा, जहां नौजवान अपने ग़म भुलाने के लिए नशे का रास्ता चुनते हैं? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब शायद आने वाले दिनों में ही मिलेगा।
पुलिस की जांच के बाद ही पता चलेगा कि इस घटना की पूरी सच्चाई क्या है और पिंकू आलम की इस हालत के पीछे और क्या कारण थे। फिलहाल, जिस तरह से मोहम्मद राहगीर ने एक अनजान युवक की जान बचाई, वो पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है कि इंसानियत का जज़्बा किसी भी क़ानून या सामाजिक बंधनों से ऊपर होता है।
यह घटना पूर्णिया में देर रात हुई, और भले ही इस पर कई सवाल उठते हों, लेकिन एक टेंपो चालक की दरियादिली ने कम से कम एक ज़िंदगी को उस रात मरने से बचा लिया।
पुलिस और उत्पाद विभाग दोनों ही इस मामले पर अपनी नज़र बनाए हुए हैं। उत्पाद अधीक्षक नीरज कुमार ने साफ़ कर दिया है कि किसी भी तरह की ग़ैर-कानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून अपना काम करेगा।
यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच आगे चलकर क्या नए खुलासे करती है और पिंकू आलम के इस बयान की सच्चाई कितनी है कि वह वाकई अपनी मां के ग़म में शराब पीता था, या फिर इसके पीछे कोई और कहानी है। फिलहाल, जीएमसीएच में पिंकू आलम का इलाज जारी है और उम्मीद है कि वह जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौट पाएगा।
लेकिन यह घटना पूर्णिया के लोगों को एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे समाज में अभी भी ऐसे लोग हैं जो दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं, बिना किसी स्वार्थ के।

