पूर्णिया: बुधवार की रात, पूर्णिया के लाइन बाजार का माहौल हमेशा की तरह गुलजार था। लोग अपने काम निपटाकर घरों को लौट रहे थे, लेकिन तभी एक तेज रफ्तार बाइक ने सब कुछ पलट दिया। रात के गहरे होते साये में, एक ऐसी घटना घटी जिसने देखते ही देखते पूरे इलाके को सकते में डाल दिया। इस भीषण सड़क हादसे में दो महिलाओं समेत कुल तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। भैया, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जिसने भी देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए।
मामला देर रात का है, जब कुंडी पुल के पास सड़क पार कर रही दो महिलाओं को एक बाइक ने सीधी टक्कर मार दी। पलक झपकते ही बाइक सवार और दोनों महिलाएं सड़क पर ढेर हो गए।
चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए और आनन-फानन में सभी घायलों को पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया गया।
वहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और घायलों का इलाज शुरू कर दिया। ये पूरा वाकया बताता है कि कैसे चंद सेकंड में ज़िंदगी और मौत के बीच का फासला मिट जाता है।
घायलों की हालत को देखते हुए कहा जा सकता है कि ये हादसा कितना भयावह रहा होगा। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, एक घायल के सिर में गंभीर चोट आई है, वहीं दूसरे की आंख में टांके लगाने पड़े हैं।
तीसरे घायल के तो हाथ और पैर दोनों में ही गहरी चोटें हैं। ये सब सुनने के बाद आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि उस रात लाइन बाजार में क्या मंज़र रहा होगा, जब अंधेरे में ये दुर्घटना हुई।
हादसे का पूरा ब्यौरा: क्या और कैसे हुआ?
तो भैया, अब पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं। ये बात बुधवार देर रात की है।
डगरूआ निवासी 40 वर्षीय खुशबू देवी अपनी बहन पूनम देवी के साथ लाइन बाजार स्थित कुंडी पुल के पास सड़क पार कर रही थीं। वो शायद अपने घर की ओर जा रही थीं या किसी काम से निकली होंगी।
रात का वक्त था, लेकिन लाइन बाजार हमेशा व्यस्त रहता है, इसलिए सड़क पर आवाजाही बनी हुई थी। पूनम देवी ने जो बताया, वो दिल दहला देने वाला है।
उनके मुताबिक, "हम लोग कुंडी पुल चौक पर सड़क पार कर रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार बाइक पर सवार एक पुरुष और एक महिला ने हमें टक्कर मार दी।" सोचिए, कितना भयानक रहा होगा वो पल, जब अचानक से एक तेज रफ्तार मौत आपकी ओर आती दिखे!
बाइक की रफ्तार इतनी ज़्यादा थी कि टक्कर होते ही खुशबू देवी और उनकी बहन पूनम हवा में उछलकर सड़क पर जा गिरे। सिर्फ इतना ही नहीं, बाइक पर सवार युवक और उसके साथ बैठी महिला भी संतुलन खोकर ज़मीन पर धड़ाम हो गए।
सड़क पर लहूलुहान पड़े इन लोगों को देखकर वहां मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। बिना किसी देरी के, कुछ नेक दिल लोगों ने घायलों को संभाला और ई-रिक्शा की मदद से उन्हें तुरंत पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया।
ये वक्त पर किया गया काम ही होता है, जो कई बार जान बचा लेता है।
घायलों की पहचान और उनका मौजूदा हाल
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया। बाद में घायलों की पहचान भी सामने आई।
डगरूआ निवासी खुशबू देवी (40 वर्ष), रामबाग निवासी सुनीता देवी (पति घनश्याम शाह) और रहुआ हरदा निवासी रूपेश यादव (पिता विलास यादव)। शुरुआती जानकारी में बताया गया था कि खुशबू देवी और पूनम देवी सड़क पार कर रही थीं, लेकिन बाद में घायलों की पहचान में सुनीता देवी का नाम सामने आया, जो संभवतः बाइक पर बैठी दूसरी महिला थीं या सड़क पार करते वक्त हादसे का शिकार हुईं तीसरी व्यक्ति।
रूपेश यादव वो युवक हैं, जो बाइक चला रहे थे और जिनकी रफ्तार ने यह भीषण हादसा करवा दिया।
अस्पताल के कंपाउंडर दशरथ कुमार ने घायलों की चोटों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों घायलों को गंभीर चोटें आई हैं।
एक व्यक्ति के सिर में चोट लगी है, जिसका मतलब है कि उसका जीवन खतरे में भी हो सकता है। दूसरे घायल की आंख में टांके आए हैं, जो बहुत संवेदनशील मामला है।
वहीं, तीसरे घायल के हाथ और पैर में भी गंभीर चोटें लगी हैं, जिससे उसके ठीक होने में लंबा समय लग सकता है। डॉक्टरों की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ उनके इलाज में जुटी हुई है और उनकी हालत पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
अस्पताल में जारी है इलाज और परिजनों का इंतज़ार
पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इस वक्त तीनों घायलों का इलाज चल रहा है। उनके परिजन भी अस्पताल पहुंच चुके हैं और अपने प्रियजनों की हालत को लेकर चिंतित हैं।
खुशबू देवी की बहन पूनम देवी ने तो अपनी आंखों के सामने इस पूरे मंज़र को देखा है, इसलिए उनका दुख और भी गहरा है। अस्पताल के गलियारों में सन्नाटा पसरा है, जिसे घायलों के परिजनों की खामोश प्रार्थनाएं और डॉक्टरों की भागदौड़ तोड़ रही है।
सभी यही दुआ कर रहे हैं कि तीनों जल्द से जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौटें।
यह घटना एक बार फिर शहर की सड़कों पर बढ़ती रफ्तार और लापरवाही की ओर इशारा करती है। खासकर व्यस्त बाजारों और पुलों के पास, जहां पैदल चलने वालों की भीड़ होती है, वहां वाहन चालकों को और अधिक सतर्कता बरतने की ज़रूरत होती है।
इस तरह के हादसों से न सिर्फ घायल व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि उनके पूरे परिवार पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। प्रशासन और जनता, दोनों को मिलकर इस दिशा में काम करने की ज़रूरत है, ताकि ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके और पूर्णिया की सड़कें सुरक्षित बन सकें।
अभी घायलों का इलाज जारी है और उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे, लेकिन इस हादसे ने कई सवाल ज़रूर खड़े कर दिए हैं।

