गया: रेलवे स्टेशन का माहौल हमेशा से ही कुछ खास होता है। यहां हर कदम पर उम्मीद, इंतज़ार और कभी-कभी धोखे की आहट भी सुनाई देती है। गयाजी का रेलवे स्टेशन भी कुछ ऐसा ही था, जहां सोमवार शाम को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने कई यात्रियों को ठगा जाने से बचा लिया। हुआ यूं कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम 'ऑपरेशन उपलब्ध' के तहत मुस्तैदी से काम कर रही थी और इसी दौरान उन्होंने एक ऐसे शातिर दलाल को रंगे हाथ धर दबोचा, जो यात्रियों को महंगे दामों पर टिकट बेचकर अपनी जेबें भर रहा था। ये सिर्फ एक टिकट दलाल की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस पूरे अवैध नेटवर्क पर चोट है जो रेलवे में आम आदमी के सफर को मुश्किल बनाता है।
सोमवार को उपनिरीक्षक रणधीर कुमार के नेतृत्व में आरपीएफ की टीम गया रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में गश्त कर रही थी। उनकी नजर बुकिंग काउंटर के ठीक बाहर खड़े एक शख्स पर पड़ी, जिसकी हरकतें कुछ संदिग्ध लग रही थीं।
जब टीम ने उसे रोककर पूछताछ की, तो उसने अपनी पहचान चंदौती निवासी 21 वर्षीय आदित्य कुमार के रूप में बताई। पहले तो आदित्य ने आनाकानी की, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर जो कहानी सामने आई, वो चौंकाने वाली थी।
आदित्य कुमार ने कबूल किया कि वह रेलवे में तत्काल कोटे के टिकटों की कालाबाजारी करता था। उसकी कमाई का जरिया यात्रियों से टिकट के असली दाम के अलावा 2000 से 3000 रुपये तक का मोटा कमीशन वसूलना था।
जरा सोचिए, एक आम यात्री जो अपनी यात्रा के लिए पैसे जुटाकर टिकट खरीदता है, उसे ऐसे दलालों की वजह से कई गुना ज्यादा चुकाना पड़ता है। आरपीएफ ने जब उसकी तलाशी ली, तो उसके पास से गया से नागपुर के लिए जारी एक अवैध तत्काल टिकट भी बरामद हुआ, जो उसके अपराध का सीधा सबूत था।
मोबाइल से खुले कालाबाजार के राज
आरपीएफ थाना अध्यक्ष बनारसी यादव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत आदित्य कुमार के मोबाइल फोन की जांच करवाई। और यहीं से इस अवैध धंधे का पूरा जाल खुलना शुरू हुआ।
मोबाइल में व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और कई अन्य डिजिटल जानकारियां मिलीं, जिनसे साफ पता चल रहा था कि आदित्य अकेला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। इन डिजिटल सबूतों ने साबित कर दिया कि वह टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री में गहराई से लिप्त था।
रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत आदित्य कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है। ये कार्रवाई सिर्फ आदित्य तक सीमित नहीं है।
आरपीएफ अधिकारी अब इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह भी पता लगा रहे हैं कि इस पूरे अवैध कारोबार में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। उनका मकसद इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना और उसे पूरी तरह से खत्म करना है।
रेलवे की 'ऑपरेशन उपलब्ध' मुहिम ऐसे ही अवैध टिकट दलालों और उनके नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए चलाई जा रही है। इसका सीधा मकसद यात्रियों को तय किराए पर टिकट उपलब्ध कराना और उन्हें ठगी से बचाना है।
अक्सर देखने में आता है कि त्योहारों के समय या खास सीजन में जब टिकटों की मांग बढ़ती है, तब ये दलाल सक्रिय हो जाते हैं और जरूरतमंद यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि यात्री, लंबी कतारों से बचने या तत्काल यात्रा की जरूरत पूरी करने के चक्कर में ऐसे दलालों के जाल में फंस जाते हैं।
गयाजी में आदित्य की गिरफ्तारी इस बात का एक साफ संदेश है कि रेलवे प्रशासन ऐसे तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। यात्रियों को भी जागरूक रहने की जरूरत है।
आरपीएफ ने एक बार फिर सभी यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा के लिए केवल अधिकृत माध्यमों, जैसे रेलवे की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या रेलवे बुकिंग काउंटर से ही टिकट खरीदें। किसी भी अवैध एजेंट या दलाल के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद न करें।
अगर किसी को कोई संदिग्ध व्यक्ति टिकटों की कालाबाजारी करते हुए दिखे, तो तुरंत रेलवे अधिकारियों या आरपीएफ को इसकी सूचना दें। आपकी एक छोटी सी जानकारी कई और यात्रियों को ठगी का शिकार होने से बचा सकती है।
गया का ये मामला बताता है कि कैसे टेक्नोलॉजी, यानी आदित्य के मोबाइल फोन, ने ही उसके खिलाफ सबसे बड़े सबूत जुटाए और अब इसी टेक्नोलॉजी की मदद से पुलिस इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश में है। आगे की कार्रवाई जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस रैकेट के दूसरे मोहरों का भी पर्दाफाश होगा।

