गयाजी: अब तक आपने गयाजी में पिंडदान और मोक्ष की बातें सुनी होंगी, लेकिन इस बार यहां से कुछ ऐसी खबर आई है, जो देशभर में लोगों के लिए 'अनमोक्ष' का कारण बन रही थी. मतलब, ऐसा जाल बिछाया जा रहा था जिसमें फंसकर लोगों का करोड़ों रुपया स्वाहा हो रहा था. कहानी है साइबर ठगों के एक ऐसे नेटवर्क की, जिसे गयाजी पुलिस ने साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, पटना के साथ मिलकर ध्वस्त किया है. पुलिस ने एक आरोपी को धर दबोचा है और उसके पास से ऐसी चीजें मिली हैं, जिनसे पता चला है कि इस गिरोह ने देश भर के लोगों को करीब 2 करोड़ 91 लाख रुपये का चूना लगाया है. ये आंकड़ा तो बस शुरुआती है, अभी तो जांच चल रही है और ये बढ़ भी सकता है.
जरा सोचिए, आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके कोई सिम कार्ड निकलवा ले और फिर उसी सिम से लोगों को ठगना शुरू कर दे! जी हां, यही इस शातिर गिरोह का तरीका था. उन्होंने सीधे-साधे, गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाया.
उनके नाम पर सिम कार्ड निकलवाए और फिर उन सिम कार्ड्स के जरिए पूरे देश में ऑनलाइन ठगी का एक बड़ा खेल चला रहे थे.
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब साइबर थाना गयाजी और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, पटना की टीम ने मिलकर कार्रवाई की. ये कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल (NCRP) पर लगातार आ रही शिकायतों के बाद की गई.
पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उससे मिली जानकारी के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगालने की कोशिश कर रही है.
भोले-भाले लोगों के नाम पर सिम; ऐसे होता था खेल
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी गोविंद कुमार ने जो बताया, वो सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. गोविंद, जो डोभी थाना क्षेत्र के अमारुत गांव का रहने वाला है, उसने कबूल किया कि वो गांव-देहात के उन लोगों को ढूंढता था जो आर्थिक रूप से कमजोर थे.
उनके आधार कार्ड और बाकी जरूरी कागजात का इस्तेमाल कर वो उनके नाम पर नए सिम कार्ड जारी करवा लेता था. कई बार तो हद हो जाती थी, जब उन लोगों को पता भी नहीं होता था कि उनके नाम पर एक नहीं, बल्कि कई-कई सिम एक्टिवेट कर दिए गए हैं.
फिर इन 'गुपचुप' तरीके से जारी किए गए सिम कार्ड्स को गोविंद साइबर अपराधियों को बेच देता था.
ये अपराधी इन्हीं सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर बड़े-बड़े खेल करते थे. लोगों को निवेश (investment) के नाम पर, ऑनलाइन ट्रेडिंग (online trading) के झांसे में फंसाते थे.
उन्हें दिखाया जाता था कि कैसे कम समय में उनका पैसा दोगुना-चौगुना हो जाएगा. फर्जी मुनाफे की बातें कहकर, आकर्षक योजनाएं बताकर वो लोगों को अपने जाल में खींचते थे और फिर उनका बैंक अकाउंट खाली कर देते थे.
इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल पूरे देश में करोड़ों रुपये की ठगी के लिए किया जा रहा था.
शिकायतों के ढेर से खुला राज, ऐसे पहुंची पुलिस ठिकानों तक
ये साइबर अपराधी इतने चालाक थे कि देश के अलग-अलग कोनों में बैठकर ठगी करते थे. लेकिन कहते हैं न, हर अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है.
बिहार पुलिस के वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक खास अभियान चला रखा है. इसी अभियान के तहत, साइबर पुलिस की टीम ने राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों का बारीकी से तकनीकी विश्लेषण करना शुरू किया.
टीम ने पाया कि देश के कई राज्यों से दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों में कुछ खास मोबाइल नंबर बार-बार सामने आ रहे थे. एक ही नंबर से कई जगहों पर ठगी की गई थी.
ये एक बड़ा सुराग था. तकनीकी अनुसंधान और कड़ी मेहनत के बाद, पुलिस को पता चला कि ये सारे संदिग्ध नंबर गयाजी जिले में संचालित एक 'प्वाइंट ऑफ सेल' (POS) के माध्यम से जारी किए गए थे.
यानी, सिम कार्ड बेचने वाली दुकान से ही ये खेल चल रहा था.
बस फिर क्या था! पुलिस ने उस POS पर निगरानी रखनी शुरू कर दी. सबूत जैसे ही पक्के हुए, पुलिस ने आमस इलाके में धमक दे मारी, जहां से आरोपी गोविंद कुमार को रंगे हाथों धर दबोचा.
गोविंद के गिरफ्तार होते ही, इस पूरे गोरखधंधे की परतें एक-एक करके खुलने लगीं. पुलिस के लिए यह एक बड़ी सफलता थी क्योंकि इस नेटवर्क की वजह से देश भर में कई लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके थे.
करोड़ों की ठगी, 47 संदिग्ध सिम और अंतरराज्यीय गिरोह का शक
पुलिस ने गोविंद कुमार के पास से कुल 11 मोबाइल नंबर जब्त किए हैं. इन 11 नंबरों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से कुल 22 शिकायतें दर्ज थीं.
और इन 22 शिकायतों में ठगी की कुल रकम जानकर आपके होश उड़ जाएंगे – लगभग 2 करोड़ 91 लाख 18 हजार 286 रुपये! ये वो पैसा है जो मेहनत की कमाई था और साइबर ठगों के पास चला गया. प्रारंभिक जांच में ही इतनी बड़ी राशि का खुलासा हुआ है, जो इस गिरोह के खतरनाक इरादों को दर्शाता है.
अधिकारियों का कहना है कि ये तो बस शुरुआत है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ठगी के मामले और उसमें फंसी रकम दोनों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है.
पुलिस ने गोविंद के ठिकाने से 47 फर्जी या संदिग्ध सिम कार्ड भी बरामद किए हैं. इन सभी सिम कार्ड्स की अब तकनीकी जांच चल रही है, ताकि यह पता चल सके कि इनका इस्तेमाल और कौन-कौन से साइबर अपराधों में हुआ है और इस गिरोह के बाकी साथियों तक पहुंचा जा सके.
इन संदिग्ध सिम कार्ड्स से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले जा रहे हैं, ताकि नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ा जा सके.
जांच एजेंसियों को पूरा शक है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय (Inter-state) साइबर गिरोह का हिस्सा है. इस मामले में साइबर थाना गया में FIR दर्ज कर ली गई है और कड़ी कार्रवाई जारी है.
पुलिस डिजिटल सबूतों, मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का गहन विश्लेषण कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके और इसमें शामिल हर अपराधी को बेनकाब किया जा सके.
साइबर थाना अध्यक्ष ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी गोविंद से लगातार पूछताछ जारी है. उसकी दी गई जानकारियों के आधार पर पुलिस ने कई अन्य संदिग्धों की पहचान भी कर ली है.
उम्मीद है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े बाकी लोग भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे और तब जाकर ये पूरा खेल सबके सामने आ पाएगा. यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक सबक है जो आसानी से पैसा कमाने के लालच में साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस जाते हैं.




































