मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले का धौरी गांव सोमवार दोपहर एक आम दिन की तरह ही था, जब घरों में महिलाएं अपने काम में लगी थीं और बच्चे खेल रहे थे। किसी को क्या पता था कि प्रकृति का एक पल भर का गुस्सा एक घर के आंगन को मातम में बदल देगा। ठीक दोपहर के 3 बजे थे, जब आसमान में अचानक काले बादलों ने डेरा जमाया और देखते ही देखते तेज गर्जना के साथ बारिश शुरू हो गई। इस बदले मौसम ने अपने साथ एक ऐसी आफत लाई, जिसने 15 साल की संध्या कुमारी की जान ले ली।
धौरी ग्राम पंचायत के धौरी गांव की रहने वाली संध्या, गांधी कुमार बिंद की बेटी थी। वो अपने घर के ठीक पीछे लगे एक आम के पेड़ के पास खेल रही थी, जहाँ शायद वो अपनी सहेलियों का इंतज़ार कर रही होगी या यूँ ही अपने ख्यालों में खोई होगी।
तभी अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और आसमानी बिजली उस आम के पेड़ के ठीक पास गिरी। बिजली की वो चमक और उसकी ताक़त इतनी भयानक थी कि संध्या को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
वो सीधे उसकी चपेट में आ गई और ज़मीन पर गिर पड़ी, बुरी तरह से झुलस चुकी थी।
आसमानी बिजली का कहर: पलक झपकते ही सब ख़त्म
घटना इतनी तेज़ी से हुई कि आसपास मौजूद लोगों को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। जिस जगह बिजली गिरी थी, वहां से धुंआ उठने लगा और पास ही रखे पुआल और पशुओं के चारे में आग लग गई।
आग की लपटें तेजी से उठने लगीं। चीख-पुकार सुनकर घरवाले और पड़ोसी दौड़कर आए।
उन्होंने देखा कि संध्या अचेत पड़ी है। बिना एक पल गंवाए, परिजनों और ग्रामीणों ने संध्या को उठाया और तुरंत अनुमंडलीय अस्पताल तारापुर की ओर भागे।
उनकी बस यही दुआ थी कि किसी तरह संध्या बच जाए।
अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची की हालत देखी और फिर कुछ जांचें करने के बाद जो खबर सुनाई, वो परिवार के पैरों तले ज़मीन खिसका देने वाली थी। डॉक्टरों ने संध्या को मृत घोषित कर दिया।
यह सुनते ही अस्पताल का शांत माहौल चीखों से गूंज उठा। गांधी कुमार बिंद और उनका परिवार टूट चुका था।
जिस बच्ची को कुछ देर पहले हंसते-खेलते देखा था, वो अब सिर्फ यादों में सिमट गई थी। पूरे धौरी गांव में इस खबर से शोक की लहर दौड़ गई।
जब ज़मीन पर उतरा आसमानी आग का गोला
जिन लोगों ने ये पूरी घटना अपनी आँखों से देखी, उनके बदन में सिहरन दौड़ जाती है। एक ग्रामीण ने बताया, "जब बिजली गिरी, तो ऐसा लगा जैसे कोई बहुत बड़ा बम फटा हो।
धुंआ और आग की लपटें इतनी तेज़ थीं कि डर के मारे सब इधर-उधर भागने लगे। बाद में देखा तो बच्ची ज़मीन पर पड़ी थी और पुआल धू-धू कर जल रहा था।
" आम के पेड़ के ठीक पास पुआल और चारा रखा होने के कारण आग तेज़ी से फैली।
घटना के बाद कई घंटों तक उस जगह से आग की लपटें और धुंआ निकलता रहा। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए आग बुझाने की कोशिश की।
कई घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका, जिससे आस-पास के घरों और खेतों में आग फैलने से बच गई। लेकिन ये सब कुछ उस एक ज़िंदगी के आगे बेमानी था, जिसे आसमानी आफत ने छीन लिया था।
शोकाकुल गांव और मुआवजे की मांग
संध्या की मौत की खबर जैसे ही आस-पास के गांवों में फैली, बड़ी संख्या में लोग मृतका के घर पहुंचने लगे। देर शाम तक गांव में लोगों की भीड़ लगी रही।
हर कोई इस दुख की घड़ी में परिवार को सांत्वना देने आया था। गांव का माहौल गमगीन था।
हर आंख नम थी और हर चेहरा सदमे में था।
स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से अपील की है कि पीड़ित परिवार को आपदा राहत योजना के तहत जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि यह परिवार गरीब है और इस दुख की घड़ी में सरकार की मदद उनके लिए बहुत ज़रूरी है।
वहीं, जिला प्रशासन और मौसम विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि बदलते मौसम और लगातार हो रही वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए वे खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे न रहें। यह अपील इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि बिहार में वज्रपात की घटनाएं बढ़ रही हैं और हर साल कई लोगों की जान ले रही हैं।
फिलहाल, धौरी गांव में मातम पसरा है और एक परिवार अपनी बच्ची के असमय चले जाने के दर्द से जूझ रहा है। आसमानी बिजली का यह कहर एक बार फिर यह याद दिला गया कि प्रकृति के सामने इंसान कितना बेबस है।

