शेखपुरा: बिहार में इन दिनों मौसम मिजाज कुछ ऐसा दिखा रहा है कि लोग समझ नहीं पा रहे कि सावन चल रहा है या फिर तपती जेठ की गर्मी! मॉनसून के महीने में भी तापमान आसमान छू रहा है, और इस मामले में शेखपुरा जिला पूरे सूबे में 'नंबर वन' बना हुआ है. एक तरफ जहां बादल रोज आते हैं, उम्मीद जगाते हैं, वहीं दूसरी तरफ वो बिन बरसे ही लौट जाते हैं. नतीजा? गर्मी का सितम ऐसा कि लोगों का हाल बेहाल है और किसान सूखे की आशंका से डरे हुए हैं.
सोमवार को शेखपुरा का अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे बिहार में सबसे ज्यादा था.
न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस रहा.
ये हाल तब है जब पिछले कुछ दिनों में आस-पास के जिलों में हल्की फुल्की बारिश हुई है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आई है. नहीं तो, कुछ दिन पहले ही यहां पारा 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिसने लोगों का जीना मुहाल कर दिया था.
हल्की सी नमी और बादल छाए रहने से भले ही कुछ पलों की राहत मिली हो, लेकिन असलियत ये है कि शेखपुरा अभी भी गर्मी की चपेट में है और सूबे का सबसे गर्म जिला बना हुआ है.
मॉनसून की बेरुखी और किसानों का दर्द
मॉनसून का समय है, और इस दौरान खेतों में पानी और हरियाली दिखनी चाहिए थी. लेकिन शेखपुरा के खेत धूल फांक रहे हैं.
'आद्रा' नक्षत्र का समय किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस नक्षत्र में धान की बुआई शुरू हो जाती है, बिचड़े गिराए जाते हैं ताकि अच्छी फसल हो सके.
लेकिन इस साल तो 'आद्रा' भी रूठा हुआ लग रहा है. आसमान में बादल तो दिखते हैं, लेकिन उनसे पानी की एक बूंद नहीं गिर रही.
किसानों की आंखें आसमान में टिकी हैं, लेकिन उम्मीदें टूट रही हैं.
किसान रामसेवक बताते हैं, "पहले तो हम हर साल आद्रा नक्षत्र में धान का बिचड़ा गिरा देते थे. खेत में पानी होता था, मेहनत लगती थी, लेकिन फसल की उम्मीद रहती थी.
इस बार तो खेत ऐसे सूखे पड़े हैं, जैसे कभी बारिश हुई ही न हो. नलकूप चलाकर बिचड़ा गिराने का मतलब है बिजली का भारी बिल और लागत में बढ़ोतरी.
अगर बारिश नहीं हुई तो वो पानी भी बेकार चला जाएगा." यह सिर्फ रामसेवक की कहानी नहीं है, बल्कि जिले के हजारों किसानों की यही पीड़ा है.
धान के बिचड़े गिराने का काम लगभग ठप सा हो गया है. इक्का-दुक्का किसान जिनके पास अपने निजी नलकूप हैं और जो जोखिम उठाने को तैयार हैं, सिर्फ वही बिचड़े गिराने की हिम्मत कर पा रहे हैं.
बाकी किसान तो बस आसमान की ओर ताक रहे हैं, उम्मीद कर रहे हैं कि मॉनसून मेहरबान होगा.
अन्य फसलों और पशुपालकों पर भी मार
सिर्फ धान ही नहीं, गर्मी और बारिश की कमी ने दूसरी फसलों पर भी बुरा असर डाला है. मकई की बुवाई रुक गई है, अरहर जैसी दालों की खेती भी अटकी पड़ी है.
सब्जियां तो जैसे सूखने लगी हैं. खेत में पानी न होने से सब्जियों की बुवाई और उनकी ग्रोथ दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है.
बाजार में सब्जियों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर भी सीधा असर पड़ेगा.
किसानों के साथ-साथ पशुपालक भी परेशान हैं. अत्यधिक गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि जानवरों पर भी पड़ रहा है.
दुधारू पशु जैसे गाय और भैंस दूध कम देने लगे हैं. पशुपालक मोहनलाल कहते हैं, "इतनी गर्मी में पशुओं को चारा-पानी देना भी मुश्किल हो रहा है.
वे खुद भी बेचैन रहते हैं. दूध की पैदावार घट गई है, जिससे हमारी रोजमर्रा की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है.
लागत बढ़ गई है और मुनाफा घट गया है." पशुओं के लिए पानी की कमी भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है.
गर्मी से उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है, जिससे पशुपालकों की चिंताएं और बढ़ गई हैं.
स्थानीय लोग बताते हैं कि शेखपुरा जिले में तापमान का बढ़ना अब एक आम बात हो गई है. शहरी इलाकों में पक्के मकान और कंक्रीट का जंगल गर्मी को और बढ़ा रहा है.
पेड़ों की कटाई भी इसका एक बड़ा कारण है. ऐसे में लोग दिनभर घरों में दुबकने को मजबूर हैं.
बाजारों में भी दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहता है.
मौसम विभाग का पूर्वानुमान: एक उम्मीद की किरण
हालांकि, इस तपती गर्मी और निराशा के बीच मौसम विभाग ने थोड़ी राहत की खबर दी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का पूर्वानुमान है कि आने वाले दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की सक्रियता बढ़ेगी.
इसका मतलब है कि शेखपुरा जिले में बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं. अगर ये पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो किसानों और आम लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी और सूखे की आशंका भी टल सकती है.
फिलहाल तो शेखपुरा के लोग और किसान, सब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही मॉनसून अपनी पूरी शक्ति के साथ बरसेगा और धरती को ठंडक पहुंचाएगा, खेतों को हरियाली देगा और लोगों को इस तपती गर्मी से निजात दिलाएगा.
देखना ये होगा कि मौसम विभाग का ये पूर्वानुमान कब तक हकीकत में बदलता है और कब जाकर शेखपुरा में इंद्रदेव मेहरबान होते हैं.

