शेखपुरा: बिहार के शेखपुरा जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने शादियों के मौसम में खुशी की दास्तानों के बीच एक दुखद मोड़ ला दिया है। लखीसराय के बड़हिया से बरबीघा के माऊर गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे 70 साल के बुजुर्ग गोविंद राम की सफर के दौरान ही मौत हो गई। सोमवार की सुबह जब गया-किउल फर्स्ट पैसेंजर ट्रेन शेखपुरा स्टेशन पहुंची, तो एक डिब्बे में उनकी बेजान देह मिली, जिसने यात्रियों को चौंका दिया और शादी की खुशियों के बीच एक परिवार में मातम पसार दिया।
मामला कुछ ऐसा था कि गोविंद राम बड़हिया में रहते थे और उन्हें बरबीघा थाना क्षेत्र के माऊर गांव में किसी अपने की शादी में जाना था। बुढ़ापे में भी शादी की रौनक देखने और अपनों के साथ वक्त बिताने का उत्साह उनमें था।
वो लखीसराय रेलवे स्टेशन से शेखपुरा आने वाली गया-किउल फर्स्ट पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए। शायद उन्होंने सोचा होगा कि कुछ देर में शेखपुरा पहुंचेंगे, वहां से ऑटो या किसी और साधन से माऊर गांव जाएंगे और शादी की तैयारियों में हाथ बटाएंगे।
लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
शादी का सफर; मातम में बदली खुशी
गोविंद राम, जो उम्र के उस पड़ाव पर थे जब इंसान अक्सर अपने परिवार और नाती-पोतों के साथ सुकून के पल बिताना चाहता है, उन्होंने एक शादी की खुशी में शामिल होने का फैसला किया। लखीसराय से शेखपुरा तक का ये सफर उनके लिए सिर्फ दूरी तय करना नहीं था, बल्कि परिवार के मिलन और उत्सव का हिस्सा बनने का जरिया था।
उनके साले सुनील राम चंद्रवंशी ने बाद में बताया कि गोविंद राम बड़हिया से चले थे और उनका लक्ष्य बरबीघा के माऊर गांव था, जहाँ एक शादी धूमधाम से होने वाली थी। ट्रेन में सवार होते वक्त शायद उनके मन में सिर्फ ढोल-नगाड़े, पकवान और खुशगवार माहौल की तस्वीरें घूम रही होंगी।
लेकिन ये सफर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया। शेखपुरा पहुंचने से पहले ही, ट्रेन के अंदर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
परिवार का कहना है कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ शरीर कभी-कभी अचानक जवाब दे जाता है। ट्रेन की भीड़भाड़, सफर की थकान और शायद कोई अंदरूनी परेशानी ने मिलकर ऐसा खेल किया कि गोविंद राम ने चलती ट्रेन में ही अपनी आखिरी सांस ली।
शेखपुरा स्टेशन पर हुई दर्दनाक खोज
सोमवार की सुबह जब गया-किउल फर्स्ट पैसेंजर ट्रेन शेखपुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर रुकी, तो सब कुछ सामान्य लग रहा था। यात्री उतर रहे थे, कुछ चढ़ रहे थे।
लेकिन ट्रेन के एक डिब्बे में कुछ सह-यात्रियों ने एक बुजुर्ग को अचेत अवस्था में देखा। पहले तो शायद उन्हें लगा कि बुजुर्ग सो रहे होंगे या तबीयत खराब हुई होगी, लेकिन जब बार-बार बुलाने पर भी कोई हरकत नहीं हुई, तो यात्रियों को कुछ अनहोनी का एहसास हुआ।
धीरे-धीरे खबर फैली और रेलवे प्रशासन के साथ-साथ राजकीय रेल पुलिस (GRP) को सूचना दी गई। GRP की टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
उन्होंने जांच की और पाया कि बुजुर्ग अब इस दुनिया में नहीं थे। यह मंजर देखकर स्टेशन पर मौजूद लोगों के चेहरों पर उदासी छा गई।
किसी भी यात्री के लिए यह एक चौंकाने वाला और दुखद अनुभव था कि उनके साथ यात्रा कर रहा एक शख्स अब नहीं रहा।
पुलिस की कार्रवाई और पहचान की मशक्कत
GRP पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया। प्रारंभिक जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए शेखपुरा के सदर अस्पताल भेजा गया।
सबसे बड़ी चुनौती थी मृतक की पहचान करना। ऐसे मामलों में जब कोई व्यक्ति अकेले सफर कर रहा हो और उसके पास पहचान से जुड़े दस्तावेज न हों, तो पुलिस के लिए यह एक बड़ा टास्क बन जाता है।
घंटों की मशक्कत और इधर-उधर की पूछताछ के बाद, पुलिस को कुछ सुराग मिले।
आखिरकार, मृतक की पहचान बड़हिया निवासी 70 वर्षीय गोविंद राम के रूप में हुई। पहचान होते ही GRP पुलिस ने उनके परिजनों को सूचना दी।
खबर सुनते ही बड़हिया में गोविंद राम के घर में कोहराम मच गया। जिस परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां अचानक मातम छा गया।
परिवार के सदस्य, जिनमें उनके साले सुनील राम चंद्रवंशी भी शामिल थे, तुरंत शेखपुरा के लिए रवाना हुए। उनके लिए यह खबर एक वज्रपात जैसी थी।
जिस खुशी के मौके पर वो गोविंद राम से मिलने वाले थे, अब उन्हें उनका पार्थिव शरीर लेने जाना पड़ा।
अधूरी रह गई शादी में शामिल होने की ख्वाहिश
सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद GRP पुलिस ने गोविंद राम का शव उनके परिजनों को सौंप दिया। एक बुजुर्ग की शादी में शामिल होने की अंतिम इच्छा अधूरी रह गई।
ट्रेन का सफर जो खुशी से शुरू हुआ था, वह एक दर्दनाक अंत पर आकर रुक गया। यह घटना हमें जीवन की अनिश्चितता और अप्रत्याशितता की याद दिलाती है।
एक पल पहले सब सामान्य लगता है, और अगले ही पल पूरी तस्वीर बदल जाती है। गोविंद राम के परिवार के लिए यह एक ऐसी त्रासदी थी जिसे भूलना शायद कभी मुमकिन न होगा।
शादी का माहौल मातम में बदल गया और अब उस घर में खुशियों की जगह गम के साये मंडरा रहे हैं। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चलती-फिरती कहानी है जो बताती है कि जीवन कितना नाजुक और अनिश्चित है।

