शेखपुरा: बिहार का शेखपुरा जिला। यहां से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पुलिस महकमे में एक साल पुरानी टीस को खत्म कर दिया है। बात है शराब माफिया और पुलिस पर हमले की। याद है वो मामला, जब शराब के एक अवैध अड्डे पर रेड मारने गई पुलिस टीम पर गुंडों ने जानलेवा हमला कर दिया था? उस हमले का एक मुख्य आरोपी पिछले पूरे एक साल से पुलिस की नाक के नीचे से फरार था। मुंबई में छिपकर बैठा था, लेकिन कानून के लंबे हाथ आखिर वहां तक भी पहुंच गए। अब जाकर पुलिस ने उसे धर दबोचा है। सोचिए, एक साल से जिसकी तलाश थी, वो अपने घर लौटा और पकड़ा गया। ये गिरफ्तारी कोई मामूली नहीं है, बल्कि उस पुलिस टीम के घावों पर मरहम लगाने जैसी है, जो उस दिन घायल हुई थी।
ये कहानी शुरू होती है पिछले साल से, जब उत्पाद विभाग की एक टीम शेखपुरा के सियानी गांव में अवैध शराब के एक बड़े अड्डे पर धावा बोलने पहुंची थी। वहां शराब का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था।
पुलिस की भनक लगते ही कारोबारियों ने अचानक हमला बोल दिया। ये हमला इतना खतरनाक था कि इसमें कुल 6 पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हो गए थे।
उनमें एक महिला दारोगा प्रीति कुमारी भी शामिल थीं, जिन्हें गंभीर चोटें आई थीं। उस दिन जो हुआ, वो कानून के राज को सीधी चुनौती थी।
पुलिस टीम पर जानलेवा हमला: 13 नामजद और सुरेश केवट की कहानी
उस घटना के बाद उत्पाद दारोगा प्रीति कुमारी की शिकायत पर स्थानीय थाने में जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले में कुल 13 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया।
इन 13 आरोपियों में से 12 को तो पुलिस ने घटना के कुछ ही समय बाद दबोच लिया था। लेकिन एक नाम था सुरेश केवट, जो सियानी गांव के श्याम लाल केवट का बेटा है, वो पुलिस की गिरफ्त से लगातार बाहर था।
सुरेश केवट ही वो शातिर दिमाग था, जो पुलिस टीम पर हमले के मुख्य षड्यंत्रकारियों में से एक था। उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी, क्योंकि वह घटना के बाद से ही भूमिगत हो गया था।
पुलिस ने अपनी जांच जारी रखी, बाकी आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन सुरेश केवट का कोई अता-पता नहीं मिल रहा था। वह ऐसे गायब हुआ, जैसे गधे के सिर से सींग।
कई महीनों तक पुलिस ने उसकी तलाश में खाक छानी, जगह-जगह छापे मारे, लेकिन हर बार उसे चकमा देने में कामयाब रहा। उसकी गिरफ्तारी के बिना ये पूरा मामला अधूरा था और पुलिस विभाग पर भी एक तरह का दबाव था।
मुंबई में कट रहे थे फरारी के दिन, घर वापसी का इंतजार
पुलिस को बाद में पता चला कि सुरेश केवट गिरफ्तारी के डर से बिहार छोड़कर सीधे मायानगरी मुंबई भाग गया था। मुंबई में वह पिछले एक साल से छिपा हुआ था, अपनी पहचान बदलकर या किसी अनजान ठिकाने पर रहकर पुलिस की नजरों से बच रहा था।
उसे लगा था कि इतने बड़े शहर में उसे ढूंढना पुलिस के लिए असंभव होगा। लेकिन कहते हैं न कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन गलती कर ही जाता है।
सुरेश केवट को भी शायद अपने परिवार और घर की याद सताने लगी थी, या उसे लगा कि अब खतरा टल गया है।
एक हफ्ते पहले ही सुरेश केवट ने मुंबई से अपने पैतृक गांव सियानी लौटने का फैसला किया। शायद उसे लगा कि अब एक साल हो गया है, पुलिस उसकी तलाश में ढीली पड़ गई होगी, या फिर उसे कोई पहचान नहीं पाएगा।
लेकिन उसकी ये चाल उस पर ही भारी पड़ने वाली थी। उसने सोचा होगा कि गांव में आकर आराम से कुछ दिन बिताएगा और फिर से कहीं और निकल जाएगा, लेकिन इस बार पुलिस की आंखें उस पर थीं।
गुप्त सूचना और करंडे थाना पुलिस का फुल एक्शन
शेखपुरा पुलिस को सुरेश केवट के घर लौटने की भनक लग गई। ये कोई मामूली सूचना नहीं थी, बल्कि एक साल के इंतजार के बाद मिली वो लीड थी, जिस पर तुरंत कार्रवाई करना जरूरी था।
करंडे थाना पुलिस को जैसे ही गुप्त सूचना मिली कि सुरेश केवट सियानी गांव में अपने घर लौटा है और गांव के बघार (एक स्थानीय शब्द, जिसका अर्थ खेत या खाली जगह के आसपास का इलाका होता है) में छिपा हुआ है, तुरंत एक टीम तैयार की गई।
थाना अध्यक्ष राकेश कुमार और पुलिस सब-इंस्पेक्टर ललित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष छापामार दल का गठन किया गया। टीम ने बिना देर किए सियानी गांव की तरफ कूच किया।
पुलिस जानती थी कि सुरेश केवट एक खतरनाक अपराधी है और उसे पकड़ना आसान नहीं होगा, इसलिए पूरी तैयारी के साथ गई थी। जैसे ही टीम बघार इलाके में पहुंची, उन्होंने घेराबंदी कर दी और सुरेश केवट को भागने का कोई मौका नहीं दिया।
पुलिस ने घेराबंदी करके सुरेश केवट को पकड़ लिया। इतने दिनों से जिस अपराधी की तलाश थी, उसे आखिरकार दबोच लिया गया था।
गिरफ्तारी के वक्त उसने शायद ही सोचा होगा कि पुलिस को उसकी हर हरकत की खबर है। ये शेखपुरा पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी थी, खासकर उन पुलिसकर्मियों के लिए, जो पिछले साल इस हमले में घायल हुए थे।
अब पहुंचा शेखपुरा जेल, खत्म हुई फरारी
गिरफ्तारी के बाद सुरेश केवट को करंडे थाना लाया गया, जहां उससे गहन पूछताछ की गई। पुलिस ने उसकी फरारी के दौरान की गई गतिविधियों और हमले से जुड़े अन्य पहलुओं पर जानकारी इकट्ठा की।
पूछताछ के बाद, सुरेश केवट को पुलिस निगरानी में शेखपुरा जेल भेज दिया गया। अब वह उन 12 अन्य अभियुक्तों के साथ जेल में होगा, जिन्हें पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी।
इस गिरफ्तारी के साथ, उत्पाद दारोगा प्रीति कुमारी की शिकायत पर दर्ज उस जानलेवा हमले के मामले में सभी 13 नामजद अभियुक्त पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। एक साल की लंबी प्रतीक्षा और अथक प्रयासों के बाद, पुलिस ने इस चुनौती को पूरा कर दिखाया है।
यह घटना दर्शाती है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधी कितना भी दूर भाग जाए, आखिरकार उसे अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। शेखपुरा पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून से बच पाना उनके लिए असंभव है।

