शेखपुरा: सोमवार का दिन था, धूप खिली थी और किऊल से गया की तरफ जा रही पैसेंजर ट्रेन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। ट्रेन जैसे ही शेखपुरा रेलवे स्टेशन पर रुकी, यात्रियों का उतरना-चढ़ना शुरू हुआ। लेकिन इसी गहमागहमी के बीच एक डिब्बे के फर्श पर बेसुध पड़े एक बुजुर्ग शख्स पर कुछ यात्रियों की नजर पड़ी। पहले लगा शायद नींद आ गई होगी, लेकिन जब कई आवाजें लगाने के बाद भी कोई हरकत नहीं हुई, तो लोगों को कुछ गड़बड़ होने का एहसास हुआ। ट्रेन में एक पल को सन्नाटा पसरा, फिर फुसफुसाहट तेज हुई और जल्द ही ये बात GRP पुलिस तक पहुंच गई।
जो यात्री अब तक अपनी मंजिल की सोच रहे थे, उनकी नजरें एक पल को उस बुजुर्ग पर ठहर गईं। लगभग 68 साल के इस शख्स के शरीर में कोई हलचल नहीं थी।
सूचना मिलते ही जीआरपी की टीम फौरन मौके पर पहुंची। पुलिसवालों ने पास जाकर देखा, तो मामला साफ हो गया – बुजुर्ग अब इस दुनिया में नहीं थे।
एक चलती ट्रेन में, किसी को पता भी नहीं चला कि कब एक जिंदगी थम गई। यह घटना सिर्फ शेखपुरा स्टेशन पर मौजूद यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि पुलिसवालों के लिए भी रहस्य बन गई।
कौन था ये बुजुर्ग? कहां से आया था? और सबसे बड़ा सवाल – आखिर मौत हुई कैसे?
पुलिस ने बिना देर किए शव को ट्रेन से नीचे उतारा। स्टेशन पर अचानक भीड़ बढ़ गई।
हर कोई जानना चाहता था कि माजरा क्या है। जीआरपी थाना शेखपुरा के थाना अध्यक्ष अजीत कुमार खुद इस पूरे मामले को मॉनिटर कर रहे थे।
उन्होंने तुरंत शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल शेखपुरा भेजने का बंदोबस्त किया, ताकि मौत की असल वजह का पता चल सके। लेकिन शुरुआती जांच में जो चीजें सामने आईं, वो कहानी को और उलझाने वाली थीं।
अकेला सफर और मिले अहम सुराग
पुलिस ने जब मृतक की तलाशी ली, तो कुछ ऐसी चीजें हाथ लगीं, जो भले ही पहचान नहीं बता पा रही थीं, लेकिन एक दिशा जरूर दे रही थीं। मृतक के पास से एक रेलवे टिकट मिला।
यह टिकट बड़हिया से शेखपुरा रेलवे स्टेशन तक का था। बड़हिया, लखीसराय जिले में है।
इससे साफ था कि बुजुर्ग ने अपना सफर लखीसराय से शुरू किया था और उनकी मंजिल शेखपुरा ही थी। साथ ही, एक थैला भी मिला।
जब पुलिस ने थैले को खोला, तो उसमें कुछ कपड़े और खाने-पीने का सामान रखा था। यह साफ इशारा था कि बुजुर्ग शायद किसी लंबी यात्रा पर थे, या कम से कम कुछ दिनों के लिए अपने घर से बाहर निकले थे।
थाना अध्यक्ष अजीत कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया, "अभी तक मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। उनके पास से पहचान संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिले हैं, जो उनकी पहचान पुख्ता कर सकें।
" उन्होंने आगे कहा कि केवल एक रेल टिकट और कुछ निजी सामान ही मिला है। पुलिस अब अपने स्तर पर इस गुमनाम शख्स की पहचान स्थापित करने की पूरी कोशिश कर रही है।
आसपास के थानों और रेलवे पुलिस के नेटवर्क में भी जानकारी साझा की जा रही है, ताकि अगर कोई गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई हो तो उसका मिलान किया जा सके।
शादी में शामिल होने आ रहे थे? पुलिस का अनुमान
पुलिस फिलहाल एक अहम अनुमान पर काम कर रही है। मिले हुए टिकट और शेखपुरा की मंजिल को देखते हुए, GRP पुलिस का मानना है कि बुजुर्ग लखीसराय जिले के बड़हिया स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए थे और शेखपुरा जिले में किसी रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में शामिल होने आ रहे थे।
शेखपुरा जिले में इन दिनों शादी-ब्याह का माहौल है और ऐसे में दूसरे जिलों से लोग अपने रिश्तेदारों के यहां आते-जाते रहते हैं। यह एक स्वाभाविक संभावना लगती है।
अजीत कुमार ने यह भी बताया कि पुलिस आसपास के इलाकों में, खासकर बड़हिया से जुड़े संभावित रिश्तेदारों और परिचितों की तलाश कर रही है। हालांकि, बिना किसी ठोस पहचान के यह काम किसी चुनौती से कम नहीं है।
पुलिस हर उस संभावना को खंगाल रही है, जो इस बुजुर्ग की पहचान बताने में मदद कर सके।
पहचान के लिए 72 घंटे का इंतजार
कानूनी प्रक्रिया के तहत, पुलिस ने शव को सदर अस्पताल शेखपुरा के मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया है। थाना अध्यक्ष अजीत कुमार ने बताया कि शव की पहचान के लिए अगले 72 घंटे तक इंतजार किया जाएगा।
इस दौरान, पुलिस लगातार कोशिश करेगी कि मृतक के परिवार या किसी परिचित तक यह सूचना पहुंचाई जा सके। अगर 72 घंटे के भीतर कोई दावेदार सामने नहीं आता है, तो नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
यह एक संवेदनशील स्थिति है, जहां एक अनजान शख्स की जिंदगी का अंत हो गया और अब उसकी पहचान ही सबसे बड़ी पहेली बनी हुई है। पुलिस उम्मीद कर रही है कि जल्द ही कोई न कोई सुराग मिलेगा और यह रहस्य सुलझ पाएगा।
फिलहाल, शेखपुरा रेलवे स्टेशन पर हुई इस घटना ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं।

