सहरसा: बिहार पुलिस में नौकरी का सपना पाले बैठे युवाओं के अरमानों पर पानी फेरने वाले एक बड़े ठगी गिरोह का सहरसा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। ये वो लोग थे, जो बिहार में सरकारी नौकरी के नाम पर लाखों-करोड़ों डकारने का धंधा चला रहे थे। शहर के शिवपुरी वार्ड-34 में एक किराए के मकान से इस पूरे गोरखधंधे की भनक लगी, जिसके बाद पुलिस ने ऐसा जाल बिछाया कि 6 धुरंधर सलाखों के पीछे पहुँच गए। कहानी सिर्फ इतनी नहीं है कि कुछ लोग पकड़े गए, बल्कि ये एक ऐसे बड़े नेटवर्क का खुलासा है जिसने कई जिलों में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
मामला तब सामने आया जब सहरसा पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि शिवपुरी वार्ड-34 में एक मकान में बैठकर कुछ लोग बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में नौकरी दिलाने का झांसा दे रहे हैं। ये लोग हर अभ्यर्थी से 6 लाख रुपये की डिमांड कर रहे थे।
इतनी बड़ी रकम के बदले ये क्या-क्या लेते थे? अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, उनके सारे मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और तो और, खाली हस्ताक्षरित चेक भी जमा करवा लेते थे। यानी, नौकरी की चाहत में लोग अपना सब कुछ दाँव पर लगा रहे थे।
सूचना की गंभीरता को समझते हुए पुलिस मुख्यालय डीएसपी कमलेश्वर प्रसाद सिंह ने तुरंत कार्रवाई की। सोमवार को पुलिस ने उस मकान पर छापा मारा।
पुलिस टीम जब वहाँ पहुँची तो देखकर हैरान रह गई। मौके से दो मुख्य आरोपी चंदन कुमार (खुरहान) और चंदन कुमार यादव (सिमराहा) को रंगे हाथों धर दबोचा गया।
तलाशी के दौरान जो सामान मिला, उसने ठगी के इस बड़े खेल का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोल दिया।
कैसे बिछाया था ठगी का जाल?
छापेमारी में पुलिस को सिर्फ दो आरोपी ही नहीं मिले, बल्कि उनके पास से वो सारे सबूत भी हाथ लगे जो इस ठगी के नेटवर्क को साबित करते थे। मौके से अलग-अलग जिलों के दर्जनों अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, उनके एडमिट कार्ड, कई हस्ताक्षरित खाली चेक और पाँच मोबाइल फोन बरामद हुए।
सोचिए, कितने युवाओं का भविष्य इन कागजात के साथ दाँव पर लगा हुआ था। पुलिस ने जब जब्त किए गए मोबाइल फोनों की जाँच की तो व्हाट्सएप चैट में अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड और परीक्षा से जुड़े कई संदिग्ध संदेश मिले।
इन संदेशों और दस्तावेजों से साफ हो गया कि यह सिर्फ एक छोटे-मोटे ठगों का काम नहीं, बल्कि एक बड़े, संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।
पूछताछ के दौरान, मुख्य आरोपियों में से एक ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वो साल 2020 से ही नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर अभ्यर्थियों से उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज और खाली चेक लेता आ रहा है।
यह धंधा कोई नया नहीं था, बल्कि पिछले चार साल से बड़े पैमाने पर चल रहा था। पुलिस की मानें तो, जब किसी अभ्यर्थी का अंतिम चयन हो जाता था, तो उससे पूरे छह लाख रुपये वसूले जाते थे।
इसमें से 50 हजार रुपये खुद आरोपी अपने पास रखता था, और बाकी की मोटी रकम इस गिरोह के अन्य बड़े सदस्यों तक पहुँचाई जाती थी। यह एक सुनियोजित और पैसों के बड़े लेन-देन वाला रैकेट था।
मोबाइल फोन और व्हाट्सएप चैट से खुलासे
जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ सहरसा तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें कई अन्य जिलों में भी फैली हुई थीं। सहरसा के अलावा मधेपुरा, कटिहार, भागलपुर, बेगूसराय, मधुबनी, गया और किशनगंज जैसे जिलों तक इसने अपना जाल फैला रखा था।
यानी, बिहार के एक बड़े हिस्से के युवाओं को इस गिरोह ने ठगी का शिकार बनाया था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आगे कार्रवाई की। उनकी निशानदेही पर बरियाही से विवेक कुमार नाम के एक और शख्स को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस का दावा है कि विवेक कुमार के खेत से दो और मोबाइल फोन बरामद हुए, जिनमें पुलिस को परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर और व्हाट्सएप चैट मिले हैं। यह सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह गिरोह न सिर्फ नौकरी दिलाने का झांसा दे रहा था, बल्कि परीक्षा में अनुचित साधनों का भी इस्तेमाल कर रहा था।
नेटवर्क की आगे की कड़ियाँ और अन्य गिरफ्तारियाँ
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया। इसी क्रम में सहरसा पुलिस की सूचना पर पटना में भी कार्रवाई हुई।
पटना में एक अभ्यर्थी को ब्लूटूथ डिवाइस के साथ हिरासत में लिया गया। वहीं, किशनगंज में भी एक अन्य अभ्यर्थी को संदिग्ध व्हाट्सएप चैट के आधार पर पुलिस ने दबोचा।
ये गिरफ्तारियाँ दिखाती हैं कि यह गिरोह कितना गहरा और व्यापक था।
इस पूरे मामले में अब तक कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने इन छह आरोपियों, 12 नामजद लोगों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
इसके अलावा, बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है और उम्मीद है कि इस बड़े ठगी गिरोह की सारी कड़ियाँ जल्द ही सुलझ जाएंगी और इसके पीछे के सभी बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।

