सहरसा: बिहार का सहरसा जिला. यहां के बाल भवन किलकारी में आजकल एक चर्चा खूब जोर पकड़ रही है. बात हो रही है एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा के छात्र अर्णव आर्यन की. अर्णव ने यहां पांच हफ्ते की ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप पूरी की है. ये इंटर्नशिप सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं थी, बल्कि अर्णव ने इस दौरान सहरसा के बच्चों और किशोरों की ज़िंदगी में कुछ नए रंग भरे हैं. 'ह्यूमन वैल्यूज एंड कम्युनिटी आउटरीच' यानी एचवीसीओ कार्यक्रम के तहत हुई ये इंटर्नशिप, 2 जून को शुरू होकर 5 जुलाई को खत्म हुई. अर्णव ने अपने इन 35 दिनों में सिर्फ किलकारी के दफ्तर में बैठकर काम नहीं किया, बल्कि वो सीधे बच्चों के बीच पहुंचे, उनके साथ वक्त बिताया और कई रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया. उनकी इस कोशिश ने किलकारी के बच्चों में एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भरने का काम किया है.
इंटर्नशिप के दौरान अर्णव ने शहर के उन इलाकों का दौरा किया, जिन्हें हम अक्सर स्लम या मलिन बस्तियां कहते हैं. उन्होंने यहां के बच्चों और किशोरों से सीधे बातचीत की, उनकी परेशानियां समझीं और उनके साथ मिलकर कई सामुदायिक आउटरीच गतिविधियां चलाईं.
इन गतिविधियों का मकसद सिर्फ खेलकूद कराना नहीं था, बल्कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास जगाना, उन्हें जीवन कौशल सिखाना और उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा देना था. सोचिए, एक बीबीए (हेल्थकेयर मैनेजमेंट) का छात्र जब इन बच्चों के बीच पहुंचता है, तो वो उन्हें सिर्फ किताबी बातें नहीं बताता, बल्कि व्यावहारिक तरीके से उन्हें जीवन की चुनौतियों से निपटने के तरीके सिखाता है.
ये वो हुनर हैं, जो उन्हें आगे चलकर समाज में बेहतर जगह बनाने में मदद करते हैं.
किलकारी में अर्णव का अहम योगदान
अर्णव सिर्फ स्लम एरिया तक ही सीमित नहीं रहे. उन्होंने 'सुरक्षित स्थान, सहरसा' में भी कई सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में हिस्सा लिया.
यहां उनका मुख्य फोकस किशोरों के सामाजिक व्यवहार को सुधारना और उन्हें अपनी भावनाओं को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना था. ये एक ऐसी पहल है, जो बच्चों को गलत राह पर जाने से रोकती है और उन्हें समाज का एक जिम्मेदार सदस्य बनने में मदद करती है.
इसके अलावा, किलकारी में हर साल होने वाले 'चक धूम धूम' समर कैंप का समापन समारोह भी इन्हीं दिनों में था. अर्णव ने इस बड़े आयोजन को सफल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उन्होंने पूरे समारोह के संचालन और समन्वय में टीम के साथ मिलकर काम किया, जिसकी वजह से कार्यक्रम शानदार तरीके से संपन्न हुआ. किलकारी संस्थान ने उनके काम की खूब तारीफ की है.
खासकर उनके बातचीत के तरीके, टीम वर्क की भावना, अपनी जिम्मेदारी के प्रति उनकी निष्ठा और उनके सकारात्मक रवैये को सराहा गया है. यह दर्शाता है कि अर्णव ने इस इंटर्नशिप को कितनी गंभीरता और लगन से लिया.
इंटर्नशिप का दोहरा लाभ: छात्र और बच्चे
किलकारी के प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक प्रणव भारती ने अर्णव के काम की तारीफ करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए इस तरह की इंटर्नशिप बहुत फायदेमंद होती हैं. उन्होंने समझाया कि यह सिर्फ छात्रों के लिए नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर होता है, जिनके साथ ये छात्र काम करते हैं.
प्रणव भारती ने बताया कि विद्यार्थियों को इससे समाज और बाल विकास से जुड़े कामों का सीधा और व्यावहारिक अनुभव मिलता है. वे किताबी ज्ञान से परे जाकर जमीनी हकीकत को समझते हैं, जो उनके भविष्य के करियर और व्यक्तित्व विकास के लिए बहुत जरूरी है.
दूसरी ओर, इन बच्चों को भी नई ऊर्जा, नए आइडियाज और बेहतर संवाद का मौका मिलता है. जब युवा और ऊर्जावान छात्र उनके बीच आते हैं, तो वे उनसे कुछ नया सीखते हैं, नए सपने देखते हैं और अपनी बातें खुलकर कहने की हिम्मत जुटा पाते हैं.
यह एक ऐसा आदान-प्रदान है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे से सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं. भारती ने इस बात पर भी जोर दिया कि किलकारी भविष्य में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल विकास और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों को लगातार प्रोत्साहित करता रहेगा.
उनका मानना है कि ऐसे प्रयास ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं.
भावभीनी विदाई और उज्ज्वल भविष्य की कामना
अर्णव आर्यन की इंटर्नशिप पूरी होने पर, किलकारी कार्यालय के साथियों ने उन्हें सम्मान के साथ विदाई दी. इस अवसर पर ए.
ए.ओ.
विश्व विजय झा, सीआरपी शब्दा हज्जू और एपीओ मधु कुमारी मौजूद थीं. इन सभी ने अर्णव को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
अर्णव के लिए भी यह इंटर्नशिप एक अनमोल अनुभव रही होगी, जहां उन्होंने अपने बीबीए (हेल्थकेयर मैनेजमेंट) की पढ़ाई को सामाजिक कार्यों से जोड़ा और समझा कि समाज में स्वास्थ्य और भलाई सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामुदायिक स्तर पर किए गए प्रयासों से भी तय होती है. यह इंटर्नशिप न सिर्फ अर्णव के लिए, बल्कि किलकारी सहरसा के बच्चों और पूरे समुदाय के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक अनुभव रही है.




































