अरवल: बिहार के अरवल जिले में प्यार ने एक बार फिर मजहब, जाति और परिवार की दीवारों को तोड़कर अपना रास्ता बना ही लिया। सोमवार की शाम अरवल के मशहूर मोथा सूर्य मंदिर परिसर में एक ऐसी शादी हुई, जिसने आसपास के सैकड़ों लोगों को अपनी तरफ खींच लिया। यह कोई आम शादी नहीं थी, बल्कि दो प्रेमियों का मिलन था, जिन्होंने घर-परिवार की नाराज़गी के बावजूद एक-दूसरे का हाथ थामने का फैसला किया। जैसे ही यह खबर हवा की तरह फैली, मंदिर में शिव चर्चा में शामिल महिलाएं और आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंच गए। सब अपनी आंखों से देखना चाहते थे, कैसे दो दिल मिल रहे हैं और कैसे सिर्फ दो रुपये के सिंदूर से एक नई गृहस्थी की शुरुआत हो रही है। इस शादी ने दिखा दिया कि मोहब्बत के आगे सब बेमानी है।
मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल था, लोग उत्सुकता से इस प्रेमी युगल को आशीर्वाद देने के लिए जमा हो रहे थे। पंडित जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शादी की रस्में शुरू कीं, और हर मंत्र के साथ रोहित और ममता का प्रेम और गहरा होता जा रहा था।
यह सिर्फ एक शादी नहीं थी, बल्कि परिवारिक विरोध के सामने प्यार की जीत का जश्न था, जिसे देखने और आशीर्वाद देने के लिए पूरा इलाका उमड़ पड़ा था।
कहानी शुरू होती है गया जिले से, जहां के अलीपुर थाना क्षेत्र के मीराबीघा गांव का रहने वाला 22 साल का रोहित कुमार पासवान और बराचट्टी थाना के भेलवा गांव की ममता कुमारी एक-दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे। उनकी मोहब्बत कोई एक-दो दिन की नहीं थी, बल्कि लंबे समय से दोनों एक-दूसरे पर जान छिड़कते थे।
लेकिन जैसा कि अक्सर कहानियों में होता है, उनके प्यार को परिवारों की रजामंदी नहीं मिली। परिवार वाले इस रिश्ते के खिलाफ थे, जिसकी वजह से दोनों के लिए साथ रहना मुश्किल हो गया था।
जब सारे रास्ते बंद दिखे, तो रोहित और ममता ने फैसला किया कि अब वो घर-परिवार की मर्जी का इंतजार नहीं करेंगे, बल्कि अपनी जिंदगी का फैसला खुद करेंगे। उन्होंने घर से भागकर शादी करने की ठान ली, ताकि उनका प्यार अधूरा न रहे।
मोहब्बत की दास्तान: रोहित और ममता का सफ़र
रोहित और ममता ने अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अरवल के ऐतिहासिक मोथा सूर्य मंदिर को चुना। यह मंदिर अपने धार्मिक महत्व के लिए तो जाना ही जाता है, अब यह प्रेमियों के मिलन का गवाह भी बन गया।
सोमवार की शाम मंदिर परिसर में एक खास ही नजारा था। पंडित जी ने पूरी तैयारी कर रखी थी।
मंदिर प्रशासन की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार गूंजने लगे। जैसे ही रोहित और ममता एक-दूसरे के सामने आए, उनकी आंखों में अपने सपनों को पूरा करने की चमक साफ दिख रही थी।
शादी की रस्में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूरी हुईं। पहले दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई।
इस पल को देखने के लिए सैकड़ों ग्रामीण जमा थे और हर कोई इस जोड़े को निहार रहा था। वरमाला के बाद वो पल आया, जिसका इंतजार रोहित और ममता को सबसे ज्यादा था।
रोहित ने ममता की मांग में सिंदूर भरा और उसे अपनी जीवनसंगिनी बना लिया। इस दौरान उसने सिर्फ दो रुपये के सिंदूर का इस्तेमाल किया, जो उसकी सादगी और प्रेम में विश्वास को दर्शाता है।
परिजनों की नाराज़गी और ग्रामीणों का आशीर्वाद
इस पूरे विवाह समारोह में सबसे खास बात यह थी कि रोहित के माता-पिता भी मंदिर में मौजूद थे। उन्होंने अपने बेटे और बहू को पूरे दिल से आशीर्वाद दिया।
शायद उन्होंने अपने बेटे की खुशी में ही अपनी खुशी मान ली थी, या फिर रोहित के अडिग फैसले ने उन्हें आखिरकार झुकने पर मजबूर कर दिया था। उनकी मौजूदगी ने इस शादी को एक सामाजिक वैधता प्रदान की, हालांकि लड़की के परिवार वाले इस विवाह से खुश नहीं थे और उनकी तरफ से कोई भी शामिल नहीं हुआ।
यह इस बात का सबूत था कि प्यार की राह इतनी आसान नहीं होती, लेकिन अगर हौसला हो तो हर मुश्किल पार की जा सकती है।
शादी के बाद रोहित कुमार पासवान ने जो कहा, वह आज के समाज के लिए एक बड़ा संदेश था। उसने गर्व से कहा, “आज के समय में लोग दहेज के लिए सालों तक शादी नहीं करते, लेकिन मुझे दहेज की कोई चाह नहीं है।
मैंने महज ₹2 के सिंदूर से अपने जीवनसाथी को अपनाया है। प्यार और विश्वास ही सबसे बड़ा धन है।
” रोहित का यह बयान सिर्फ एक युवक की बात नहीं थी, बल्कि यह दहेज जैसी कुप्रथा पर एक करारा प्रहार था और उसने यह साबित कर दिया कि असली दौलत प्यार और रिश्तों में होती है, न कि नोटों और गहनों में।
मोथा सूर्य मंदिर में हुई यह शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। हर कोई इस जोड़े की हिम्मत और प्यार की मिसाल दे रहा है।
बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने नवविवाहित जोड़े को उनके सुखद वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। हर तरफ रोहित और ममता के प्यार के चर्चे थे, जिसने साबित कर दिया कि सच्चे प्यार को कोई दीवार नहीं रोक सकती।
उनका सफर अभी शुरू हुआ है, और उन्होंने समाज को एक नया संदेश दिया है कि प्यार का मूल्य किसी भी भौतिक वस्तु से कहीं ज़्यादा है।

