मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी जिले से एक ऐसी खबर आई है, जो बताती है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन मिलता ज़रूर है। 12 साल पहले, जमीन के एक छोटे से टुकड़े को लेकर एक परिवार में ऐसा खूनी खेल खेला गया था, जिसकी दहशत आज भी वहां के लोगों को सिहरा देती है। एक तेजाबी हमला, जिसने न सिर्फ कई जिंदगियां झुलसा दीं, बल्कि पूरे इलाके में खौफ फैला दिया। अब इतने लंबे इंतजार के बाद, कोर्ट ने इस खौफनाक वारदात के आरोपियों को दोषी करार दिया है।
सोचिए जरा, 12 साल! यह कोई छोटा वक्त नहीं होता। इन 12 सालों में पीड़ित परिवार ने न जाने कितने दर्द और संघर्ष देखे होंगे।
लेकिन अब, अदालत के इस फैसले से उन्हें न्याय की एक उम्मीद जगी है। 6 जुलाई की तारीख तय हुई है, जब कोर्ट इन दोषियों को सजा सुनाएगा।
यह सिर्फ एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि जुर्म चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।
मामला कोई आज-कल का नहीं, बल्कि 2008 का है। घोड़ासहन थाना क्षेत्र में एक पुश्तैनी जमीन को लेकर परिवार में ही विवाद खड़ा हुआ था।
पीड़ित अभय कुमार कश्यप ने बताया कि उनके पिता ने 2008 में अपनी सारी पुश्तैनी जमीन अपने तीनों बेटों में बांट दी थी। हर बेटे को करीब एक-एक बीघा जमीन का टुकड़ा मिला था।
तब सबको लगा था कि अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन किसे पता था कि यही जमीन एक दिन तेजाब का जरिया बन जाएगी।
जमीन विवाद की जड़ और खौफनाक साजिश
अभय कुमार कश्यप की कोई संतान नहीं थी। बड़े भाई विजय राय की नजर शायद इसी बात पर थी।
अभय बताते हैं कि उनके बड़े भाई विजय राय ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह अपने हिस्से की जमीन उनके नाम कर दें। बार-बार धमकी दी जाती, प्रताड़ित किया जाता।
अभय ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यह उनकी जमीन है और वह इसे किसी और को नहीं देंगे।
बस, यही इनकार विजय राय को रास नहीं आया और यहीं से एक खौफनाक साजिश की नींव रखी गई।
अभय के मुताबिक, विजय राय ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों के साथ मिलकर एक ऐसी योजना बनाई, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। उन्होंने तय किया कि अभय और उसके परिवार को सबक सिखाने के लिए उन पर तेजाब से हमला किया जाएगा।
यह सिर्फ जमीन का लालच नहीं था, बल्कि रिश्ते-नातों की मर्यादा को तार-तार करने वाला एक जघन्य अपराध था। इस साजिश में सिर्फ विजय राय ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और कुछ अन्य ससुराल पक्ष के लोग भी शामिल थे।
तेजाबी हमला: एक दर्दनाक मंजर
योजना के मुताबिक, एक दिन अभय की पत्नी पर तेजाब फेंक दिया गया। हमला इतना अचानक था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
तेजाब पड़ते ही उनकी चीख निकल गई। उस चीख की आवाज सुनकर, परिवार के बीच वाले भाई की पत्नी और उनके बच्चे उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़े।
लेकिन हमलावरों का इरादा नेक नहीं था। उन्होंने उन बचाने आए लोगों पर भी तेजाब फेंक दिया।
इस हमले में अभय की पत्नी के साथ-साथ उनके बीच वाले भाई की पत्नी और बच्चे भी बुरी तरह झुलस गए।
यह मंजर कितना दर्दनाक रहा होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। चीख-पुकार, दर्द और खौफ का वो माहौल जिसने पूरे घर को दहला दिया।
सभी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत मोतिहारी सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चला।
यह सिर्फ शारीरिक चोटें नहीं थीं, बल्कि उन पर पड़े तेजाब ने परिवार के दिलों पर भी गहरे घाव दिए थे। इस मामले को लेकर घोड़ासहन थाने में तत्काल प्राथमिकी यानी FIR दर्ज कराई गई और पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू की।
12 साल की लंबी कानूनी लड़ाई
हादसा तो 2008 में हुआ था, लेकिन न्याय की राह इतनी आसान नहीं थी। यह मामला पिछले 12 सालों से अदालत में लंबित था।
12 साल, सोचिए! इस दौरान कितनी ही पेशियां हुईं होंगी, कितने ही वकील बदले गए होंगे, कितने ही गवाहों से पूछताछ हुई होगी। पीड़ित परिवार के लिए हर दिन एक चुनौती रहा होगा, जब उन्हें अपने दर्द को बार-बार याद दिलाना पड़ा होगा।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता पप्पू सिंह ने इस लंबी लड़ाई का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले 12 सालों से दोनों पक्षों की ओर से लगातार बहस और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में न्याय की प्रक्रिया धीमी जरूर होती है, लेकिन सत्य की जीत आखिर में होती है।
अदालत ने इस दौरान हर पहलू पर बारीकी से गौर किया, सभी गवाहों के बयान लिए गए और पेश किए गए सबूतों को जांचा-परखा। यह कानूनी प्रक्रिया बताती है कि न्यायपालिका किस तरह से हर मामले की तह तक जाती है।
न्याय की उम्मीद और अगला कदम
अब इतने लंबे इंतजार के बाद, न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है।
इस फैसले से पीड़ित परिवार को एक बड़ी राहत मिली है। उन्हें लगा है कि इतने सालों का संघर्ष और दर्द अब रंग ला रहा है।
वकील पप्पू सिंह ने बताया कि अदालत ने फिलहाल सजा का ऐलान नहीं किया है, बल्कि उसे सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की निगाहें 6 जुलाई की तारीख पर टिकी हैं, जब अदालत अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी और यह तय होगा कि इन दोषियों को उनके किए की क्या सजा मिलती है।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी चर्चा है। यह घटना सिर्फ एक परिवारिक विवाद नहीं थी, बल्कि इसने समाज में पारिवारिक रिश्तों में पनपते इस तरह के जघन्य अपराधों के प्रति चिंता भी जगाई थी।
अदालत के इस फैसले से यह उम्मीद बंधी है कि अब ऐसे मामलों में अपराधी बच नहीं पाएंगे। अब सबकी नजरें 6 जुलाई को आने वाले न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे दर्दनाक अध्याय का समापन करेगा।

