मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का नाम सुनते ही कभी चंपारण सत्याग्रह की याद आती है, लेकिन आजकल मोतिहारी एक और वजह से चर्चा में है - बाइक चोरी! जी हाँ, यहाँ बाइक चोरों ने ऐसा आतंक मचा रखा था कि लोग अपनी गाड़ियाँ पार्क करने से पहले कई बार सोचते थे। लेकिन अब मोतिहारी पुलिस ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिससे चोरों की नींद उड़ गई है और आम लोगों को थोड़ी राहत मिली है। मुफ्फसिल थाना पुलिस ने एक जबरदस्त एक्शन में एक संगठित बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। चार शातिर चोरों को धर दबोचा गया है और उनके कब्जे से पाँच चमचमाती चोरी की बाइकें, एक मास्टर चाबी और बाइक चोरी में इस्तेमाल होने वाले कई औजार बरामद हुए हैं।
पुलिस का कहना है कि ये अपराधी लंबे समय से मोतिहारी और आस-पास के इलाकों में सक्रिय थे और पलक झपकते ही गाड़ियों को गायब कर देते थे। अब इनके पकड़े जाने के बाद कई और खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे इस गिरोह की पूरी जड़ें उखाड़ी जा सकेंगी।
ये सिर्फ बाइक चुराते ही नहीं थे, बल्कि एक बड़े नेटवर्क के तहत इन्हें शराब कारोबारियों तक को बेच देते थे, जिससे मोटा मुनाफा कमाया जा सके। तो आखिर कैसे पुलिस को मिली इस गिरोह की भनक और कैसे इन शातिरों को धर दबोचा गया, आइए पूरी कहानी जानते हैं।
पुलिस को ऐसे मिली भनक और हुई कार्रवाई
दरअसल, मोतिहारी पुलिस को पिछले कुछ समय से लगातार बाइक चोरी की शिकायतों से जूझना पड़ रहा था। हर दूसरे-तीसरे दिन किसी न किसी की बाइक चोरी हो जाती थी, जिससे आम जनता में काफी गुस्सा था।
पुलिस भी लगातार इन चोरों के पीछे पड़ी थी। इसी कड़ी में मुफ्फसिल थाना पुलिस को एक पुख्ता खबर मिली।
सूचना थी कि हसुआहाँ गाँव में बाइक चोरों का एक गिरोह सक्रिय है। ये लोग न सिर्फ बाइकें चुरा रहे थे, बल्कि चुराई हुई गाड़ियों को गाँव में ही छिपाकर रखा गया है।
यह खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हलचल मच गई। मुफ्फसिल थाना पुलिस ने बिना वक्त गंवाए तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया।
इस टीम ने बड़े गोपनीय तरीके से हसुआहाँ गाँव में छापेमारी की योजना बनाई। पूरी तैयारी के साथ जब पुलिस टीम गाँव में दाखिल हुई तो चार संदिग्धों को पकड़ा गया।
शुरुआत में ये लोग पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ शुरू की और उनके ठिकानों की तलाशी ली, तो उनकी सारी चोरी पकड़ी गई। उनके कुबूलनामे और बरामद सामानों ने उनकी संलिप्तता की पुष्टि कर दी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पकड़े गए शातिर चोरों की पहचान श्यामबाबू कुमार, सुखल मुखिया, खलीफा मुखिया और राहुल कुमार के रूप में हुई है।
चोरों के घरों से मिला चोरी का खजाना
पुलिस की यह छापेमारी इतनी सटीक थी कि चोरों के घरों से चोरी का माल भी बरामद हो गया। यह पुलिस की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
एक-एक करके जब पुलिस ने आरोपियों के घरों की तलाशी ली तो चोरी की गई मोटरसाइकिलों का एक पूरा जखीरा सामने आया।
- सबसे पहले, श्यामबाबू कुमार के घर से पुलिस को एक बिना नंबर प्लेट की सुपर स्प्लेंडर बाइक मिली। इसके साथ ही, बाइक चोरी की सबसे अहम चीज – एक मास्टर चाबी भी बरामद हुई। यह मास्टर चाबी ही इन चोरों का सबसे बड़ा हथियार थी, जिससे वे चंद सेकंड में किसी भी बाइक का लॉक खोल देते थे।
- इसके बाद, सुखल मुखिया के घर की बारी आई। यहाँ से पुलिस को एक हीरो होंडा मोटरसाइकिल मिली, जिसकी नंबर प्लेट को घिसकर मिटाने की कोशिश की गई थी, ताकि उसकी पहचान न हो सके।
- और अंत में, खलीफा मुखिया के घर पर जब पुलिस ने छापा मारा तो वहाँ का नज़ारा हैरान कर देने वाला था। यहाँ से एक-दो नहीं बल्कि तीन चोरी की मोटरसाइकिलें मिलीं। इसके अलावा, पुलिस को बाइक के खुले पार्ट्स और वाहन चोरी में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के औजार भी बरामद हुए। इन सभी बरामद सामानों को पुलिस ने तुरंत जब्त कर लिया और थाने ले आई।
मास्टर चाबी से पलक झपकते ही उड़ जाती थी बाइक
गिरफ्तार चोरों से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने कई चौंकाने वाले राज़ खोले। उन्होंने बताया कि वे अकेले नहीं, बल्कि अपने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर इस पूरे खेल को अंजाम देते थे।
मोतिहारी जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में घूम-घूम कर ये बाइक चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। उनकी चोरी का तरीका भी बड़ा शातिर था।
चोरी के लिए ये गिरोह विशेष रूप से तैयार की गई मास्टर चाबी का इस्तेमाल करता था। ये चाबी इतनी असरदार थी कि कुछ ही मिनटों में किसी भी बाइक का लॉक खुल जाता था और चोर गाड़ी लेकर फरार हो जाते थे।
वारदात को अंजाम देने के बाद, चोरी की गई मोटरसाइकिलों को ये लोग तुरंत एक जगह से दूसरी जगह छिपा देते थे। कई बार तो ये बाइक्स के पार्ट्स भी खोल देते थे ताकि उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाए।
ये सब एक सुनियोजित तरीके से किया जाता था, ताकि पुलिस इन तक न पहुँच सके।
शराब कारोबारियों से था चोरी की बाइकों का कनेक्शन
पूछताछ में एक और बड़ा खुलासा हुआ जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। चोरों ने बताया कि वे चोरी की इन मोटरसाइकिलों को सिर्फ बेचने के लिए नहीं चुराते थे, बल्कि उनका एक खास मार्केट भी था।
ये लोग चोरी की बाइक्स को शराब कारोबारियों सहित अन्य लोगों को कम कीमत पर बेच देते थे। बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब का अवैध कारोबार जोर-शोर से चल रहा है और ऐसे में शराब तस्करों को कम कीमत पर गाड़ियां मिल जाती थीं, जिनका इस्तेमाल वे अपने अवैध धंधे में करते थे।
इस तरह से, गिरोह के सदस्य चोरी की बाइक बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे और शराब कारोबारी भी सस्ते में वाहन पा लेते थे।
अब पुलिस इस एंगल पर भी गहराई से जांच कर रही है कि आखिर चोरी की ये बाइकें खरीदने वाले लोग कौन-कौन हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ मोतिहारी तक ही सीमित है या इसका फैलाव बिहार के अन्य जिलों तक भी है।
संभावना जताई जा रही है कि आरोपियों से और पूछताछ में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकेगा।
आगे क्या करेगी पुलिस?
इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए सदर डीएसपी-2 ने बताया कि गिरफ्तार चारों आरोपियों के खिलाफ मुफ्फसिल थाना में कांड संख्या 424/26 दर्ज कर लिया गया है। उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब इस गिरोह के बाकी बचे सदस्यों की तलाश में तेजी से जुटी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गिरोह के बाकी सदस्य भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे और मोतिहारी में बाइक चोरी की वारदातों पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।




































