अयोध्या: जहां एक ओर पूरे देश में भगवान राम का भव्य मंदिर बनने से खुशी का माहौल है, वहीं अयोध्या से एक ऐसी खबर आई है, जिसने सबको चौंका दिया है। बात राम मंदिर में आए भक्तों के चढ़ावे की चोरी की है। जी हां, आस्था के सबसे बड़े केंद्र में सेंध लग गई, और इस चोरी के पीछे का 'मास्टरमाइंड' एक ऐसा नाम है, जिसे शायद ही किसी ने सोचा होगा। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच में एक शख्स को मुख्य आरोपी बताया गया है, और उसके ऊपर करीब 70 बार चोरी करने का आरोप है।
ये मामला सिर्फ़ एक या दो दिन का नहीं, बल्कि करीब 40 दिनों तक चला एक ऐसा खेल है, जिसमें दान की गिनती के सिस्टम से ही पैसे उड़ाए जा रहे थे। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है और अब तीन आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं, जिनसे गहन पूछताछ चल रही है।
चोरी का मास्टरमाइंड कौन?
दरअसल, सूत्रों ने बुधवार (8 जुलाई) को बताया कि तीन सदस्यों वाली एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला नाम के शख्स को राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे की चोरी का मुख्य आरोपी बताया गया है। आप सोचिए, मंदिर जैसी पवित्र जगह पर दान के पैसों पर हाथ साफ करने वाला अविनाश शुक्ला ही वो कड़ी है, जिसके इर्द-गिर्द ये पूरा रैकेट घूम रहा था।
एसआईटी की जांच में अविनाश शुक्ला के खिलाफ सबसे पुख्ता सबूत मिले हैं, और इन्हीं सबूतों की वजह से उसे इस मामले में सबसे ऊपर रखा गया है। शुरुआती रिपोर्ट कहती है कि चोरी की ये पूरी कहानी शुक्ला के ही आसपास केंद्रित थी।
उसकी निशानदेही पर ही जांचकर्ताओं को पांच और आरोपियों की पहचान करने में मदद मिली, और ये भी पता चला कि मंदिर के दान राशि गणना कक्ष के अंदर कैसे हेरफेर किया जा रहा था।
40 दिनों में 70 बार, कैसे हुई इतनी बड़ी चोरी?
अब आप सोच रहे होंगे कि ये चोरी कैसे इतने दिनों तक चलती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी? सूत्रों की मानें तो 23 जून को प्रदेश के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई नौ पेज की रिपोर्ट में 30 साल के अविनाश शुक्ला को ही जांच का केंद्र बिंदु बताया गया है। एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच में लगभग 40 दिनों के दौरान मंदिर के दान राशि गणना कक्ष से करीब 70 बार चोरी के मामलों की पहचान की है।
यानी, हर दूसरे दिन या उससे भी ज्यादा बार मंदिर के चढ़ावे से पैसे गायब किए जा रहे थे। यह एक ऐसा ‘सिस्टमैटिक’ तरीका था, जिसे इतने लंबे समय तक अंजाम दिया गया।
सीसीटीवी में कैद हुए 'चंदा चोर'?
इस पूरे मामले की जड़ तक पहुंचने में सबसे बड़ा हथियार बना सीसीटीवी फुटेज। सूत्रों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की बार-बार की जांच में अविनाश शुक्ला को कई मौकों पर दान की रकम के खुले नोटों के बंडल हटाते और उन्हें छिपाते हुए देखा गया है।
आप कल्पना कीजिए कि जिस जगह आस्था के नाम पर लोग अपनी कमाई का एक हिस्सा दान करते हैं, वहीं एक शख्स खुलेआम नोटों के बंडल गायब कर रहा हो।
जांचकर्ताओं ने दान राशि की आवाजाही का पता लगाने और इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिकाओं को समझने के लिए इन फुटेज पर बहुत ज्यादा भरोसा किया। ये फुटेज ही थे, जिन्होंने चोरी की परतें खोलीं और आरोपियों तक पहुंचने में मदद की।
सबूतों का पहाड़ और अन्य आरोपी कौन हैं?
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अविनाश शुक्ला के खिलाफ जो सबूत मिले हैं, उनकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी के रिकॉर्ड, बैंक खातों के विश्लेषण और गवाहों के बयानों से हुई है। ये सारे सबूत एक-दूसरे से जुड़कर अविनाश शुक्ला को इस मामले के छह आरोपियों में से पहला और मुख्य आरोपी साबित करते हैं, जिनकी प्रथम दृष्ट्या संलिप्तता साफ नजर आई है।
सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर अविनाश शुक्ला के साथ अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल दिखे हैं। इन तीनों को भी इस चोरी के मामले में आरोपी बनाया गया है और वे फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं।
एसआईटी अब उनसे पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे रैकेट की हर कड़ी को जोड़ा जा सके और पता लगाया जा सके कि इस चोरी में और कौन-कौन शामिल था और इसका दायरा कितना बड़ा था।
यह मामला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में भी उठा, जहां एसआईटी के अंतरिम नतीजों पर सोमवार को चर्चा की गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया और आगे की कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश दिए।
अभी जांच जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरी चोरी का पर्दाफाश हो जाएगा और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी पवित्र जगह पर कोई ऐसा काम करने की हिम्मत न कर सके।



































