बाजार की खबर: बुधवार का दिन शेयर बाजार के लिए कुछ अच्छा नहीं रहा, खासकर बैंकिंग सेक्टर के लिए तो एकदम से 'लाल निशान' वाला साबित हुआ। मार्केट में जो तबाही मची, उसने अच्छे-अच्छे निवेशकों को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया। बैंक निफ्टी तो ऐसा लुढ़का कि 57,000 के अहम लेवल के करीब पहुंच गया, 2 परसेंट से भी ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हो गया? तो जनाब, इसके पीछे वजह हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका ईरान पर दिया गया एक बयान, जिसने ग्लोबल मार्केट में अचानक हलचल मचा दी।
ट्रंप के बयानों ने एक झटके में बाजार का पूरा 'मूड़' खराब कर दिया। आलम ये रहा कि निवेशकों में 'रिस्क-ऑफ' वाली बिकवाली (जोखिम से बचने के लिए शेयर बेचने की होड़) शुरू हो गई।
देखते ही देखते बैंक निफ्टी इंडेक्स 2.10 परसेंट गिरकर 56,977 के आसपास पहुंच गया। ये तो सिर्फ बैंक निफ्टी की बात है, पूरे बाजार पर इसका असर साफ दिख रहा था।
ट्रंप के एक बयान ने कैसे मचाई खलबली?
दरअसल, बुधवार दोपहर को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक नया बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ चल रहा 'युद्धविराम' (ceasefire) अब खत्म हो गया है।
बस फिर क्या था, इस एक बात ने भू-राजनीतिक टेंशन को फिर से बढ़ा दिया। मार्केट एक्सपर्ट्स तुरंत ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता में पड़ गए और नतीजतन, बिकवाली (selloff) का सिलसिला और तेज़ हो गया।
सिर्फ बैंक निफ्टी ही नहीं, दूसरे इंडेक्स का हाल भी बेहाल था। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 2.30 परसेंट गिर गया, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में भी 2.08 परसेंट की गिरावट आई।
ओवरऑल मार्केट की बात करें तो, सेंसेक्स 1,514.13 अंक या 1.94 परसेंट गिरकर 76,666.59 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 462.40 अंक या 1.90 परसेंट की गिरावट के साथ 23,936.30 पर पहुंच गया।
वोलैटिलिटी ने क्यों बढ़ाई निवेशकों की टेंशन?
इस गिरावट के साथ ही एक और डराने वाली चीज़ दिखी, वो थी वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में जबरदस्त उछाल। इसमें 25 परसेंट से ज्यादा की तेजी आई, जो सीधे तौर पर मार्केट में बढ़ रहे उतार-चढ़ाव का इशारा है।
जब VIX बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में बाजार में बड़े झटके लगने की आशंका है और अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे में छोटे निवेशक हों या बड़े, सबकी सांसें अटक जाती हैं।
सबसे ज़्यादा मार बैंकिंग शेयरों पर पड़ी। यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के शेयर तो लगभग 3.4 परसेंट तक लुढ़क गए।
इसके बाद बैंक ऑफ़ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में भी 2 परसेंट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ICICI बैंक, केनरा बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक, यस बैंक, HDFC बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, इंडसइंड बैंक, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े-बड़े बैंकों के शेयरों में भी 1 से 2 परसेंट की गिरावट देखने को मिली।
कुल मिलाकर, बैंकिंग सेक्टर में कोई भी शेयर लाल निशान से बच नहीं पाया।
इस बड़ी गिरावट के बाद भी, एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
अब बात करते हैं सबसे अहम सवाल की कि क्या इस गिरावट के बाद मार्केट का 'गेम ओवर' हो गया? नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। जानकार अभी भी बैंक निफ्टी के बड़े टेक्निकल स्ट्रक्चर को पॉजिटिव ही मान रहे हैं।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि इंडेक्स अभी भी अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है। उनके मुताबिक, 58,600-58,700 का ज़ोन अभी भी बैंक निफ्टी के लिए एक अहम रेजिस्टेंस एरिया है।
अगर इंडेक्स लगातार इस रेंज को मजबूती से पार कर लेता है, तो इसके लिए 59,000 के लेवल तक जाने का रास्ता खुल सकता है। यानी, अभी उम्मीद बाकी है!
वहीं, दूसरी ओर कुछ एनालिस्ट 57,800-57,500 के दायरे को निकट भविष्य के लिए एक अहम सपोर्ट ज़ोन मान रहे हैं। बजाज ब्रोकिंग ने भी 57,000-56,800 के दायरे को एक 'डिमांड एरिया' बताया है।
उनका कहना है कि पिछले तीन हफ्तों में इस रेंज में खरीदार सक्रिय रहे हैं। इसका मतलब है कि इस लेवल पर आते ही खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है, जो इंडेक्स को नीचे गिरने से रोक सकती है।
तो कुल मिलाकर, मार्केट में गिरावट भले ही बड़ी दिखी हो, लेकिन एक्सपर्ट्स अभी भी बैंक निफ्टी के लिए 'पॉजिटिव आउटलुक' बनाए हुए हैं। यह गिरावट एक मौका भी हो सकती है, लेकिन सावधानी बरतना ज़रूरी है।



































