भारत: खगोल प्रेमियों के लिए अगस्त का महीना बेहद खास होने वाला है। इस माह में महज 15 दिनों के छोटे से अंतर पर दो-दो बड़े खगोलीय इवेंट्स देखने को मिलेंगे — एक सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्र ग्रहण। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ये अद्भुत नजारे भारत में भी दिखाई देंगे, और अगर नहीं, तो क्या इनका कोई धार्मिक या ज्योतिषीय असर हमारे देश पर पड़ेगा?
आपको बता दें कि ये दोनों ही ग्रहण सावन के पवित्र महीने में पड़ रहे हैं, जिससे इनका महत्व धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से और भी बढ़ जाता है। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण जहां हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, वहीं चंद्र ग्रहण सावन पूर्णिमा पर रक्षा बंधन के पवित्र त्योहार के दिन पड़ेगा।
आखिर ग्रहण होता क्या है और कब लगता है?
अगर आसान भाषा में समझाएं तो ग्रहण एक खगोलीय घटना है। ये तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और हमारी पृथ्वी लगभग एक सीधी रेखा में आ जाते हैं।
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से होकर गुजरता है, जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने से रुक जाता है। वहीं, चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती और वो अंधकारमय या लालिमा लिए हुए दिखता है।
हमारे देश में, ग्रहण को केवल एक वैज्ञानिक घटना के रूप में ही नहीं देखा जाता, बल्कि इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी बहुत गहरा माना जाता है। पुराने समय से ही ग्रहण काल में कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता रहा है।
अगस्त 2026 में कौन-कौन से ग्रहण हैं और उनकी तारीखें क्या हैं?
साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने वाला है। यह ग्रहण सावन अमावस्या के शुभ अवसर पर पड़ेगा।
खगोलविदों के अनुसार, यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जो आसमान में एक शानदार नजारा पेश करेगा।
ठीक 15 दिन बाद, यानी 28 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा। यह ग्रहण श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ेगा, जो कि पूरे भारत में रक्षाबंधन के त्योहार के रूप में मनाई जाएगी।
कल्पना कीजिए, बहनें अपने भाइयों की कलाई पर प्यार की राखी बांध रही होंगी और आसमान में चंद्रमा ग्रहण से गुजर रहा होगा।
क्या भारत में दिखेंगे ये ग्रहण? सूतक काल लगेगा या नहीं?
अब आते हैं सबसे अहम जानकारी पर, जिसके लिए हर कोई उत्सुक रहता है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि 12 अगस्त को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
जब कोई ग्रहण किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल भी उस क्षेत्र में मान्य नहीं होता है। इसका मतलब है कि भारत में इस सूर्य ग्रहण का कोई धार्मिक या ज्योतिषीय सूतक काल नहीं माना जाएगा।
इसी तरह, 28 अगस्त को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भी भारत में नजर नहीं आएगा। इसलिए, इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी हमारे देश में लागू नहीं होगा।
यह एक बड़ी राहत की बात है, खासकर रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहार के दिन।
कुल मिलाकर, भारत में इन दोनों ही ग्रहणों का कोई सीधा और तत्काल प्रभाव धार्मिक गतिविधियों या आम जनजीवन पर नहीं पड़ेगा। हरियाली अमावस्या और रक्षाबंधन जैसे पर्व अपनी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जा सकेंगे, बिना किसी रोक-टोक या सूतक काल की चिंता के।
हालांकि, ज्योतिष के जानकार ग्रहणों के सूक्ष्म प्रभावों का अध्ययन सभी 12 राशियों पर करने की बात कहते हैं।
ग्रहण के दौरान अशुभ प्रभावों से बचने के लिए क्या उपाय करें?
भले ही ये ग्रहण भारत में दिखाई न दें और इनका सूतक काल भी मान्य न हो, फिर भी अगर आप अपनी तरफ से किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहते हैं या सामान्य तौर पर ग्रहण काल के लिए बताए गए उपायों का पालन करना चाहते हैं, तो कुछ चीजें हैं जो आप कर सकते हैं। ये उपाय सार्वभौमिक माने जाते हैं और किसी भी ग्रहण के दौरान शुभ परिणाम देते हैं:
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप: ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
- स्नान और पूजा-पाठ: ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र स्नान करना चाहिए। इसके बाद अपने घर के मंदिर या आस-पास के मंदिर में जाकर पूजा-पाठ और आरती करें।
- दान-पुण्य: अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करना बहुत फलदायी माना जाता है।
- शिवलिंग पर जलाभिषेक: ग्रहण काल के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करना भी बेहद शुभ माना जाता है, जिससे ग्रह दोषों का शमन होता है।
ये सभी उपाय मन की शांति और सकारात्मकता बनाए रखने में मदद करते हैं, भले ही ग्रहण आपके क्षेत्र में दिखे या न दिखे।




































