मुंबई: शेयर बाजार की दुनिया में पलक झपकते ही सब कुछ बदल जाता है, और आज दोपहर को यही हुआ। एक तरफ जहाँ सुबह से ही बाजार में थोड़ी सुस्ती थी, वहीं दोपहर होते-होते अचानक ऐसा भूचाल आया कि बड़े-बड़े धुरंधर भी हिल गए। खबर आई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से, जिन्होंने ईरान के साथ चल रहे सीजफायर को खत्म करने का ऐलान कर दिया। और बस, इस एक ऐलान ने भारतीय शेयर बाजार में सुनामी ला दी, मानो कोई गहरा जख्म खुल गया हो।
आप समझ सकते हैं कि जब कोई बड़ी खबर ग्लोबल लेवल पर आती है, तो उसका असर दुनिया के हर कोने पर पड़ता है। और शेयर बाजार तो इसकी सबसे पहली और सीधी शिकार होती है।
ट्रंप के इस बयान ने निवेशकों के बीच अचानक से डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया। इसका नतीजा? बाजार के प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, धड़ाम से नीचे आ गिरे।
आप खुद देखिए, दोपहर 2 बजे तक तो निफ्टी 1.84 फीसदी यानी करीब 434 अंक टूटकर 23,971 पर आ चुका था। वहीं, देश का सबसे बड़ा और पुराना सूचकांक, सेंसेक्स, 1.84 फीसदी यानी 1500 अंकों से ज्यादा गिरकर 76,740 के स्तर पर पहुँच गया।
यह आंकड़ा दिखाता है कि बाजार में कितनी तेज और गहरी गिरावट दर्ज की गई। सिर्फ यही नहीं, बैंकिंग सेक्टर में भी हाहाकार मचा।
बैंक निफ्टी तो 1.96 फीसदी तक क्रैश कर गया, जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी।
आखिर क्यों हुआ बाजार में यह अचानक भूचाल?
अब सवाल ये उठता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के एक बयान का भारतीय बाजार पर इतना बड़ा असर क्यों पड़ा? दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने यह ऐलान किया कि ईरान के साथ जो सीजफायर चल रहा था, वो अब खत्म हो चुका है। भू-राजनीति में ईरान एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है और जब भी इस क्षेत्र में कोई तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है।
जब दो देशों के बीच सीजफायर यानी युद्धविराम खत्म होता है, तो जंग या तनाव बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में निवेशक घबरा जाते हैं।
उन्हें लगता है कि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, और इससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा। इसी डर से वे अपने शेयर बेचने लगते हैं, जिसकी वजह से बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिलती है।
कुल मिलाकर, अनिश्चितता का माहौल ही इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह रही।
कच्चे तेल पर क्या असर पड़ा, और ये कितना अहम है?
ट्रंप के इस ऐलान का सिर्फ शेयर बाजार पर ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों पर भी सीधा और गहरा असर पड़ा। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से हमेशा कच्चे तेल की सप्लाई पर चिंताएँ बढ़ने लगती हैं।
ईरान दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है। जैसे ही सीजफायर खत्म होने की खबर आई, ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम अचानक से उछल गया।
खबर आने के बाद, ब्रेंट क्रूड का दाम 78 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। अब आप सोच रहे होंगे कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से क्या फर्क पड़ता है? दरअसल, कच्चा तेल वैश्विक अर्थव्यवस्था का आधार है।
इसकी कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और लगभग हर सेक्टर की लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है, जो आगे चलकर कंपनियों के मुनाफे और आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है।
यही वजह है कि निवेशक कच्चा तेल महंगा होने की खबर से और ज्यादा घबरा जाते हैं।
भारतीय बाजार की सुबह कैसी थी, और ये गिरावट कितनी अचानक थी?
आपको बता दें कि आज सुबह भारतीय शेयर बाजारों की शुरुआत थोड़ी कमजोर ही रही थी। दिनभर दोपहर तक बाजार पर दबाव बना हुआ था।
बैंकिंग शेयरों में भी सुबह से ही कुछ गिरावट देखी जा रही थी, जिसकी वजह से बैंक निफ्टी भी नीचे ही चल रहा था। एक तरह से कहा जाए तो बाजार पहले से ही एक नाजुक मोड़ पर था।
लेकिन, दोपहर होते-होते ट्रंप के ऐलान ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया। जो बाजार पहले से ही दबाव में था, उसमें अचानक से भगदड़ मच गई।
सेंसेक्स ने तो एक समय पर 1600 अंकों तक की गिरावट दर्ज की थी, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। यह दिखाता है कि एक वैश्विक घटना कैसे कुछ ही मिनटों में घरेलू बाजारों की दिशा और दशा बदल सकती है।
निवेशकों के लिए यह एक तनावपूर्ण और अस्थिर दिन साबित हुआ, जहाँ उनके पोर्टफोलियो में अचानक से बड़ी गिरावट देखने को मिली। अब सभी की निगाहें आगे के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं कि यह भू-राजनीतिक तनाव कहाँ तक जाता है और इसका बाजार पर आने वाले दिनों में क्या असर होगा।






































