मुंबई: मंगलवार यानी 8 जुलाई का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। सुबह से ही बाजार में हलचल थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, माहौल और बिगड़ता गया। देखते ही देखते, सेंसेक्स और निफ्टी ऐसे धड़ाम हुए कि पिछले तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज कर ली गई।
बाजार के प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स में 2.15 फीसदी यानी पूरे 1677 अंकों की जोरदार गिरावट देखने को मिली और यह 76,503 के स्तर पर आकर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी का भी हाल कुछ ऐसा ही रहा, यह 2.12 फीसदी यानी 516 अंक फिसलकर 23,882 पर क्लोज हुआ।
मतलब, निवेशकों का दिन टेंशन भरा रहा और सबकी जुबान पर एक ही सवाल था – आखिर ये हुआ क्या?
बाजार में ये भूचाल आखिर आया क्यों?
इस अचानक आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो ऐलान बताया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ 'सीजफायर' खत्म हो गया है। इस खबर ने दुनिया भर के बाजारों में खलबली मचा दी और इसका असर भारतीय शेयर मार्केट पर भी सीधे-सीधे पड़ा।
जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से इन्वेस्टर्स में डर का माहौल बन गया, जिसका नतीजा साफ दिख रहा था.
रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी अजीत मिश्रा ने बाजार की इस चाल पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि निफ्टी ने अपने 24000-24150 के मजबूत सपोर्ट जोन को तोड़ दिया है।
इतना ही नहीं, यह अपने प्रमुख मूविंग एवरेजेज से भी नीचे आ गया है, जो शॉर्ट टर्म में इसके टेक्निकल स्ट्रक्चर को काफी कमजोर दिखाता है।
मिश्रा के मुताबिक, "अगला सपोर्ट 23,650-23,800 के जोन में है। अब अगर बाजार में थोड़ी तेजी देखने को मिलती है, तो निफ्टी को 24,150-24,300 जोन में तगड़े रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा।
" मतलब, ऊपर जाने का रास्ता भी आसान नहीं है।
इंडिया वीआईएक्स में उछाल, क्या है इसका मतलब?
अजीत मिश्रा ने एक और अहम बात बताई। उन्होंने कहा कि इंडिया वीआईएक्स (India VIX) में 26 फीसदी का जबरदस्त उछाल आया है।
ये वीआईएक्स क्या है? तो बता दें, ये बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का एक इंडेक्स है। इसमें इतनी बड़ी बढ़त साफ-साफ इशारा करती है कि आने वाले दिनों में मार्केट में और ज्यादा वोलाटिलिटी यानी अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
निवेशकों को कमर कस लेनी चाहिए।
उधर, एसबीआई सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने भी निफ्टी के लेवल्स पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि निफ्टी के लिए अगला सपोर्ट 23,780-23,750 के जोन में होगा।
अगर इस लेवल से भी बाजार नीचे गिरता है, तो निफ्टी 23,600 के लेवल तक पहुंच सकता है।
शाह के अनुसार, अगर तेजी आती भी है, तो 24,020-24,050 पर निफ्टी को रेसिस्टेंस का सामना करना होगा। कुल मिलाकर, एक्सपर्ट्स ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अभी बाजार में हर कदम फूंक-फूंक कर रखने जैसा माहौल है।
क्या 23,800 का सपोर्ट लेवल टूट जाएगा?
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ने एक बेहद अहम बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह देखना बहुत जरूरी होगा कि निफ्टी 23,800 के सपोर्ट लेवल को तोड़ता है या नहीं।
अगर यह इस लेवल को निर्णायक रूप से तोड़ देता है, तो करेक्शन का यह दौर और लंबा खिंच सकता है, यानी बाजार और नीचे जा सकता है।
लेकिन, अगर निफ्टी इस लेवल से ऊपर बना रहता है, तो शॉर्ट टर्म में एक अच्छी रिकवरी भी दिख सकती है। यही वजह है कि 9 जुलाई को ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स की नजरें खास तौर पर निफ्टी के इन्हीं लेवल्स पर टिकी होंगी।
सबकी धड़कनें तेज हैं कि अगला मूव क्या होगा।
इन सब के बीच, एक हल्की राहत भरी खबर भी है। सिंगापुर एक्सचेंज में ट्रेड होने वाले गिफ्टी निफ्टी (GIFT Nifty) में रिकवरी दिखी है।
इसका मतलब है कि 9 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत पॉजिटिव रह सकती है, यानी थोड़ी बढ़त के साथ। ये एक छोटा सा प्लस पॉइंट है जो थोड़ी उम्मीद जगाता है।
बुधवार यानी 8 जुलाई को बाजार के लगभग सभी सूचकांकों पर तगड़ा दबाव देखने को मिला। सबसे ज्यादा मार एफएमसीजी (FMCG), फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों पर पड़ी।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
यह साफ-साफ इशारा करता है कि बाजार का सेंटिमेंट अचानक काफी कमजोर हो गया है। एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि अभी मार्केट में बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद अहम होने वाले हैं, जब सबको मिलकर इस 'टेंशन वाले माहौल' से निकलना होगा। देखते हैं, 9 जुलाई बाजार के लिए क्या लेकर आती है!







































