औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद शहर में सोमवार का दिन, एक ऐसे नाम को याद करने के लिए सजा था; जिसकी कहानी सिर्फ दानवीरता की नहीं, बल्कि अथाह राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की मिसाल है। जसोईया स्थित महाराणा प्रताप एवं भामाशाह प्रतिमा स्थल पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहां दानवीर भामाशाह की जयंती पूरे जोश और सम्मान के साथ मनाई गई। इस मौके पर ओबरा विधायक डॉ. प्रकाश चंद्र समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। उन्होंने भामाशाह को केवल एक दानी नहीं, बल्कि देश के प्रति सर्वस्व न्योछावर कर देने वाला एक महान राष्ट्रभक्त बताया। उनके त्याग और समर्पण की कहानी आज भी हर भारतीय को प्रेरित करती है, और इस कार्यक्रम में उसी प्रेरणा को फिर से जीवंत किया गया।
विधायक डॉ. प्रकाश चंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि भामाशाह का जीवन हमें सिखाता है कि मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जाया जा सकता है।
उन्होंने महाराणा प्रताप के संघर्ष के दिनों में अपनी पूरी संपत्ति समर्पित कर दी थी, एक ऐसा कदम जिसने मेवाड़ के इतिहास को नई दिशा दी। यह सिर्फ धन का दान नहीं था, यह राष्ट्रप्रेम का सबसे बड़ा उदाहरण था, जिसने इतिहास में उन्हें अमर कर दिया।
बात तब की है जब हल्दीघाटी के भीषण युद्ध के बाद महाराणा प्रताप आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। उनकी सेना बिखरी हुई थी और मुगलों के खिलाफ संघर्ष जारी रखना बेहद मुश्किल लग रहा था।
ऐसे विकट समय में, जब सब उम्मीदें टूटने लगी थीं, भामाशाह एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आए। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति, जो उस समय के हिसाब से करोड़ों में थी, महाराणा प्रताप के चरणों में समर्पित कर दी।
इस अतुलनीय सहयोग से ही महाराणा प्रताप अपनी सेना का पुनर्गठन कर पाए और मुगलों के विरुद्ध अपने संघर्ष को फिर से मजबूत कर पाए। विधायक ने साफ कहा कि ऐसे महापुरुषों का योगदान इतिहास के पन्नों में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा मिलती रहेगी।
विधायक की घोषणाएं और आर्थिक सहायता
इस खास मौके पर ओबरा विधायक डॉ. प्रकाश चंद्र ने सिर्फ भाषण नहीं दिए, बल्कि अपना योगदान भी दिया।
उन्होंने महाराणा प्रताप सेवा संस्थान को अपनी विधायक निधि से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर 1 लाख 1 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह एक ऐसा कदम था, जिसने उनके शब्दों को और भी वजन दिया।
इसके साथ ही, उन्होंने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थल पर एक तलवार स्थापित की जाएगी, और उस तलवार के निर्माण का पूरा खर्च वे स्वयं वहन करेंगे।
यह घोषणा कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों के लिए एक बड़े उत्साह का विषय बनी।
नगर परिषद के अध्यक्ष उदय गुप्ता ने भी भामाशाह के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भामाशाह का जीवन त्याग, राष्ट्रभक्ति और समाजसेवा का एक बेजोड़ उदाहरण है।
उनका मानना था कि राष्ट्र सर्वोपरि है और जब देश सुरक्षित रहेगा, तभी समाज और हमारा व्यक्तिगत जीवन भी सुरक्षित रह पाएगा। उन्होंने उपस्थित लोगों को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराया।
आयोजन में गणमान्य लोगों की उपस्थिति
यह कार्यक्रम सिर्फ एक जयंती समारोह नहीं था, बल्कि राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन गया था। इसमें औरंगाबाद शहर के कई महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक चेहरे मौजूद थे।
देव नगर पंचायत के उपाध्यक्ष गोलू गुप्ता, राहुल राज, भाजपा नेता रामरूप सिंह, जितेंद्र गुप्ता, सूरज कुमार, धर्मेंद्र गुप्ता जैसे कई लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम में शामिल गणमान्य व्यक्तियों में ओबरा विधायक डॉ. प्रकाश चंद्र, नगर परिषद अध्यक्ष उदय गुप्ता, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष मुकेश लाल गुप्ता, महाराणा प्रताप सेवा संस्थान के अध्यक्ष बैजनाथ सिंह, कन्हैया लाल जैन, भाजपा नेता रविंद्र सिंह, सूर्यपत सिंह, हरिहर प्रसाद सिंह, महावीर जैन, अजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
सभी ने मिलकर भामाशाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। दीप प्रज्ज्वलित कर इस पूरे कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिसने एक गरिमामय और प्रेरणादायी माहौल बना दिया।
यह आयोजन भामाशाह के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सफल प्रयास था, यह याद दिलाता रहा कि राष्ट्र के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता।

