पटना: बिहार की सियासी गलियों में इन दिनों एक बंगले की खूब चर्चा है। बात हो रही है 5 देशरत्न मार्ग की, जो अब स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का नया पता बन गया है। यूं तो ये सिर्फ एक सरकारी आवास है, लेकिन इसका सियासी इतिहास इतना दिलचस्प और विवादों से भरा रहा है कि इसकी हर दीवार कुछ कहानी सुनाती मालूम होती है। सोमवार पूर्णिमा के शुभ मौके पर निशांत कुमार पूरे परिवार के साथ इस आवास में गृह-प्रवेश पूजा-अर्चना के साथ किए। इस खास मौके पर एक और बड़ा नाम मौजूद था – बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।
नीतीश कुमार करीब 10 मिनट तक इस कार्यक्रम में रहे, पूजा में शामिल हुए और फिर अपने सरकारी आवास 7 सर्कुलर रोड के लिए रवाना हो गए। आमतौर पर गृह-प्रवेश का मतलब होता है नया घर, नई शुरुआत।
लेकिन निशांत कुमार के लिए ये बंगला सिर्फ उनका दफ्तर होगा। जी हां, उन्होंने साफ कर दिया है कि वे यहां रहेंगे नहीं, बल्कि सिर्फ स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कामकाज यहीं से निपटाएंगे।
लेकिन इस बंगले का किस्सा सिर्फ इतना ही नहीं है। इसके पन्नों में कई सियासी मोड़ और दिलचस्प घटनाएं दर्ज हैं, जो इसे एक सामान्य बंगले से कहीं ज्यादा खास बनाती हैं।
बंगले की विवादित कहानी: मुख्यमंत्री आवास से जुड़ाव और अलगाव
5 देशरत्न मार्ग का बंगला हमेशा से इतना सीधा-साधा नहीं रहा। इसकी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब बिहार सरकार ने इसे सीधे मुख्यमंत्री आवास '1 अणे मार्ग' से जोड़ने का फैसला किया।
30 अप्रैल, 2026 (हालांकि, यह तारीख शायद भविष्य की गलती से लिखी गई है, इसे पुरानी घटना के तौर पर देखें) को एक आदेश जारी हुआ। संयुक्त सचिव-सह-भू-संपदा पदाधिकारी शिव रंजन ने बाकायदा आदेश निकालकर कहा कि 5 देशरत्न मार्ग का पुराना आवंटन रद्द किया जाता है और अब ये कोई स्वतंत्र बंगला नहीं रहेगा, बल्कि इसे 1 अणे मार्ग के 'विस्तारित हिस्से' के रूप में जाना जाएगा।
यानी, ये सीएम आवास का ही एक बड़ा हिस्सा बन गया।
इस फैसले ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया। विपक्ष ने तुरंत इस पर सवाल उठाए।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से तंज कसा गया कि सरकार राबड़ी देवी को उनका बंगला (10 सर्कुलर रोड) खाली करने के लिए कह रही है, और उधर मुख्यमंत्री अपने आवास में एक और बंगला जोड़ रहे हैं। ये मामला इतना तूल पकड़ गया कि खुद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसमें दखल देना पड़ा।
उन्होंने भवन निर्माण मंत्री लेसी सिंह को तलब किया और पूरे मामले की जानकारी मांगी।
इस खींचतान और सियासी दबाव का नतीजा ये हुआ कि 5 जून को एक नया आदेश जारी हुआ। भवन निर्माण विभाग ने सफाई दी कि 5 देशरत्न मार्ग को अस्थायी तौर पर सीएम आवास के मरम्मत कार्य होने तक विस्तारित अंश के रूप में चिन्हित किया गया था।
अब चूंकि मरम्मत का काम पूरा हो गया है, तो 30 अप्रैल का वो आदेश वापस ले लिया गया। यानी, बंगले को सीएम आवास से अलग करके फिर से एक स्वतंत्र इकाई बना दिया गया।
इस पूरे ड्रामे के दौरान, एक सवाल ये भी उठा कि क्या ये बंगला पहले डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास था और उसे सीएम आवास से जोड़ने के लिए उनसे वापस लिया गया था? हालांकि, मूल खबर में सम्राट चौधरी से जुड़ी कोई और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि वो क्यों इसे अपने पास नहीं रख पाए, बस इस फैसले को उनसे जोड़कर देखा गया था।
डिप्टी सीएम्स ने क्यों ठुकराया ये 'खास' बंगला?
जब 5 देशरत्न मार्ग को मुख्यमंत्री आवास से अलग कर दिया गया, तो एक बार फिर इसे डिप्टी सीएम्स को आवंटित करने की बात चली। खबरें थीं कि दोनों डिप्टी सीएम – विजय चौधरी और विजेंद्र यादव – में से जो भी रहना चाहें, वे इसमें रह सकते हैं।
लेकिन कहानी में एक और मोड़ आया। दोनों ही दिग्गज नेताओं ने इस बंगले में जाने से साफ इनकार कर दिया।
इसके पीछे की वजह भी खास है। विजेंद्र यादव पिछले करीब 20 सालों से 1 देशरत्न मार्ग आवास में रह रहे हैं, जबकि विजय चौधरी भी अपने मौजूदा आवास में सालों से जमे हुए हैं।
सालों से बसे-बसाए घर को छोड़कर नए और विवादित इतिहास वाले बंगले में जाने से उन्होंने परहेज किया। लगता है, इस बंगले के साथ जुड़े सियासी किस्सों और इसकी अस्थिर प्रकृति ने नेताओं को थोड़ा सोच में डाल दिया।
निशांत कुमार के लिए अब सिर्फ दफ्तर का पता
अब जबकि इस बंगले का सियासी सफर एक नए पड़ाव पर पहुंचा है, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने इसे अपने दफ्तर के तौर पर इस्तेमाल करने का फैसला किया है। ये बंगला दो मंजिला है और इसमें पांच बेडरूम हैं।
इसके अलावा, एक बड़ा हॉल, बालकनी और एक हरा-भरा लॉन भी है। ये सभी सुविधाएं इसे एक आरामदायक आवास या प्रभावी दफ्तर बनाती हैं।
निशांत कुमार के इस फैसले से, ये बंगला अब जनता की सेवा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों का गवाह बनेगा, और उम्मीद है कि इसकी 'विवादित' छवि अब 'कार्यस्थल' में बदल जाएगी।

