पेपर लीक के विरोध में छात्रों की भूख हड़ताल; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
सारांश
भोजपुर के आरा समेत देशभर में छात्र NTA को भंग करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

भोजपुर के आरा समेत देशभर में छात्र NTA को भंग करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

भोजपुर: कल्पना कीजिए कि आप सालों तक दिन-रात एक करके किसी एग्जाम की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा का दिन आता है तो पता चलता है कि पेपर पहले ही लीक हो चुका है। यह सिर्फ एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि आज देश के लाखों युवाओं का दर्द है। इसी गुस्से और हताशा ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुई यह आग अब बिहार के आरा तक पहुँच चुकी है, जहाँ छात्र अब सिर्फ सुधार नहीं, बल्कि जवाबदेही मांग रहे हैं।
भोजपुर के आरा में छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह थी कि छात्रों ने सामूहिक उपवास और भूख हड़ताल का रास्ता चुना।
उनकी मांग सीधी और स्पष्ट है—राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग किया जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें। छात्रों का कहना है कि जब तक सिस्टम में आमूलचूल बदलाव नहीं होगा, तब तक केवल परीक्षा दोबारा कराने से समस्या हल नहीं होगी।
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक शिव प्रकाश रंजन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं में जो पेपर लीक हुए और जो अनियमितताएं सामने आईं, उन्होंने लाखों युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि इस अव्यवस्था के कारण 20 से ज्यादा छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया। शिव प्रकाश रंजन का तर्क है कि इन मौतों की नैतिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर शिक्षा मंत्रालय और सरकार की है।
प्रदर्शनकारियों का मानना है कि परीक्षा दोबारा आयोजित कर देना महज एक 'कॉस्मेटिक' इलाज है। असली समस्या तो उस सिस्टम की है जो बार-बार फेल हो रहा है।
छात्रों के मन में आज भी यह संशय है कि क्या अगली बार परीक्षा पारदर्शी होगी? क्या उनका पेपर सुरक्षित रहेगा? इसी असुरक्षा के भाव ने युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।
आंदोलन में शामिल छात्र नेत्री वर्षा कुमारी ने इस मुद्दे को और व्यापक बनाते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक परीक्षा या नीट तक सीमित नहीं है। यह पूरी शिक्षा व्यवस्था की उस कुव्यवस्था के खिलाफ है जहाँ जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं बची है।
उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्रों की भारी दूरी और बार-बार बदलती गाइडलाइन्स ने छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। कई छात्र आज गंभीर अवसाद (Depression) से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार इस दर्द को नजरअंदाज कर रही है।
बिहार में आईसा (AISA) और इंकलाबी नौजवान सभा जैसे संगठन इस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित नहीं बनाया जाता।
उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
फिलहाल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन जारी है और देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा इसका समर्थन कर रहे हैं। छात्रों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक उनके हितों की रक्षा की गारंटी नहीं मिलती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
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