भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे गांव को सन्न कर दिया है। लक्ष्मीपुर गांव में एक 33 साल की महिला, विमलावती देवी, अपनी बकरियां चराने बधार (खेतों के पास का खुला मैदान) गई थीं। कौन जानता था कि एक मामूली-सी दिनचर्या, मौत का बुलावा बन जाएगी। दोपहर का वक्त था, सूरज सिर पर था और बकरियां घास चर रही थीं। तभी एक बकरी, झुंड से अलग होकर दूर भागने लगी। विमलावती ने बिना कुछ सोचे-समझे उसे पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी। उन्हें नहीं पता था कि कुछ ही कदम दूर, मौत बिजली के तार बनकर उनका इंतज़ार कर रही है।
बकरी को पकड़ने की धुन में दौड़ती विमलावती का हाथ अचानक एक ट्रांसफार्मर के पास खुले पड़े विद्युत तार से छू गया। पलक झपकते ही उन्हें एक ज़ोरदार झटका लगा और वे ज़मीन पर गिर पड़ीं।
आसपास दूर-दूर तक कोई नहीं था जो उनकी चीख़ सुन पाता या मदद के लिए दौड़ पाता। करंट का झटका इतना ज़बरदस्त था कि विमलावती देवी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
जब तक कुछ लोग वहां पहुंचते, विमलावती सिर्फ़ एक बेजान शरीर रह गई थीं। यह घटना आयर थाना क्षेत्र की है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
एक साधारण दिन और मौत का खेल
लक्ष्मीपुर गांव के लोगों के लिए बधार में पशु चराना रोज़मर्रा का काम है। विमलावती देवी भी हर दिन की तरह अपने घर से निकली थीं, अपने तीन बेटों — रोहित शर्मा, रौशन शर्मा और किशन शर्मा — के लिए खाना बनाने के बाद।
पति रंजीत शर्मा ने शायद उस सुबह कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी पत्नी का यह आखिरी सफर है। गांव की गलियों से होते हुए, खेतों के बीच से गुजरते हुए, वह अपनी ज़िंदगी की साधारण लय में जी रही थीं।
ग्रामीण बताते हैं कि विमलावती एक मेहनती और सरल स्वभाव की महिला थीं, जो अपने परिवार का पूरा ध्यान रखती थीं। उनके लिए बकरियां भी परिवार का हिस्सा थीं, और शायद इसीलिए जब एक बकरी भागने लगी तो उनका मां जैसा स्नेह जाग उठा और वे उसे पकड़ने दौड़ पड़ीं।
जिस ट्रांसफार्मर के पास यह हादसा हुआ, उस पर पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं। ग्रामीणों का कहना है कि इसके तार कई जगह खुले पड़े थे और रख-रखाव की कमी साफ दिखती थी।
लेकिन विभाग ने हमेशा इस ओर ध्यान नहीं दिया, जिसका खामियाजा आज एक परिवार को भुगतना पड़ा है। बधार में चारे की तलाश में जाने वाले बच्चों और पशुओं के लिए ऐसे खुले तार हमेशा एक बड़ा खतरा बने रहते हैं।
यह सिर्फ़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि बिजली विभाग की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है, जिसकी कीमत एक निर्दोष महिला ने अपनी जान देकर चुकाई है।
घर में पसरा मातम: तीन बच्चों के सिर से उठा मां का साया
जब गांव में विमलावती देवी की मौत की खबर पहुंची, तो पूरे लक्ष्मीपुर गांव में सन्नाटा छा गया। पति रंजीत शर्मा और उनके तीनों बेटे इस खबर से टूट गए।
घर में कोहराम मच गया। जिस मां ने सुबह अपने हाथों से बच्चों को खिलाया था, उसी मां का शव शाम तक बेजान होकर घर लौट रहा था।
सबसे छोटा बेटा किशन, शायद अभी इतना नासमझ है कि उसे पता ही नहीं कि मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी। रोहित और रौशन, जो बड़े हैं, अपनी मां को खोने के गम में लगातार रोए जा रहे थे।
पूरे गांव की आंखें नम थीं। पड़ोसी और रिश्तेदार उन्हें सांत्वना देने पहुंचे, लेकिन इस दुख की घड़ी में कोई शब्द काफ़ी नहीं लग रहा था।
परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। रंजीत शर्मा के लिए तो जैसे दुनिया ही उजड़ गई थी।
पत्नी का अचानक यूं चले जाना, और वो भी इतनी दर्दनाक तरीके से, उनकी कल्पना से भी परे था। गांव वालों ने बताया कि विमलावती अपने बच्चों के लिए जीती थीं।
अब उनके तीनों बेटों का क्या होगा? यह सवाल हर किसी के मन में था। घर की खुशियां एक पल में मातम में बदल गईं।
बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बिजली के खुले तारों और जर्जर ट्रांसफार्मर की समस्या को उजागर किया है, जो आए दिन ऐसे हादसों की वजह बन रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का आश्वासन
हादसे की जानकारी मिलते ही आयर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
ग्रामीणों और परिजनों से घटना के बारे में विस्तृत जानकारी ली गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए आरा स्थित सदर अस्पताल भेजा गया।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पोस्टमार्टम के उपरांत विमलावती देवी का शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
यह देखना होगा कि इस मामले में बिजली विभाग की लापरवाही पर क्या कार्रवाई होती है और ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
परिवार के सदस्यों ने प्रशासन से न्याय और मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि यह लापरवाही का नतीजा है और बिजली विभाग को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।
गांव के कई लोगों ने भी खुले तारों और जर्जर ट्रांसफार्मर की मरम्मत की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह के दर्दनाक हादसे का शिकार न हो। यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि बिहार के कई ग्रामीण इलाकों की कहानी बयां करती है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं के अभाव और सरकारी तंत्र की ढिलाई अक्सर ऐसी त्रासदियों को जन्म देती है।
विमलावती देवी की मौत, एक चेतावनी है उन सभी ज़िम्मेदारों के लिए, जो जनता की सुरक्षा को अनदेखा करते हैं।




































