भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले का बिलौटी गांव आजकल अजब माहौल से गुजर रहा है। यहां मातम भी है और कहीं न कहीं एक तरह की लामबंदी भी। वजह है, पिछले दिनों पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की तेरहवीं। बिलौटी में 30 जून को भरत का श्राद्धकर्म होना है और इसे लेकर गांव में तैयारियां ऐसी चल रही हैं, जैसे कोई बड़ा कार्यक्रम हो। गांव के लोग एक साथ मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं, जिसमें उम्मीद है कि करीब 15 हजार लोग शामिल होंगे।
जरा सोचिए, किसी की तेरहवीं में 15 हजार लोगों के खाने-पीने का इंतजाम! ये अपने आप में बताता है कि भरत तिवारी की मौत सिर्फ एक परिवार का निजी दुख नहीं रही, बल्कि पूरे इलाके और अब तो कई राज्यों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गई है। गांव के आसपास खेतों में बड़े-बड़े टेंट लगाए गए हैं।
सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले लोगों के आराम करने के लिए भी पुख्ता बंदोबस्त हैं। खेतों में पलंग बिछाए गए हैं, ताकि लंबी यात्रा करके आए लोग थोड़ी देर सुस्ता सकें।
बैठने के लिए हजारों कुर्सियां मंगवाई गई हैं। भरत के घर के सामने एक विशाल शामियाना लगाया गया है, जहां श्रद्धांजलि सभा होगी और वहीं सब लोग साथ बैठकर खाना खाएंगे।
बिहार की गर्मी को देखते हुए कूलर और पंखे भी खूब लगाए गए हैं, ताकि आने वाले किसी मेहमान को दिक्कत न हो। वाराणसी से सैंड आर्टिस्ट रूपेश सिंह ने तो भरत तिवारी की एक तस्वीर भी बनाई है, जो शायद इस पूरे माहौल का हिस्सा होगी।
'तेरहवीं' के साथ दबंगई के खिलाफ उठती आवाज
इस पूरे आयोजन को सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान कहना शायद सही नहीं होगा। ये एक तरह से पुलिस कार्रवाई के खिलाफ उठती आवाज़ का मंच भी बनता दिख रहा है।
आयोजकों ने साफ़-साफ़ कह दिया है कि भरत की तेरहवीं से पहले उन पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हो, जिन्हें वे दोषी मानते हैं। उनकी चेतावनी साफ है कि अगर दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बिहार विधानसभा का घेराव करेंगे।
ये बात सीधे-सीधे बिहार सरकार और प्रशासन के लिए एक चुनौती है।
कार्यक्रम के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने किसी को न्योता नहीं दिया। पंकज त्रिपाठी ने कहा, "हमने गांव को छोड़कर किसी को निमंत्रण नहीं दिया।
भरत सिर्फ बिलौटी का नहीं, पूरे देश का हो गया है। हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
हमारी यही कोशिश है कि जो भी भरत के नाम पर गांव आ रहे हैं, उनका हम ज्यादा से ज्यादा सेवा कर सकें।" ये बयान बताता है कि इस मामले को लेकर जनभावना कितनी प्रबल हो चुकी है।
पंकज त्रिपाठी ने ये भी बताया कि एक महापंचायत के जरिए प्रशासन को 30 जून तक का समय दिया गया था। अब वो समय सीमा खत्म हो रही है।
उन्होंने कहा कि "कल सारे पदाधिकारी पहुंचे रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आगे की रणनीति के बारे में जानकारी देंगे।
सभी लोगों से आग्रह है कि अपने फोन में भरत की डीपी लगाएं। बाहर से लोग आ रहे हैं, सबके लिए व्यवस्था कर रहे हैं।
"
कई राज्यों से ब्राह्मण संगठन लामबंद
इस तेरहवीं में सिर्फ गांव-जिले के लोग ही नहीं, बल्कि बिहार के कई जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, ग्वालियर, दिल्ली, हरियाणा जैसे दूर-दराज के राज्यों से भी हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसमें खासकर ब्राह्मण समाज के संगठन खूब सक्रिय दिख रहे हैं।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 29 जून को कैंडल मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि 1 जुलाई को उनके सदस्य भोजपुर पहुंचकर महापंचायत में शामिल होंगे।
ये संगठन लगातार इस मामले में न्याय और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने इस बारे में बात करते हुए कहा, "बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग भोजपुर पहुंचेंगे। महापंचायत में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
" उन्होंने भरत भूषण तिवारी को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद किया, जो सामाजिक मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते थे। ये बयान भरत तिवारी की छवि को एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर पेश करता है, जिनकी मौत ने कई सवालों को जन्म दिया है।
इसी तरह, परशुराम सेना एवं अखिल भारतीय चाणक्य परिषद के अध्यक्ष कृपा निधान तिवारी ने भी सरकार से अपील की है। उन्होंने कहा कि "सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
" राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के अध्यक्ष अलंकार अग्निहोत्री ने भी सवर्ण समाज के हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही है। ये सारी बातें साफ इशारा करती हैं कि भरत तिवारी की मौत अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जिस पर कई संगठन लामबंद हो रहे हैं।
प्रशासन के लिए आने वाले दिन शायद काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं, खासकर 30 जून और 1 जुलाई के कार्यक्रमों को देखते हुए। गांव में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का इकट्ठा होना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।

