आरा: बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। यहां एक एनकाउंटर में मारे गए शख्स भरत तिवारी का आखिरी फेसबुक लाइव वीडियो, जिसमें वो पुलिस के सामने हथियार डाल रहे थे, वो उनके अकाउंट से अचानक गायब हो गया है। इस घटना ने सिर्फ ग्रामीणों और सोशल मीडिया यूजर्स को ही नहीं, बल्कि न्यायिक जांच आयोग को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या इस वीडियो का गायब होना महज एक इत्तेफाक है, या फिर इसके पीछे कोई गहरी मंशा छिपी है?
बात 17 जून, 2026 की है, जब भोजपुर के बिलौटी में भरत तिवारी का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था। लेकिन एनकाउंटर से ठीक पहले भरत तिवारी फेसबुक पर लाइव थे।
इस लाइव वीडियो में उन्होंने पुलिसकर्मियों से बातचीत की और आखिर में अपना पिस्टल सामने फेंककर सरेंडर कर दिया था। यह एक अहम डिजिटल सबूत था, जो घटना के अंतिम पलों को साफ-साफ दिखाता था।
आखिर क्या हुआ था उस दिन?
जिस दिन भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ, वो अपने फेसबुक अकाउंट से लाइव थे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को अपने फोन पर रिकॉर्ड किया था और लाइव स्ट्रीम कर रहे थे।
वीडियो में साफ दिख रहा था कि वो पुलिस के साथ बातचीत कर रहे थे और उनकी बात मानकर अपना हथियार फेंककर सरेंडर कर दिए रहे थे। यह वीडियो उस वक्त वायरल भी हुआ था और पूरे भारत वासियों ने इसे देखा भी था।
उस वीडियो में दिख रही चीजें भरत तिवारी की ओर से उठाए गए कदमों का सीधा प्रमाण थीं।
लेकिन अब चौंकाने वाली खबर ये है कि भरत तिवारी के फेसबुक अकाउंट से वो महत्वपूर्ण वीडियो हटा दिया गया है। ये वही वीडियो है जो उनकी मौत से ठीक पहले की घटनाओं को दिखाता है।
इस घटना के सामने आने के बाद से सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किसने और क्यों इस वीडियो को हटाया है।
मोबाइल क्यों नहीं लौटाया गया?
भरत तिवारी की माता आशा देवी ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें भरत का मोबाइल अभी तक नहीं लौटाया है।
अगर मोबाइल पुलिस के पास था और उसमें वो वीडियो था, तो फिर उसे सार्वजनिक प्लेटफार्म से किसने और कैसे हटाया? यह सवाल अपने आप में कई जवाबों को जन्म देता है।
“भरत तिवारी की माता आशा देवी ने पुलिस पर मोबाइल नहीं देने का आरोप भी लगाया है।”
इस वीडियो के अचानक गायब होने से सोशल मीडिया पर और ग्रामीणों के बीच अटकलों का बाजार गर्म है। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं और पुलिस प्रशासन की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
कई लोगों का मानना है कि यह वीडियो, अगर मौजूद रहता, तो एनकाउंटर के घटनाक्रम पर एक अलग रोशनी डाल सकता था।
सोशल मीडिया पर इतनी हलचल क्यों है?
यह मामला सिर्फ वीडियो गायब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद से भरत तिवारी के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर लोगों की रुचि अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस फेसबुक पेज पर पहले महज कुछ हजार फॉलोअर्स थे, उनकी संख्या आज बढ़कर 2 लाख 71 हजार के पार पहुंच गई है।
यह आंकड़ा बताता है कि आम जनता इस मामले को कितनी गहराई से देख रही है।
लोग उन कड़ियों को जोड़ना चाहते हैं जो भरत तिवारी की मौत के अंतिम क्षणों से जुड़ी हैं। इतने सारे लोग उनके प्रोफाइल पर इसलिए आ रहे हैं ताकि वे सच जान सकें।
यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि एक व्यापक जनभावना इससे जुड़ गई है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर सच क्या है और क्यों इस तरह के सबूतों को मिटाने की कोशिश की जा रही है।
क्या जांच को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है?
एक ओर जहां भरत तिवारी के एनकाउंटर की न्यायिक जांच चल रही है और आयोग द्वारा गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स एक पहेली बनते जा रहे हैं। भरत तिवारी के दोस्तों का सीधा आरोप है कि प्रशासन न्यायिक जांच आयोग के सामने उस वीडियो को पेश नहीं करना चाहता है।
“भरत तिवारी के मित्रों का कहना है कि पुलिस न्यायिक जांच आयोग के सामने उस वीडियो को नहीं ले जाना चाहती है। भरत तिवारी की मौत को एनकाउंटर साबित करने के लिए प्रशासन ने वीडियो को डिलीट करवा दिया है।
ये ठीक नहीं है।”
उनके मित्रों का कहना है कि प्रशासन भरत तिवारी की मौत को एनकाउंटर साबित करने की कोशिश में जुटा है और इसलिए वीडियो को डिलीट करवा दिया गया है। उनके मुताबिक, भरत तिवारी के लिए फेसबुक लाइव सिर्फ एक माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन के साथ बातचीत और अपनी समस्याओं को लोगों तक पहुंचाने का एक जरिया भी था।
यह वीडियो इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें साफ दिख रहा था कि भरत तिवारी पुलिस की बात मानकर हथियार डाल रहे थे। ऐसे में अगर वो वीडियो गायब हो जाता है, तो यह निश्चित रूप से जांच को प्रभावित कर सकता है।
भोजपुर पुलिस और जिला प्रशासन पर वीडियो गायब होने को लेकर सीधे-सीधे सवाल उठने लगे हैं। अब देखना ये होगा कि न्यायिक जांच आयोग इस डिजिटल सबूत के गायब होने को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या सच सामने आ पाता है।




































