दिल्ली: अगर आप सोना-चांदी खरीदने की प्लानिंग कर रहे थे, तो ये खबर आपके लिए है! पिछले कुछ दिनों से जो सोने-चांदी की कीमतें आसमान छू रही थीं, उनमें अचानक एक बड़ा ‘टूटान’ देखने को मिला है। खासकर चांदी, जिसके दाम तो एक ही दिन में धड़ाम से नीचे गिरे हैं। इतनी बड़ी गिरावट कि आप सुनकर शायद सोचें, "क्या अब सही मौका आ गया है खरीदारी का?"
दरअसल, हुआ यूं कि दिल्ली के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई। अगर बात चांदी की करें, तो इसने तो सीधे 8,900 रुपये की बड़ी छलांग लगाई.
..
नहीं-नहीं, ऊपर की तरफ नहीं, नीचे की तरफ! जी हां, एक ही दिन में चांदी का भाव 8,900 रुपये प्रति किलो कम हो गया। सोचिए, सोमवार को जो चांदी 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, वो मंगलवार को सीधा 2,26,100 रुपये पर आ गई।
ये अपने आप में एक चौंकाने वाला आंकड़ा है।
सिर्फ चांदी ही नहीं, अपना सोना भी इस लिस्ट में शामिल रहा। 24 कैरेट वाला सोना भी 700 रुपये सस्ता होकर 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
सोमवार को इसका भाव 1,47,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था। अब सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली?
सोना-चांदी के भाव क्यों फिसले, क्या है वजह?
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन की मानें तो, इस गिरावट के पीछे घरेलू बाजार में ज्वेलर्स और औद्योगिक खरीदारों की कमजोर मांग एक बड़ी वजह है। मतलब, लोग और उद्योग, दोनों ही अभी सोना-चांदी खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
जब बाजार में मांग कम होती है, तो चीजें सस्ती होना लाजमी है, है ना?
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार की तस्वीर थोड़ी अलग रही। वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड यानी हाजिर सोना मामूली बढ़त के साथ 4,020.13 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा।
वहीं, स्पॉट सिल्वर भी करीब 1 फीसदी चढ़कर 58.06 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। ये थोड़ा विरोधाभासी लग सकता है कि भारत में दाम गिरे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ा उछाल आया।
लेकिन अक्सर घरेलू मांग और वैश्विक संकेतों का असर अलग-अलग समय पर दिखता है।
आगे क्या होगा, दाम और गिरेंगे या फिर चढ़ेंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल, क्या ये गिरावट खरीदने का मौका है या दाम अभी और नीचे जाएंगे? इस पर एक्सपर्ट्स की राय थोड़ी मिली-जुली है, लेकिन कुछ अहम बातें सामने आई हैं। HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट, सौमिल गांधी बताते हैं कि सोमवार को सोने में जो बड़ी गिरावट आई थी, उसके बाद रिकवरी की कोशिश तो हुई, लेकिन तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई।
सौमिल गांधी के मुताबिक, इसकी कई वजहें हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जो महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ा रही हैं, एक बड़ा फैक्टर है।
साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों के बजाय डॉलर और बॉन्ड में निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे सोने पर दबाव बनता है।
यही वजह है कि फिलहाल सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़े क्यों हैं इतने ज़रूरी?
LKP सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च), जतिन त्रिवेदी ने भी इस पर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना, ये दोनों फैक्टर फिलहाल सोने में बड़ी तेजी की संभावना को सीमित कर रहे हैं।
अब सबकी नजरें अमेरिका के CPI (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) और कोर CPI महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में महंगाई किस रफ्तार से बढ़ रही है।
त्रिवेदी साहब ने साफ-साफ कहा कि अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर अपना सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे डॉलर और मजबूत होगा, और सोने पर दबाव और बढ़ सकता है।
लेकिन अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम आते हैं, तो सोने को सहारा मिल सकता है, यानी उसके दाम थोड़ा संभल सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं। कुल मिलाकर, इन आंकड़ों के आने से पहले सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
तो अगर आप खरीददारी का मन बना रहे हैं, तो थोड़ा धैर्य रखना और इन आंकड़ों पर नजर रखना समझदारी भरा फैसला हो सकता है।








































