बाजार अपडेट: सोमवार, 13 जुलाई का दिन सोने और चांदी के निवेशकों के लिए कुछ खास अच्छा नहीं रहा. एक बार फिर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ गई. अगर आप सोच रहे थे कि सोना-चांदी ऊपर जा रहे हैं, तो फिलहाल कीमतें देखकर शायद आप थोड़ी देर के लिए ठहर जाएं. वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, डॉलर का बढ़ता दम और अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड्स का मजबूत होना, जिसका सीधा असर निवेशकों के सेंटिमेंट पर दिख रहा है.
ताज़ा अपडेट ये है कि अगस्त डिलीवरी के लिए सोने का फ्यूचर ₹1,413 यानी करीब 0.98% लुढ़ककर ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया. ये गिरावट तब आई है, जब पिछले हफ़्ते ही सोने ने एक बड़ा 'करेक्शन' देखा था.
उस वक्त भी सोने का फ्यूचर ₹3,900 यानी 2.65% गिरकर लगभग ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. कुल मिलाकर, सोना लगातार दबाव में दिख रहा है.
सिर्फ सोने पर ही नहीं, बल्कि चांदी पर भी इस ग्लोबल कमजोरी का असर साफ तौर पर दिखाई दिया. चांदी भी दबाव में रही क्योंकि निवेशकों ने उन एसेट्स से दूरी बनाना शुरू कर दिया है, जिनसे उन्हें कोई इंटरेस्ट इनकम नहीं मिलती.
इंटरनेशनल लेवल पर भी, COMEX पर सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गया है और चांदी भी लगातार गोता लगा रही है.
तो आखिर सोने-चांदी की कीमतें लगातार क्यों गिर रही हैं?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये हो क्या रहा है? सोना तो हमेशा से अनिश्चितता के दौर में ‘सेफ-हेवन’ माना जाता है, फिर इसमें गिरावट क्यों? बता दें कि ये ताजा गिरावट पश्चिम एशिया में नए जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद आई है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच नए मिलिट्री एक्सचेंज ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं.
याद दिला दें कि ईरान ने कुछ समय के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान किया था, जो दुनिया भर में तेल शिपमेंट के लिए एक बहुत जरूरी रास्ता है. इस लड़ाई ने कच्चे तेल की कीमतों को और चढ़ा दिया.
सीधी बात ये है कि तेल की कीमतें जब ज्यादा होती हैं, तो महंगाई बढ़ने का डर फिर से सताने लगता है. और जब महंगाई बढ़ती है, तो निवेशक उम्मीद करने लगते हैं कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक इंटरेस्ट रेट्स को ऊंचा ही रखेगा.
यहीं से सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बनना शुरू होता है.
एक बात और समझनी होगी कि जब इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा होते हैं, तो अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड्स को सपोर्ट मिलता है. ऐसे में, सोना और चांदी जैसे बिना इंटरेस्ट वाले एसेट्स की चमक थोड़ी फीकी पड़ जाती है, क्योंकि निवेशक उन जगहों पर पैसा लगाना पसंद करते हैं जहां उन्हें कुछ न कुछ रिटर्न मिल रहा हो.
तो ये पूरा खेल आपस में जुड़ा हुआ है.
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं और आगे क्या उम्मीद है?
इस पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स की राय भी जानना जरूरी है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के कमोडिटीज़ एनालिस्ट मानव मोदी ने बताया, "अमेरिका और ईरान के बीच नए मिलिट्री टेंशन से तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे एनर्जी से चलने वाली महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं.
इस उम्मीद को बल मिला कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट्स को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा." उनकी बात से साफ है कि भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का डर, दोनों ही सोने के लिए अच्छी खबर नहीं हैं.
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव भी इस बात से इत्तेफाक रखती हैं. उनके मुताबिक, नए जियोपॉलिटिकल टेंशन से अमेरिकी डॉलर मज़बूत हुआ और इन्वेस्टर्स का सेंटिमेंट खराब हुआ.
उन्होंने आगे बताया कि निवेशक अब अमेरिका के ज़रूरी महंगाई डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं—जिसमें कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) शामिल हैं—साथ ही फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श की कांग्रेस के सामने गवाही का भी इंतज़ार है. इन सब से US इंटरेस्ट रेट्स के भविष्य के रास्ते के बारे में नए सिग्नल मिल सकते हैं.
कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में और भी खबरें आएंगी जिन पर बाजार की नजर रहेगी.
पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन को उम्मीद है कि कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव, जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे. फिलहाल, अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.









































