मार्केट डेस्क: शेयर बाजार की रंगीन दुनिया, जहां चमक-दमक के पीछे अक्सर बड़े जोखिम छिपे होते हैं। आजकल एक नया 'चैलेंज' देखने को मिल रहा है, खास तौर पर उन निवेशकों के लिए जो शॉर्टकट से पैसा बनाने की सोचते हैं। हम बात कर रहे हैं 'अनलिस्टेड मार्केट' की। यहां लोग उन कंपनियों के शेयर खरीद लेते हैं जो अभी तक शेयर बाजार में लिस्ट नहीं हुई होतीं। मकसद एक ही होता है — कि जब आईपीओ आएगा, तो बड़ा मुनाफा होगा! लेकिन हाल के ट्रेंड्स बता रहे हैं कि ये 'स्ट्रेटजी' कई लोगों के लिए महंगी साबित हुई है और उनकी पॉकेट पर भारी पड़ रही है।
अब आप सोच रहे होंगे कि ये अनलिस्टेड मार्केट क्या बला है? सीधा-सीधा कहें तो, जब कोई कंपनी अपना आईपीओ लाने से पहले ही अपने शेयर कुछ खास निवेशकों या बड़े-बड़े लोगों को बेचती है, तो उसे अनलिस्टेड मार्केट कहते हैं। यहां से शेयर खरीदने वाले सोचते हैं कि लिस्टिंग के वक्त उन्हें प्रीमियम मिलेगा और वो मालामाल हो जाएंगे।
लेकिन हाल के आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। कई ऐसे बड़े आईपीओ आए हैं, जिन्होंने अनलिस्टेड मार्केट के निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है।
जिन भावों पर उन्होंने ये शेयर खरीदे थे, आईपीओ का ऑफर प्राइस उससे कहीं नीचे था। यानी, खरीदने के तुरंत बाद ही बड़ा 'लॉस' देखना पड़ा।
आखिर अनलिस्टेड मार्केट में दिक्कत क्या है?
इस पूरे खेल में सबसे बड़ी समस्या 'लिक्विडिटी' की है। अनलिस्टेड स्पेस में शेयरों की खरीद-बिक्री बहुत कम होती है।
अब जब लिक्विडिटी ही नहीं है, तो शेयरों की असल कीमत यानी 'प्राइस डिस्कवरी' कैसे होगी? अधिकतर वेबसाइट्स जो आपको इन शेयरों की कीमत बताती हैं, वो बस एक 'इंडिकेटिव प्राइस' होता है, यानी एक अनुमानित भाव। ऐसे में ये रिस्क हमेशा रहता है कि जिस भाव पर आप शेयर खरीद रहे हैं या बेच रहे हैं, वो उसकी असल कीमत है भी या नहीं?
मोटा-मोटी समझ लीजिए कि आप एक ऐसी दुकान में सामान खरीद रहे हैं, जहां बेचने वाला कह रहा है कि ये इतनी कीमत का है, लेकिन मार्केट में उसका कोई तय रेट नहीं है। ऐसे में 'गलत अनुमान' लगने की गुंजाइश बढ़ जाती है, और अक्सर निवेशकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
अनलिस्टेड शेयर खरीदने वालों को कैसे लगा चूना?
आइए कुछ 'केस स्टडी' देखते हैं, जिससे ये बात और साफ हो जाएगी। बात करते हैं पीबी फिनटेक की।
ये वो कंपनी है जिसके जरिए आप पॉलिसीबाजार और पैसाबाजार जैसी सर्विस का फायदा उठाते हैं। नवंबर 2023 में इसके शेयर अनलिस्टेड मार्केट में 1,800 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से बिक रहे थे।
निवेशकों ने सोचा होगा, 'वाह, आईपीओ आएगा तो रॉकेट बन जाएगा!' लेकिन जब आईपीओ आया, तो उसका प्राइस बैंड था 940 से 980 रुपए प्रति शेयर। अब आप हिसाब लगाइए, सीधे-सीधे 45 फीसदी का 'डिस्काउंट'! यानी, जिन्होंने अनलिस्टेड मार्केट में 1,800 में खरीदा था, उन्हें आईपीओ आते ही 45% का 'नुकसान' झेलना पड़ा।
अब बात एसबीआई फंड्स की। जून के महीने में इसके अनलिस्टेड शेयर 850 रुपए के भाव पर ट्रेड कर रहे थे।
लोगों को लगा, 'सरकारी बैंक का फंड है, सिक्योर होगा, फायदा ही होगा।' लेकिन जब एसबीआई फंड्स का आईपीओ ऑफर प्राइस आया, तो वो था 574 रुपए प्रति शेयर।
यहां भी निवेशकों को 32 फीसदी का बड़ा 'डिस्काउंट' मिला। जिन्होंने 'लॉटरी' जीतने की उम्मीद में 850 में खरीदा था, उन्हें सीधा-सीधा 32% का 'चूना' लग गया।
क्या ये 'स्ट्रेटजी' काम कर रही है? बिल्कुल नहीं।
ये लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती। याद करिए एजीएस ट्रांज़ैक्ट का आईपीओ।
जनवरी 2022 में इसके अनलिस्टेड शेयर 550 रुपए प्रति शेयर के दाम पर बिक रहे थे। निवेशकों के मन में 'हाइप' था।
लेकिन जब कंपनी का आईपीओ आया, तो उसका प्राइस बैंड 185-195 रुपए प्रति शेयर था। आप खुद देख लीजिए, कितना बड़ा फर्क है! अनलिस्टेड मार्केट में खरीदा 550 में और आईपीओ आया 185-195 में।
ये तो ऐसा ही हो गया जैसे आप कोई चीज 100 रुपए में खरीदो और मार्केट में उसकी कीमत 30 रुपए निकले।
एचडीबी फाइनेंशियल का भी हाल कुछ ऐसा ही था। इस शेयर को लेकर अनलिस्टेड मार्केट में बड़ी 'लिक्विडिटी' और 'हाइप' था।
इसका अनलिस्टेड प्राइस 1200 से 1250 रुपए के बीच चल रहा था। लोगों को भरोसा था कि ये तो 'मल्टीबैगर' साबित होगा।
लेकिन आईपीओ का प्राइस बैंड 700 से 740 रुपए प्रति शेयर था। यहां भी निवेशकों को भारी 'चपत' लगी और उनके सपने चकनाचूर हो गए।
सेबी क्यों दे रहा है अलर्ट?
इस पूरे मामले पर 'सेबी' यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड भी लगातार 'अलर्ट' जारी कर रहा है। उनका साफ कहना है कि अनलिस्टेड स्पेस में 'लिक्विडिटी' कम होने और 'प्राइस डिस्कवरी' सही न होने की वजह से निवेश बहुत जोखिम भरा है।
सेबी लगातार निवेशकों को ऐसे निवेश से बचने की सलाह दे रहा है, जहां कीमतों में पारदर्शिता की कमी हो।
कुल मिलाकर, जो लोग ये सोचकर अनलिस्टेड मार्केट में पैसा लगाते हैं कि आईपीओ आने पर बड़ा मुनाफा कमा लेंगे, उन्हें अब तक के 'ट्रैक रिकॉर्ड' ने निराश ही किया है। ये 'स्ट्रेटजी' अक्सर गलत साबित होती है और निवेशकों को बड़ा 'नुकसान' उठाना पड़ सकता है।
तो अगली बार जब कोई आपको 'अनलिस्टेड' शेयर में निवेश का 'चमत्कार' बताए, तो जरा रुककर इन 'केस स्टडीज' को याद कर लीजिएगा। अपनी मेहनत की कमाई को 'जोखिम' में डालने से पहले अच्छी तरह 'रिसर्च' करना और 'एक्सपर्ट' की सलाह लेना ही समझदारी है।
क्योंकि, शेयर बाजार में पैसा बनता भी है और डूबता भी है, और अनलिस्टेड मार्केट में डूबने का 'रिस्क' कहीं ज्यादा है।




































