अयोध्या: राम मंदिर का नाम आते ही मन में श्रद्धा और आस्था की लहर दौड़ जाती है, लेकिन जब इसी पवित्र जगह के चढ़ावे में कथित चोरी या हेराफेरी की बात सामने आए, तो भक्तों का दिल दुखना स्वाभाविक है। मामला भी कोई छोटा-मोटा नहीं, सीधे देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। बीते सोमवार, 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों को एक बड़ा झटका देते हुए नोटिस जारी कर दिए हैं। ये नोटिस अयोध्या में राम मंदिर के लिए आए दान में हुई कथित धांधली की स्वतंत्र जांच से जुड़े हैं। अब सवाल ये है कि आखिर ये पूरा माजरा क्या है और कोर्ट ने इस पर इतना सख्त रुख क्यों दिखाया है? मामला दरअसल उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें राम मंदिर के लिए इकट्ठा किए गए दान के मैनेजमेंट में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। याचिकाओं में सीबीआई जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और कोर्ट की निगरानी में पूरे मामले की तह तक जाने की मांग की गई है। मतलब, सीधे-सीधे कहा गया है कि कुछ तो गड़बड़ है दया! सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई की और अब जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को भी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सिर्फ नोटिस ही जारी नहीं किए, बल्कि कई और अहम निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जांच कर रही एसआईटी को अपनी स्टेटस रिपोर्ट जल्द से जल्द कोर्ट में सौंपनी होगी। साथ ही, एसआईटी का गठन कैसे हुआ था, उससे जुड़े सारे रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में ही पेश की जाएगी, ताकि उसकी संवेदनशीलता बनी रहे। अब इस मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को होनी है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यह वही मामला है, जिसने तब खूब सुर्खियां बटोरी थीं जब उत्तर प्रदेश सरकार ने खुद इस पर एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद आनन-फानन में एफ़आईआर दर्ज हुई और कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं। लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये कार्रवाई नाकाफी है और सच्चाई की पूरी परतें अभी तक नहीं खुली हैं। अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच का अनुरोध किया था। इस पर राज्य सरकार ने 13 जून को एक तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इस टीम की अगुवाई लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे। इस एसआईटी का काम था, पूरे मामले की जड़ तक जाना और सच्चाई को सामने लाना। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 23 जून को राज्य सरकार को सौंप दी थी। मंडलायुक्त पंत ने यह रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी थी। उस वक्त पंत ने मीडिया को बताया था कि जांच अभी भी जारी है और आगे की पड़ताल पूरी होने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी। यानी, यह सिर्फ पहला चरण था और अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी था। अब जरा इस पूरे घटनाक्रम को देखिए। 1 जुलाई को राज्य सरकार ने एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन के लिए और बढ़ा दिया था, ताकि जांच पूरी की जा सके। इससे पता चलता है कि मामला इतना सीधा नहीं है जितना दिख रहा है और इसमें गहराई तक छानबीन की जरूरत है। सूत्रों की मानें तो एसआईटी अब फिर से अयोध्या का रुख कर सकती है। इस बार उनका मकसद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कुछ और लोगों से पूछताछ करना हो सकता है। क्या नए खुलासे होंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। राम मंदिर के लिए दान सिर्फ भारत से ही नहीं, बल्कि दुनियाभर से आया है। करोड़ों राम भक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा इस पावन कार्य के लिए समर्पित किया है। ऐसे में अगर दान के पैसों में गड़बड़ी की खबरें आती हैं, तो यह सीधे-सीधे उन करोड़ों लोगों की आस्था पर चोट है। याचिकाओं में जिस तरह सीबीआई जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की गई है, वह इन आरोपों की गंभीरता को दर्शाता है। फॉरेंसिक ऑडिट का मतलब है कि हिसाब-किताब की हर छोटी से छोटी चीज को बारीकी से परखा जाएगा, ताकि पैसे के लेन-देन में कोई भी अनियमितता सामने आ सके। कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग भी इसलिए की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी तरह के बाहरी दबाव से प्रभावित न हो। कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ पैसे की हेराफेरी का नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की पवित्रता का है, जिसे हर कीमत पर बनाए रखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का इस मामले में दखल देना दिखाता है कि न्यायपालिका इसे कितनी गंभीरता से ले रही है। अब इंतजार है अगले सोमवार की सुनवाई का, जब पता चलेगा कि यह मामला और कितनी परतों से पर्दा उठाता है। ट्रस्ट और यूपी सरकार को नोटिस जारी होने के बाद अब उनकी प्रतिक्रिया क्या आती है, यह भी देखने वाली बात होगी। क्या वे कोर्ट को संतुष्ट कर पाएंगे या फिर जांच का दायरा और बढ़ेगा? यह सब वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि राम मंदिर के नाम पर किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, खासकर तब जब देश की सबसे बड़ी अदालत इसमें सीधे तौर पर शामिल हो गई हो।आखिर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा और किसे फटकारा?
एसआईटी का गठन कब हुआ और क्या है उसकी रिपोर्ट?
दान के पैसे में गड़बड़ी के आरोप कितने गंभीर हैं?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट-सरकार को दिया नोटिस; एसआईटी से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, अगली सुनवाई अगले हफ्ते
सारांश
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट और यूपी सरकार से जवाब मांगा है। जानें क्या है पूरा मामला और क्या होगा आगे।






































