ज्योतिष डेस्क: सावन का महीना और उसके साथ आने वाले त्योहारों की धूम! इन सबमें अगर किसी पर्व का इंतज़ार सुहागिन महिलाओं को सबसे ज़्यादा रहता है, तो वो है हरियाली तीज। कल्पना कीजिए... चारों तरफ़ हरियाली, मन को लुभाने वाली बारिश की बूंदें और ऐसे माहौल में शिव-पार्वती की भक्ति में लीन होकर पति की लंबी उम्र और ख़ुशहाल दांपत्य जीवन की कामना। ये सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का एक ख़ूबसूरत रंग है, जो हर सुहागिन के दिल में ख़ास जगह रखता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर ये पावन पर्व कब पड़ रहा है? तो बता दें, साल 2026 में हरियाली तीज 16 जुलाई, गुरुवार को मनाई जाएगी। हर साल की तरह, यह पर्व भी सावन यानी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आएगा और इसका हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है।
खासकर नवविवाहितों और सुहागिन महिलाओं के लिए तो ये दिन किसी उत्सव से कम नहीं होता। इस दिन व्रत रखे जाते हैं, सोलह श्रृंगार किया जाता है और हर तरफ़ उल्लास का माहौल रहता है।
क्यों खास है हरियाली तीज का ये त्योहार?
हरियाली तीज सिर्फ़ एक दिन का व्रत नहीं है, बल्कि ये भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और उन्हें प्राप्त किया था।
इसलिए इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और एक सुखी दांपत्य जीवन के लिए महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। ये दिन दिखाता है कि कैसे प्यार और भक्ति हर चुनौती को पार कर सकते हैं।
कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं।
जब बात हरियाली तीज की आती है, तो सोलह श्रृंगार के बिना ये पर्व अधूरा सा लगता है। सोलह श्रृंगार सिर्फ़ सजने-संवरने का तरीका नहीं, बल्कि ये सुहाग के प्रतीक होते हैं, जो वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि लाते हैं।
तो आइए, जानते हैं कि इस दिन कौन-कौन सी चीज़ें पहनना और श्रृंगार में शामिल करना बेहद शुभ माना जाता है।
हरे रंग का क्या है महत्व?
पहला और सबसे ज़रूरी रंग है - हरा। सोचिए, सावन का महीना, चारों तरफ़ हरियाली और ऐसे में आप भी हरे रंग की साड़ी, लहंगा या सूट पहनकर पूजा में बैठें, कितना ख़ूबसूरत लगेगा! हरा रंग न सिर्फ़ प्रकृति का प्रतीक है, बल्कि इसे समृद्धि, खुशहाली और ताज़गी का भी सिंबल माना जाता है।
इसलिए हरियाली तीज पर हरे रंग के परिधान पहनने को विशेष रूप से शुभ बताया जाता है। ये आपकी ख़ुशियों में चार चांद लगा देता है।
चूड़ियों के बिना कैसी तीज?
हरे रंग की चूड़ियों के बिना तो तीज की कल्पना भी अधूरी है। हरी कांच की चूड़ियाँ सुहाग का अटूट प्रतीक मानी जाती हैं।
लोककथाओं और मान्यताओं के अनुसार, इन्हें पहनने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है। आप चाहें तो इन हरी चूड़ियों के साथ गोल्डन या कुंदन के कंगन भी स्टाइल कर सकती हैं, जो आपके लुक को और भी ज़्यादा रॉयल बना देंगे।
ये सिर्फ़ श्रृंगार नहीं, बल्कि परंपरा का एक ख़ूबसूरत हिस्सा है।
सिंदूर और बिंदी का क्या है रोल?
सुहागिन महिलाओं के सोलह श्रृंगार में सिंदूर और बिंदी का अपना एक अलग ही मुकाम है। हरियाली तीज की पूजा के समय अपनी मांग में सिंदूर भरना और माथे पर लाल या हरी बिंदी लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
ये न सिर्फ़ आपके पारंपरिक लुक को निखारता है, बल्कि इसे सौभाग्य और सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। कहते हैं, सिंदूर पति की लंबी उम्र की कामना से लगाया जाता है।
मेहंदी के बिना कैसे चलेगा?
हाथों और पैरों पर मेहंदी का गहरा रंग, तीज के त्योहार की जान है! ये त्योहार मेहंदी के बिना तो अधूरा ही माना जाता है। सुंदर-सुंदर डिज़ाइन वाली मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है और एक पुरानी कहावत भी है कि जितनी गहरी मेहंदी रचती है, उतना ही ज़्यादा पति का प्यार मिलता है।
अब इसमें कितनी सच्चाई है, ये तो वही जानें, लेकिन ये एक ख़ूबसूरत परंपरा ज़रूर है, जो हर सुहागिन के हाथों की शोभा बढ़ाती है।
मंगलसूत्र और पायल की कहानी
इसके अलावा, सुहागिन महिलाएं इस दिन मंगलसूत्र, पायल, बिछिया और सुहाग के दूसरे आभूषण ज़रूर पहनती हैं। ये सिर्फ़ ज़ेवर नहीं होते, बल्कि ये वैवाहिक जीवन के शुभ प्रतीक होते हैं, जो पति-पत्नी के रिश्ते को और मज़बूत करते हैं।
पारंपरिक गहनों से तीज का लुक और भी ज़्यादा आकर्षक और पूरा लगता है। तो अपने श्रृंगार में इन्हें शामिल करना बिल्कुल न भूलें।
किन बातों का रखें ख़ास ध्यान?
जिस तरह कुछ चीज़ें पहनना शुभ होता है, वैसे ही कुछ चीज़ों से हरियाली तीज के दिन परहेज़ करने की सलाह दी जाती है। जैसे, काले या गहरे उदास रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।
साथ ही, पूजा के समय बिना श्रृंगार के न रहें और फटे या बहुत ही साधारण कपड़े पहनने से भी बचें। अगर आप व्रत रख रही हैं, तो पूजा की परंपराओं और नियमों का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करना भी बहुत ज़रूरी है।
यह पर्व पवित्रता और सकारात्मकता का प्रतीक है।
कुल मिलाकर, हरियाली तीज का त्योहार सिर्फ़ व्रत और पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये मौज-मस्ती और उल्लास का भी पर्व है। इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं, तीज की कथा सुनती हैं और सावन के मधुर गीत गाती हैं।
कई जगहों पर पेड़ों पर ख़ूबसूरत झूले डाले जाते हैं, जहाँ महिलाएँ झूलों का आनंद लेती हैं और पुरानी यादें ताज़ा करती हैं। ये दिन बताता है कि कैसे हमारी परंपराएँ जीवन में ख़ुशियों और रंगों को भर देती हैं।
तो आप भी पूरी तैयारी के साथ इस ख़ूबसूरत पर्व का आनंद लें और अपने दांपत्य जीवन को और भी ज़्यादा ख़ुशहाल बनाएँ।









































