बिजनेस डेस्क: क्या हो अगर आपकी मेहनत का फल तो मीठा हो, लेकिन मार्केट में उसकी मिठास का असर उल्टा दिखने लगे? कुछ ऐसा ही पेचीदा खेल हुआ है बजाज कंज्यूमर केयर के साथ। एक तरफ तो कंपनी ने अपनी लेटेस्ट तिमाही के नंबरों से सबको चौंका दिया है, ताबड़तोड़ मुनाफे और रेवेन्यू में जबरदस्त उछाल दर्ज किया है। वहीं दूसरी तरफ, शेयर बाजार में उसके शेयर लुढ़कते हुए दिखे। आखिर माजरा क्या है? ये पूरा मामला थोड़ा उलझा हुआ है, आइए इसे थोड़ा खोलकर समझते हैं।
आप में से कई लोग बजाज कंज्यूमर केयर के प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करते होंगे। चाहे वो बजाज आल्मंड ड्रॉप्स हो, बजाज ब्राह्मी आम्ला हो या फिर बजाज सरसों तेल।
ये एफएमसीजी कंपनी हेयर केयर, स्किन केयर और हाइजीन सेगमेंट में खूब सारे प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी अगस्त 2010 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी और तब से इसने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं।
तो आखिर बजाज कंज्यूमर केयर ने क्या कमाल कर दिखाया?
बजाज कंज्यूमर केयर ने हाल ही में अपने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जो वाकई कमाल के रहे हैं। शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफे में सालाना आधार पर लगभग 85 प्रतिशत की बंपर बढ़ोतरी देखने को मिली है।
एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 38.28 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 70.74 करोड़ रुपये हो गया है। ये आंकड़े कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि की तरह हैं।
सिर्फ मुनाफा ही नहीं, ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में भी करीब 25 प्रतिशत का उछाल आया है। जून 2025 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 273.38 करोड़ रुपये था, जो अप्रैल-जून 2026 तिमाही में बढ़कर 341.56 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी ने इस तिमाही में कुल 262.34 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ये खर्च 235.17 करोड़ रुपये थे। मतलब, रेवेन्यू और प्रॉफिट, दोनों मोर्चों पर कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है।
कंपनी के प्रमुख प्रोडक्ट्स जैसे बजाज आल्मंड ड्रॉप्स, बजाज ब्राह्मी आम्ला, बजाज सरसों तेल, बजाज 100% कोकोनट ऑयल, बजाज आंवला एलोवेरा और बजाज गुलाब जल बाजार में काफी पॉपुलर हैं। इन प्रोडक्ट्स की बिक्री ने भी इस बढ़त में अहम भूमिका निभाई है।
इंटरनेशनल मार्केट से आई कौन सी खुशखबरी?
कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि इस शानदार ग्रोथ की एक बड़ी वजह इंटरनेशनल बिजनेस रहा है। भले ही पश्चिम एशिया संकट की वजह से थोड़ी रुकावटें आईं, लेकिन इंटरनेशनल बिजनेस ने कम बेस के बावजूद एक मजबूत तिमाही दर्ज की है।
कंपनी ने अपनी लीडरशिप और डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स में कुछ बदलाव किए थे, जिसके बाद उसने जबरदस्त वापसी की है।
नेपाल और बांग्लादेश जैसे कंपनी के मुख्य बाजारों में तो रेवेन्यू में लगातार डबल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है। इसका सीधा मतलब है कि विदेशों में भी बजाज कंज्यूमर केयर के प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ी है और कंपनी ने अपनी ग्लोबल प्रेजेंस को मजबूत किया है।
यह किसी भी एफएमसीजी कंपनी के लिए एक पॉजिटिव साइन होता है।
बंपर प्रॉफिट के बाद भी शेयर क्यों टूटा, क्या है माजरा?
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर: जब कंपनी ने इतना कमाल का प्रदर्शन किया, तो फिर 13 जुलाई को उसके शेयर में गिरावट क्यों आई? अक्सर ऐसा होता है कि जब अच्छे नतीजे आते हैं, तो शेयर रॉकेट की तरह ऊपर भागते हैं। लेकिन बजाज कंज्यूमर केयर के साथ उल्टा हुआ।
शेयर दिन में अपने पिछले बंद भाव से लगभग 2.5 प्रतिशत तक टूट गया और बीएसई पर 651.55 रुपये के लो तक गया।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि शेयर सिर्फ गिरा ही। बीच में इसने थोड़ा उछाल भी मारा और 3.4 प्रतिशत बढ़कर 691.15 रुपये पर 52 सप्ताह का नया हाई भी बनाया।
लेकिन दिन के आखिर में गिरावट हावी रही। मार्केट कैप की बात करें तो कंपनी का मार्केट कैप 8600 करोड़ रुपये से ज्यादा है और यह बीएसई 1000 इंडेक्स का भी हिस्सा है।
शेयर में ये अजीबोगरीब मूवमेंट कभी-कभी निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
तो फिर इस शेयर में आगे क्या हो सकता है?
अगर हम बजाज कंज्यूमर केयर के शेयर के पिछले कुछ समय के परफॉर्मेंस पर नजर डालें, तो पता चलता है कि यह शेयर लंबे समय से निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे रहा है। पिछले एक साल में यह शेयर 183 प्रतिशत मजबूत हुआ है, यानी पैसा लगभग तीन गुना कर चुका है।
6 महीनों में 133 प्रतिशत और 3 महीनों में लगभग 57 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। यहां तक कि पिछले 2 सप्ताह में भी शेयर 10 प्रतिशत चढ़ा है।
कंपनी की फेस वैल्यू 1 रुपये है। जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास कंपनी में 42.97 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो एक स्टेबल ओनरशिप पैटर्न दिखाता है।
बीएसई पर शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड लो 220.05 रुपये है, जिसका मतलब है कि शेयर ने उस लेवल से अब तक जबरदस्त वापसी की है।
कुल मिलाकर, कंपनी के फंडामेंटल्स मजबूत दिख रहे हैं और बिजनेस भी अच्छा कर रहा है। शेयर में हालिया गिरावट भले ही अच्छे नतीजों के बाद आई हो, लेकिन इसके पीछे मार्केट की अपनी अलग साइकोलॉजी हो सकती है।
शेयर मार्केट में निवेश हमेशा जोखिमों के अधीन होता है। इसलिए, किसी भी निवेश का फैसला करने से पहले एक्सपर्ट्स की राय लेना और अपनी रिसर्च करना बहुत जरूरी है।





































