नई दिल्ली: हॉरर फिल्मों के शौकीनों का दिल इस साल 'एविल डेड बर्न' से बहुत उम्मीदें लगाए बैठा था। यह फिल्म 'एविल डेड' फ्रेंचाइजी की छठी कड़ी बताई जा रही थी, जिसे लेकर पहले से ही माहौल गरमाया हुआ था। लेकिन, जब फिल्म सिनेमाघरों में उतरी और समीक्षकों ने इसे परखा, तो नतीजा कुछ ऐसा निकला जिसने कई फैंस को मायूस कर दिया। जिन्होंने इसे देखा, उनका मोटा-मोटी यही कहना है कि फिल्म में खून-खराबा तो खूब है, चीख-पुकार भी कम नहीं, पर अगर आप हॉरर फिल्मों में सिर्फ शॉक वैल्यू से ज्यादा कुछ ढूंढ रहे थे, तो शायद 'एविल डेड बर्न' आपको निराश करेगी।
हमें बता दें कि फिल्म की कमान Sébastien Vaniček के हाथों में थी, जिन्हें अपनी पिछली फिल्म 'Infested' के लिए जाना जाता है। उस फिल्म ने मकड़ी के डर को जिस तरह पर्दे पर उतारा था, वो वाकई काबिले-तारीफ था।
ऐसे में 'एविल डेड' जैसी आइकॉनिक सीरीज के लिए Vaniček का नाम सुनकर उत्साह बढ़ना लाज़मी था। लगा था कि शायद ये कुछ नया और धमाकेदार लेकर आएंगे, जो फ्रेंचाइजी को एक नई दिशा देगा।
पर अफसोस, ऐसा कुछ खास हुआ नहीं, और शायद यही सबसे बड़ी टेंशन वाली बात रही।
कहानी की बात करें तो, 'एविल डेड बर्न' में हमें Alice (Souheila Yacoub) नाम की एक महिला की कहानी दिखाई जाती है, जो अपने पति William (George Pullar) को खोने के गम से जूझ रही है। इस गम में वो अपने ससुराल वालों के पास सुकून ढूंढने जाती है।
यहां हमें Netflix की पॉपुलर सीरीज 'Wednesday' के स्टार Hunter Doohan भी नज़र आते हैं, जिन्हें एक हॉरर फिल्म में देखना अपने आप में एक अलग अनुभव था। सब कुछ ठीक चल रहा होता है, लेकिन फिर एक-एक करके परिवार के लोग Deadites में बदलना शुरू हो जाते हैं।
ये वही शैतानी आत्माएं हैं जिनसे 'एविल डेड' सीरीज के फैंस बखूबी वाकिफ हैं।
तो फिर फिल्म में गड़बड़ कहां हो गई?
देखिए, ऐसा नहीं है कि फिल्म में सब कुछ ही बुरा है। अगर आप सिर्फ भीषण खून-खराबा और जबरदस्त प्रैक्टिकल इफेक्ट्स देखने के मूड में हैं, तो 'एविल डेड बर्न' आपको कुछ देर के लिए एंटरटेन कर सकती है।
कुछ सीन तो ऐसे हैं, जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगे और शायद आपको असहज महसूस कराएं। जैसे कि डिशवॉशर और एक कार के दरवाज़े से जुड़े कुछ सीन, जिनका जिक्र रिव्यू में खास तौर पर किया गया है।
ये बताते हैं कि मेकर्स ने विजुअली इम्पैक्टफुल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कास्ट भी साफ तौर पर अपने काम को एंजॉय करती दिख रही थी, जो कि एक प्लस पॉइंट था।
पर अफसोस, सिर्फ खून-खराबे और झकझोर देने वाले दृश्यों से ही कोई हॉरर फिल्म महान नहीं बनती। फिल्म की सबसे बड़ी खामी यही है कि ये 'एविल डेड' की दुनिया (लॉर) में कुछ नया नहीं जोड़ती।
कहानी बहुत कमजोर है, और कई जगहों पर तो आप खुद को कन्फ्यूज पाएंगे। ऐसा लगता है कि मेकर्स सिर्फ शॉक वैल्यू पर ही टिके रहे और एक मजबूत प्लॉट तैयार करने की जहमत नहीं उठाई।
इसका नतीजा ये हुआ कि फिल्म देखते-देखते आप सिर्फ खून देखकर ही ऊबने लगते हैं, जबकि हॉरर फिल्में सस्पेंस और कहानी से भी बांधती हैं।
डेड़ाइट्स के नियम क्या बदल गए?
फिल्म देखते हुए एक और बात जो आपको खटक सकती है, वो है डेड़ाइट्स के कब्जे (पजेशन) को लेकर बनी कन्फ्यूजन। कभी लगता है कि इन्हें शरीर में घुसने के लिए तरल पदार्थों के आदान-प्रदान की जरूरत है, और कभी ये कब्जा करने में काफी समय लेते हैं।
पूरी फिल्म में इस नियम में एक स्थिरता नहीं दिखती, जो 'एविल डेड' के पुराने फैंस को ज़रूर परेशान कर सकती है। जब सीरीज की अपनी एक स्थापित दुनिया और नियम हों, तो उनमें लगातार बदलाव या अस्पष्टता फैंस को पसंद नहीं आती।
यह एक तरह का प्लॉट होल ही है जो दर्शकों को कहानी से जोड़े रखने में दिक्कत पैदा करता है।
क्या ये ओरिजिनल 'एविल डेड' से बहुत अलग है?
अगर आप Sam Raimi की बनाई हुई ओरिजिनल 'एविल डेड' फिल्मों के फैन रहे हैं, या फिर Bruce Campbell के वो आइकॉनिक किरदार आपको याद हैं, तो 'एविल डेड बर्न' आपको काफी दूर की कौड़ी लगेगी। यह फिल्म अपने पूर्ववर्ती, 'Evil Dead Rise' की तुलना में भी फीकी पड़ती दिखती है।
ऐसा लगता है जैसे मेकर्स ने सीरीज के मूल सार और उसकी पहचान से खुद को काफी हद तक अलग कर लिया है। 'एविल डेड' की अपनी एक खास टोन थी, एक डरावनी लेकिन कहीं-कहीं हल्की-फुल्की कॉमेडी वाली फीलिंग।
'एविल डेड बर्न' में वो मिसिंग है। यह सिर्फ एक खूनी फिल्म बनकर रह जाती है, जिससे आप शायद ही कोई भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर पाएं।
और तो और, फिल्म में आपको कई चीप और प्रेडिक्टेबल जम्प स्केयर भी मिलेंगे। मतलब, आप पहले से ही भांप जाएंगे कि अब कुछ डरावना होने वाला है।
ये वही घिसी-पिटी चालें हैं जो हॉरर फिल्मों को कमजोर करती हैं। कुल मिलाकर, 'एविल डेड बर्न' उन फिल्मों में से है, जो केवल खून-खराबे और डरावने दृश्यों के दम पर दर्शकों को खींचने की कोशिश करती है, लेकिन एक दमदार कहानी और सस्पेंस बनाने में नाकाम रहती है।
इसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मेकर्स ने ये मान लिया था कि दर्शकों को बस खून और हिंसा चाहिए, और बाकी सब अपने आप चल जाएगा। लेकिन 'एविल डेड' के फैंस सिर्फ इतना ही नहीं चाहते, उन्हें उस दुनिया की गहराई और किरदार भी पसंद आते हैं।
तो अगर आप 'एविल डेड' के असली मजे को मिस कर रहे हैं और ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो सिर्फ डराने के लिए नहीं, बल्कि कहानी सुनाने के लिए बनी हो, तो शायद आपको किसी और विकल्प की तलाश करनी चाहिए। 'एविल डेड बर्न' एक ओवर-द-टॉप और खून से लथपथ दुःस्वप्न जरूर है, पर इसमें शॉक वैल्यू के अलावा कुछ खास नहीं है।
जिन फैंस को 'एविल डेड' से थोड़ा और 'मीट ऑन द बोन' चाहिए था, वो शायद निराश ही होंगे। इस फिल्म को देखने के बाद आप कह सकते हैं कि यह फ्रेंचाइजी की एक कमजोर कड़ी साबित हुई है, जो अपनी पहचान को भूलकर सिर्फ खून-खराबे पर फोकस कर रही थी और इस चैलेंज में पास नहीं हो पाई।





































