साइबर डेस्क: अगर आप किसी छोटी या मझोली कंपनी में काम करते हैं, तो साइबर सिक्योरिटी आपके लिए कोई नया शब्द नहीं होगा। आप आए दिन सुनते होंगे कि कैसे हैकर्स कंपनियों के डेटा पर सेंध लगाते हैं और बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं। आपकी कंपनी भी शायद अपने लैपटॉप, सर्वर, और क्लाउड प्लेटफॉर्म की सुरक्षा पर लाखों खर्च करती होगी, ताकि डेटा चोरी न हो सके।
लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आपके ऑफिस के कोने में एक ऐसा डिवाइस भी है, जो शायद इन सारी सिक्योरिटी चर्चाओं से बाहर रहता है? एक ऐसा डिवाइस जो रोज़ाना बेहद संवेदनशील जानकारी को संभालता है, लेकिन फिर भी उस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता। जी हां, हम बात कर रहे हैं आपके ऑफिस में रखे आम से प्रिंटर की।
ये सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन आजकल प्रिंटर साइबर अटैकर्स के लिए एक 'हिडन गेटवे' (छुपा हुआ रास्ता) बनते जा रहे हैं। ये डिवाइस हमारी दिन-प्रतिदिन की कामकाज का एक अहम हिस्सा हैं, फिर भी इन्हें साइबर सिक्योरिटी चेकलिस्ट से बाहर रखा जाता है।
इसी अनदेखी का खामियाजा कंपनियों को भुगतना पड़ सकता है।
आखिर प्रिंटर क्यों बन रहा है साइबर अटैक का नया टारगेट?
हाल ही में एक नई रिसर्च सामने आई है, जिसने इस गंभीर मुद्दे की ओर इशारा किया है। इस रिसर्च के नतीजे चौंकाने वाले हैं।
यह बताती है कि यूके की 73 प्रतिशत छोटी और मझोली कंपनियां (SMBs) अपने मौजूदा डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट प्रोसेस में डेटा प्राइवेसी को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। इसका सीधा मतलब है कि उन्हें डर है कि उनके डिजिटल और फिजिकल डॉक्यूमेंट्स से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक हो सकती है या गलत हाथों में पड़ सकती है।
ये कंपनियां अच्छी तरह समझती हैं कि डेटा कितना कीमती है और उसकी सुरक्षा कितनी ज़रूरी है। लेकिन, चौंकाने वाली बात ये है कि इन्हीं कंपनियों में से 55 प्रतिशत प्रिंटर्स को अपनी ओवरऑल साइबर सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी में बहुत कम प्रायोरिटी देती हैं।
यानी, उनके लिए प्रिंटर की सुरक्षा या तो लिस्ट में सबसे नीचे आती है, या शायद उस पर बिल्कुल ही ध्यान नहीं दिया जाता।
यहीं पर एक बड़ा 'डिस्कनेक्ट' (गड़बड़) पैदा होता है। एक तरफ आप संवेदनशील डेटा को लेकर इतनी चिंता में हैं, और दूसरी तरफ, उस डेटा को लगातार संभालने वाले एक ज़रूरी डिवाइस को आप अनदेखा कर रहे हैं।
ये ठीक वैसा ही है जैसे आप अपने घर के मेन गेट पर तो मज़बूत ताला लगा दें, लेकिन पीछे की खिड़की खुली छोड़ दें।
साइबर अपराधी इसी अनदेखी का फायदा उठाते हैं। वे प्रिंटर के ज़रिए आपके नेटवर्क में घुसपैठ कर सकते हैं।
वे आपके ज़रूरी दस्तावेज़ों को इंटरसेप्ट कर सकते हैं, यानी उन्हें छपाई से पहले ही रोक कर चुरा सकते हैं। इतना ही नहीं, एक बार प्रिंटर में सेंध लग गई, तो वे उसे एक पायदान बनाकर आपके पूरे नेटवर्क में आसानी से फैल सकते हैं।
सोचिए, कर्मचारियों की पेरोल की जानकारी, क्लाइंट के बेहद अहम कॉन्ट्रैक्ट्स, या फिर कंपनी के गोपनीय बिज़नेस प्लान्स — सब कुछ खतरे में पड़ सकता है।
हाइब्रिड वर्क कल्चर ने कैसे बढ़ाई है ये टेंशन?
आजकल के दौर में काम करने का तरीका बहुत बदल गया है। अब सिर्फ ऑफिस के चार दीवारी में बैठकर काम नहीं होता।
लोग घर से, कैफे से, या किसी भी साझा वर्कस्पेस से काम करते हैं। इस 'हाइब्रिड वर्किंग' मॉडल के अपने फायदे हैं, लेकिन साइबर सिक्योरिटी के नज़रिए से ये एक बड़ा 'चैलेंज' बन गया है।
जब कोई कर्मचारी अपने घर के नेटवर्क या किसी निजी डिवाइस से कंपनी के डॉक्यूमेंट्स का प्रिंट निकालता है, तो कंपनी के लिए उन गतिविधियों को मॉनिटर करना या कंट्रोल करना बेहद मुश्किल हो जाता है। घर के प्रिंटर आमतौर पर ऑफिस के प्रिंटर जितनी सुरक्षित सेटिंग्स के साथ नहीं आते।
अक्सर, उनके फ़र्मवेयर अपडेट नहीं होते और उनमें बेसिक सिक्योरिटी फीचर्स की भी कमी होती है।
आज भी, प्रिंट और स्कैन के कामों में ढेर सारा संवेदनशील डेटा प्रोसेस होता है। इसमें कर्मचारियों की सैलरी डिटेल्स, नए बिज़नेस कॉन्ट्रैक्ट्स, ग्राहकों के रिकॉर्ड्स और कंपनी की गोपनीय फाइनेंशियल फाइलें शामिल होती हैं।
इन सब डेटा को एक असुरक्षित प्रिंटर के ज़रिए निकालना या स्कैन करना, सीधे-सीधे बड़े साइबर रिस्क को दावत देना है।
कंपनियों को ये बात अब गंभीरता से समझनी होगी कि प्रिंटर सिर्फ कागज निकालने वाली एक मशीन नहीं है। यह एक नेटवर्क डिवाइस है, जिसका अपना ऑपरेटिंग सिस्टम होता है, अपनी मेमोरी होती है, और अक्सर यह इंटरनेट से भी जुड़ा होता है।
अगर इसकी सुरक्षा पर ध्यान न दिया जाए, तो यह एक खुला दरवाजा बन सकता है, जिससे हैकर्स आसानी से आपके पूरे सिस्टम में घुस सकते हैं और आपकी कंपनी का करोड़ों का नुकसान कर सकते हैं।
साइबर सिक्योरिटी सिर्फ सॉफ्टवेयर और फायरवॉल तक सीमित नहीं है। इसमें आपके ऑफिस के हर उस डिवाइस को शामिल करना ज़रूरी है, जो डेटा के साथ डील करता है, चाहे वो नया लैपटॉप हो, हाई-एंड सर्वर हो या फिर आपका पुराना और भरोसेमंद प्रिंटर ही क्यों न हो।
अब समय आ गया है कि प्रिंटर्स को भी साइबर सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी का एक अहम और ज़रूरी हिस्सा बनाया जाए, नहीं तो ये चुपचाप बैठा खतरा कभी भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।



































