अयोध्या: जिस राम मंदिर के भव्य उद्घाटन ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरो दिया, अब वहां एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभाने का मौका सामने आया है। हम बात कर रहे हैं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की, जिसने मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर भर्ती निकाली है। ये कोई छोटी-मोटी नौकरी नहीं, बल्कि मंदिर के पूरे मैनेजमेंट, संचालन और भविष्य की योजनाओं को संभालने का जिम्मा है। सोचिए, उस ऐतिहासिक स्थान का प्रशासन संभालने का अवसर, जहां करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है!
बता दें कि इस पद के लिए आवेदन करने का सिलसिला शुरू हो चुका है और इच्छुक उम्मीदवार 18 जुलाई, 2026 तक अपना हाथ आजमा सकते हैं। ट्रस्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक ऑफिशियल नोटिस जारी कर इसकी जानकारी दी है।
तो, अगर आप भी इस बड़े काम का हिस्सा बनना चाहते हैं और जरूरी योग्यताएं पूरी करते हैं, तो ये आपके लिए एक शानदार अवसर हो सकता है।
आखिर ये कौन सा पद है और क्या है इसका पूरा माजरा?
दरअसल, 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी हर गतिविधि को देखता है। इसी ट्रस्ट ने अब मंदिर के लिए एक दमदार सीईओ की तलाश शुरू की है।
जो भी शख्स इस पद के लिए चुना जाएगा, उसे पूरे तीन साल तक अपनी सेवाएं देनी होंगी। एक तरह से, ये मंदिर के मैनेजमेंट के लिए एक कप्तान चुनने जैसा है, जो पूरे जहाज को सही दिशा में चलाएगा।
इस पद के लिए एक एज लिमिट भी तय की गई है। नोटिस के मुताबिक, 50 से 70 साल की उम्र के अनुभवी लोग ही इस पर अप्लाई कर सकते हैं।
यानी, युवा जोश के साथ-साथ परिपक्वता और अनुभव को भी तरजीह दी जा रही है। वहीं, सैलरी की बात करें तो, इसे आपसी सहमति के आधार पर तय किया जाएगा।
यानी, बातचीत करके एक ऐसा अमाउंट फिक्स किया जाएगा जो दोनों पक्षों के लिए ठीक हो।
कुल मिलाकर, सीईओ की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पूरे मैनेजमेंट की होगी। इसमें सिर्फ कागज पर काम करना नहीं, बल्कि संस्था के लक्ष्य और दायरे को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशनल सिस्टम, प्रक्रियाएं और काम करने के तरीके डेवलप करना शामिल है।
साथ ही, संगठन के ढांचे को और मजबूत बनाना भी उनकी प्राइमरी जिम्मेदारी होगी।
सीईओ का काम क्या होगा, कौन-कौन से डिपार्टमेंट संभालेंगे?
अगर आप सोच रहे हैं कि एक मंदिर के सीईओ का काम क्या होता होगा, तो यहां जिम्मेदारियों की एक लंबी लिस्ट है। सीईओ को ट्रस्ट के अधिकारियों, कर्मचारियों और दूसरे सभी लोगों के काम पर नजर रखनी होगी।
यानी, उन्हें एक तरह से सबके काम का 'मॉनिटर' बनना होगा ताकि सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहे।
इसके अलावा, ट्रस्ट की अभी जो भी गतिविधियां चल रही हैं और भविष्य में जो भी डेवलपमेंट प्लान हैं, उन्हें बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाना भी सीईओ के ही जिम्मे होगा। चाहे वो कोई नया प्रोजेक्ट हो, मंदिर परिसर में कोई सुधार हो, या श्रद्धालुओं के लिए कोई नई सुविधा शुरू करनी हो, ये सब सीईओ की देखरेख में होगा।
कानूनी दांवपेच भी कम नहीं होते। इसलिए, सभी कानूनी, रेगुलेटरी और ट्रस्ट डीड की जरूरतों का पालन हो रहा है या नहीं, ये सुनिश्चित करना भी सीईओ का ही काम होगा।
ताकि कोई भी काम नियम-कानून के खिलाफ न हो और हर चीज पारदर्शिता के साथ हो।
वित्तीय लेनदेन (फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) और अकाउंटिंग सिस्टम में पूरी तरह से पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे, ये भी सीईओ की एक बड़ी जिम्मेदारी है। संस्था से जुड़ी हर जानकारी साफ-सुथरी और स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसी को कोई शक-शुबहा न हो।
एफिशिएंसी को बढ़ावा देना भी उनके रोल का एक अहम हिस्सा है।
ट्रस्ट के अनुसार, सीईओ सीधे महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) को रिपोर्ट करेंगे। मतलब, वे ट्रस्ट के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी होंगे।
उनके कंधों पर ट्रस्ट के प्रशासनिक, वैधानिक (स्टेट्यूटरी) और वित्तीय कार्यों को ठीक से चलाने का भार होगा। साथ ही, संस्था की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने, नई व्यवस्थाएं विकसित करने और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।
एक तरह से, वे ट्रस्ट के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के मास्टरमाइंड होंगे।
सिर्फ ऑफिस का काम नहीं, सुरक्षा और आस्था का भी जिम्मा क्यों?
ये पद सिर्फ कागजी कार्यवाही या मैनेजमेंट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आस्था और सुरक्षा जैसे संवेदनशील पहलू भी शामिल हैं। राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा टॉप-प्रायोरिटी पर रखा जाता है।
ऐसे में, सीईओ को जरूरत पड़ने पर स्थानीय, राज्य और यहां तक कि केंद्र सरकार की सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी कोऑर्डिनेट करना होगा। ताकि मंदिर और वहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई कमी न आए।
मंदिर में आए दिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, पर्व और उत्सव होते रहते हैं। इन सभी आयोजनों का संचालन पुरानी परंपराओं के अनुसार और बिना किसी बाधा के हो, ये देखना भी सीईओ की जिम्मेदारी में शामिल है।
चाहे वो रामनवमी का उत्सव हो या दिवाली की तैयारी, सब कुछ तय रीति-रिवाजों से हो, इस पर सीईओ की खास नजर रहेगी।
आखिर में, श्रद्धालुओं की सुविधा और ट्रस्ट की प्रतिष्ठा बढ़ाना भी सीईओ के काम का एक अहम हिस्सा होगा। जो भक्त मंदिर दर्शन के लिए आते हैं, उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें एक अच्छा अनुभव मिले, ये सुनिश्चित करना भी सीईओ का ही कर्तव्य होगा।
साथ ही, ट्रस्ट की इमेज को और बेहतर बनाना और उसकी साख को बनाए रखना भी उनके प्रमुख लक्ष्यों में से एक होगा। यह पद किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए एक बड़ा चैलेंज और गर्व का विषय होगा।







































