श्रीनगर: राजनीति भी क्या गजब की चीज़ है! यहाँ कब कौन किसे 'लव लेटर' दे दे, कोई नहीं कह सकता. अब आप सोच रहे होंगे कि प्यार-मोहब्बत की बातें और पॉलिटिक्स का क्या कनेक्शन? तो कनेक्शन तगड़ा है और सीधे जम्मू-कश्मीर से जुड़ा है. यहाँ के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को बीजेपी ने थमा दिया है 100 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस, लेकिन अब्दुल्ला साहब इसे 'लव लेटर' बता रहे हैं. और तो और, इसे अपनी शान में गुस्ताखी नहीं, बल्कि सम्मान की निशानी मान रहे हैं.
मामला कुछ ऐसा है कि इस कानूनी नोटिस पर उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को जमकर तंज कसा. उनका कहना है कि उन्हें बीजेपी से ऐसा 'लव लेटर' पाकर गर्व महसूस हो रहा है.
क्यों? क्योंकि इससे यह साबित होता है कि वो जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक ऐसी बड़ी ताकत हैं, जिसे बीजेपी चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर सकती.
अब सोचने वाली बात है कि आखिर 100 करोड़ के नोटिस को 'लव लेटर' क्यों कहा जा रहा है? दरअसल, यह सब राजनीतिक बयानबाजी का नतीजा है. जम्मू-कश्मीर की सियासत में इन दिनों गहमागहमी है और इसी बीच यह नया विवाद खड़ा हो गया है.
आखिर बीजेपी ने उमर को नोटिस क्यों भेजा?
इस पूरे मामले की जड़ में उमर अब्दुल्ला का वो बयान है, जिसमें उन्होंने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया था. उमर ने कहा था कि बीजेपी ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश की थी.
आरोप के मुताबिक, बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायकों को पैसे का लालच दिया और साथ ही मंत्री पद भी ऑफर किए थे, ताकि वो उनकी सरकार को अस्थिर कर सकें. बीजेपी को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने तुरंत कानूनी रास्ता अपना लिया.
श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने अपनी बात रखी. उन्होंने बताया, "मुझे एक वकील के जरिए एक खत मिला है, वो भी इलेक्ट्रॉनिक कॉपी में.
मैं इसे बहुत सम्मान की बात मानता हूँ क्योंकि जम्मू-कश्मीर में मैं अकेला ऐसा पॉलिटिशियन हूं जिसे बीजेपी की तरफ से इस तरह का 'लव लेटर' मिला है."
कानूनी रास्ता क्यों, पॉलिटिकल जवाब क्यों नहीं?
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा, "मैं इसे सम्मान की निशानी मानता हूँ कि जाहिर है, मैं जम्मू-कश्मीर में एक ऐसी राजनीतिक ताकत हूं जिसे वे नजरअंदाज नहीं कर सकते." मुख्यमंत्री उस सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें बीजेपी ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा था.
इस नोटिस में कहा गया था कि अगर वे विधायकों को तोड़ने के आरोपों को साबित नहीं कर पाते या सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो उन पर 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा किया जाएगा.
अब्दुल्ला ने बीजेपी के इस कदम पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उन्होंने एक राजनीतिक बयान दिया था और उन्हें उम्मीद थी कि बीजेपी भी इसका राजनीतिक तरीके से ही जवाब देगी.
लेकिन, बीजेपी ने कानूनी रास्ता चुन लिया. इस पर उमर अब्दुल्ला ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "यह बीजेपी के लड़ने के तरीके को दिखाता है.
वे राजनीतिक लड़ाइयां लड़ते हैं और अदालतों की आड़ लेते हैं."
क्या उमर विधानसभा की आड़ ले सकते थे?
उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर भी जोर दिया कि वे चाहते तो अपनी बात विधानसभा में भी रख सकते थे. उन्होंने कहा, "मैं वही बयान देकर विधानसभा की आड़ ले सकता था.
मैं विधानसभा में बयान देकर उन विशेषाधिकारों का फायदा उठा सकता था जिन्हें विधानसभा के बाहर चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया." इससे यह साफ होता है कि उमर खुद को कानूनी लड़ाई के लिए तैयार दिखा रहे हैं.
उमर अब्दुल्ला यहीं नहीं रुके. उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करने की पूरी तैयारी कर ली है.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर के कई बीजेपी नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और उसके नेताओं पर बेबुनियाद और बदनामी वाले आरोप लगाए हैं. उन्होंने खास तौर पर एक बीजेपी नेता का जिक्र किया, जिन्होंने बार-बार ऐसे इल्जाम लगाए हैं.
अब उमर अब्दुल्ला भी 'जैसे को तैसा' वाले अंदाज में आगे बढ़ने वाले हैं. उन्होंने कहा, "अब हम उस खास बीजेपी नेता और कुछ अन्य लोगों को कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू करेंगे और देखते हैं कि यह प्रक्रिया कहां तक जाती है.
" इस तरह साफ है कि यह मानहानि का मामला सिर्फ एक तरफा नहीं रहने वाला, बल्कि दोनों ओर से कानूनी दांवपेच देखने को मिलेंगे.
बीजेपी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में साफ कहा गया है कि उमर अब्दुल्ला के ये आरोप सिविल और क्रिमिनल दोनों कानूनों के तहत मानहानि के दायरे में आते हैं. अब देखना होगा कि जम्मू-कश्मीर की यह राजनीतिक तकरार कानूनी गलियारों में क्या मोड़ लेती है और कौन किस पर भारी पड़ता है.







































