तकनीकी डेस्क: आज के जमाने में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर जगह अपनी धाक जमा रहा है, तो भला एंटरप्राइज़ सेक्टर इससे अछूता कैसे रह सकता है? कंपनियां सोच रही हैं कि क्यों न इस AI को लगाया जाए अपने बरसों पुराने, धुल फांकते सिस्टम्स को सुधारने में, जिन्हें 'लेगेसी सिस्टम' कहा जाता है। सुनने में कितना बढ़िया लगता है न? एक क्लिक में AI आया, पुराने कोड को पढ़ा, समझा और सब मॉडर्न कर दिया। लेकिन हकीकत कुछ और है भैया, यहां पर ‘पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त’ वाला मामला है।
हाल ही में IBM ने अपना AI कोडिंग असिस्टेंट 'बॉब' लॉन्च किया है, जो इस बात का जीता-जागता सबूत है कि टेक इंडस्ट्री इस दिशा में कितनी गंभीरता से सोच रही है। ऐसे तमाम AI टूल्स का दावा है कि ये लेगेसी सिस्टम्स को समझना, उनका आकलन करना और आखिर में उन्हें आधुनिक बनाना आसान बना देंगे।
और इसमें कुछ हद तक सच्चाई भी है, पर पूरा सच नहीं।
AI पुराने कोड को कैसे पढ़ता है?
मान लीजिए आपके पास हजारों लाइनों का कोई बहुत पुराना कोड है, जिसे बनाने वाले अब रिटायर हो चुके हैं या इस दुनिया में नहीं। उस कोड को समझना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं होता।
यहां AI अपनी जादूगरी दिखाता है। ये AI टूल्स पलक झपकते ही हजारों लाइनों के लेगेसी कोड को खंगाल डालते हैं।
ये AI ये भी बता देते हैं कि कौन से API अब पुराने हो चुके हैं (यानी 'डेप्रिकेटेड' हो गए हैं), बिजनेस का लॉजिक क्या था, और सबसे अहम बात, इस कोड में कहां-कहां 'टेक्निकल डेट' छुपा हुआ है। 'टेक्निकल डेट' का मतलब है वो शॉर्टकट या खराब डिजाइन जो कोड बनाते समय लिए गए थे, और अब उनकी कीमत चुकानी पड़ रही है।
उन संगठनों के लिए जिन्होंने दशकों से अपने ऑपरेशंस का इतिहास सहेज रखा है, इस तरह की जानकारी मिलना वाकई बहुत बड़ी बात है। लेकिन क्या सिर्फ यह जानकारी मिल जाने से सब कुछ आधुनिक हो गया?
तो फिर असली चुनौती कहां है?
यहां एंट्री होती है एनसोनो (Ensono) में चीफ AI ऑफिसर जिम पियाजा की। उनका कहना है, "किसी सिस्टम को कैसे काम करना है, ये समझना जरूरी है।
लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।" उन्होंने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जहां टीमों ने साफ-सुथरे 'डिपेंडेंसी मैप', कोड के डीटेल समरी और शानदार टेक्निकल असेसमेंट तैयार किए, और फिर उन्हें एहसास हुआ कि असली मुश्किल काम तो AI के कोड स्कैन करने के बाद शुरू होता है।
आप खुद सोचिए, एक पुराना घर है जिसमें इतने सारे तार बिछे हैं कि कोई नहीं जानता कौन सा तार कहां जाता है। लेगेसी सिस्टम भी कुछ ऐसे ही होते हैं।
वे सिर्फ अलग से पड़े सॉफ्टवेयर नहीं होते, बल्कि वे पूरे बिजनेस के ऑपरेटिंग मॉडल में इतने गहराई से बुने होते हैं कि उन्हें अलग करना नामुमकिन सा लगता है। इनमें सालों के प्रोसेस डिसीजन, इंटीग्रेशन के तौर-तरीके, कंप्लायंस की जरूरतें, कस्टमर-स्पेसिफिक एक्सेप्शन और वो सारा ज्ञान छुपा होता है जो अक्सर कहीं बिखरा हुआ होता है या बस कुछ चुनिंदा लोगों को ही पता होता है।
आधुनिकीकरण 'खजाने की खोज' से भी मुश्किल क्यों है?
AI मॉडल शायद आपको बता दे कि कोई इंटीग्रेशन पॉइंट पुराना हो रहा है, या कोई एप्लीकेशन बिजनेस के लिए कितना जरूरी है। ये जानकारी काम की हो सकती है, नो डाउट।
लेकिन असली 'चैलेंज' तब शुरू होता है जब टीमें ये समझती हैं कि जिसे वो एक सीधा-साधा बदलाव समझ रहे थे, उससे कितने सारे दूसरे सिस्टम, वर्कफ्लो और ऑपरेशनल टीमें जुड़ी हुई हैं।
जैसे, आपने सोचा कि चलो, इस पुराने दरवाजे को बदलते हैं। लेकिन फिर पता चला कि उस दरवाजे से घर की आधी बिजली, पानी की पाइपलाइन और छत का एक हिस्सा जुड़ा है! अब आप क्या करेंगे? आधुनिकीकरण में भी कुछ ऐसा ही होता है।
एक छोटे से बदलाव से पूरा सिस्टम हिल सकता है।
कई बड़े संगठनों में, लेगेसी सिस्टम आज भी क्यों चल रहे हैं? इसका जवाब बड़ा ही सीधा है: क्योंकि वे काम करते हैं। भले ही उनके आस-पास का माहौल बदल गया हो, या उन्हें सपोर्ट करना मुश्किल हो गया हो, वे आज भी मुश्किल से मुश्किल हालात में भी भरोसेमंद तरीके से काम करते रहते हैं।
तो फिर आधुनिकीकरण सिर्फ टेक्नोलॉजी का खेल नहीं, क्या है?
यही वजह है कि आधुनिकीकरण को सिर्फ 'टेक्नोलॉजी एक्सरसाइज' कहना गलत होगा। ये एक 'सीक्वेंसिंग एक्सरसाइज' है, यानी किस चीज को पहले बदलना है, किसे बाद में।
ये एक 'रिस्क एक्सरसाइज' है, यानी कितने जोखिम आप उठा सकते हैं। और अगर इसे सही तरीके से किया जाए, तो यह एक बड़ा 'बिजनेस डिसीजन' होता है।
इसमें सिर्फ नया कोड लिखना या पुराने कोड को AI से स्कैन करवाना शामिल नहीं है। इसमें बिजनेस की गहरी समझ, सही योजना, जोखिमों का आकलन और सबसे महत्वपूर्ण, यह तय करना शामिल है कि यह बदलाव बिजनेस के लिए कितना फायदेमंद होगा।
कुल मिलाकर, AI भले ही हमें रास्ता दिखा दे, लेकिन उस रास्ते पर चलना और मंजिल तक पहुंचना आज भी इंसानी दिमाग और अनुभव का काम है।




































