कूच बिहार: सोचिए, आप एक मामूली सी जरूरत के लिए बैंक जाएं। मान लीजिए, आपको अपने बच्चे के लिए स्कूल के जूते खरीदने हैं, जिसके लिए सरकार से 900 रुपये की स्कॉलरशिप आनी है। आप खुशी-खुशी पास के ग्राहक सेवा केंद्र (CSC) पहुंचते हैं, अपना अकाउंट चेक करवाते हैं, और तभी आपकी आँखों के सामने एक ऐसा फिगर आता है जिसे देखकर जमीन खिसक जाए! जी हां, ऐसा ही कुछ हुआ पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले की एक सातवीं कक्षा की बच्ची सुपर्णा रॉय के साथ, जिसके अकाउंट में 900 रुपये की स्कॉलरशिप की जगह 759 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम दिखाई दी। ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत में हुई एक ऐसी घटना है जिसने पूरे इलाके में हंगामा मचा दिया है और सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोर रही है।
हल्दीबाड़ी क्षेत्र की रहने वाली सुपर्णा अपने भाई के साथ स्थानीय ग्राहक सेवा केंद्र गई थी। मकसद था, उसके खाते में आई 900 रुपये की सरकारी स्कॉलरशिप निकालना।
सुपर्णा के लिए ये रकम बहुत मायने रखती थी, क्योंकि उसके स्कूल के जूते पूरी तरह खराब हो चुके थे और इस पैसे से नए जूते खरीदने की योजना बनाई गई थी। एक बच्ची के लिए उसके स्कूल के जूते भी कितनी बड़ी खुशी हो सकते हैं, ये बात शायद बड़े शहरों में रहने वाले लोग आसानी से न समझ पाएं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसी छोटी-छोटी चीजें भी बड़े सपनों से कम नहीं होतीं।
लेकिन जब CSC कर्मचारी ने अकाउंट का बैलेंस चेक किया, तो जो नंबर स्क्रीन पर आया, उसे देखकर सभी के होश उड़ गए। खाते में कोई छोटी-मोटी रकम नहीं, बल्कि पूरे 759 करोड़ 69 लाख 51 हजार 951 रुपये (759,69,51,951) का बैलेंस चमक रहा था।
अब आप ही बताइए, भला कौन हैरान नहीं होगा? सुपर्णा, उसका भाई, और CSC कर्मचारी, सब एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे। पहले तो उन्हें लगा कि शायद सिस्टम में कोई टेक्निकल गड़बड़ी हो गई होगी, या फिर उनकी आंखों का धोखा होगा।
लेकिन बार-बार चेक करने पर भी बैलेंस वही विशालकाय रकम दिखा रहा था। इस वाकये ने सिर्फ सुपर्णा और उसके परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे हल्दीबाड़ी गांव को चौंका दिया है।
क्या वाकई खाते में थे इतने सारे पैसे और ये क्यों हुआ?
ये सवाल सबसे पहले सुपर्णा के परिवार के मन में आया। उन्होंने साफ किया कि ये पैसे उनके नहीं हैं और उन्हें इस बड़ी रकम के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि उनके खाते में इतनी बड़ी राशि हो सके। सुपर्णा के पिता केरल में मजदूरी करके परिवार का गुजारा चलाते हैं और घर की आमदनी बेहद सीमित है।
ऐसे में 900 रुपये की स्कॉलरशिप भी उनके लिए बहुत अहमियत रखती थी। लेकिन जब सामने 759 करोड़ रुपये का आंकड़ा आया, तो उनकी खुशी और हैरानी दोनों दोगुनी हो गईं।
वो समझ ही नहीं पा रहे थे कि अब क्या करें, ये अचानक इतने पैसे उनके अकाउंट में कैसे आ गए!
जाहिर है, जब ऐसी कोई अनोखी खबर फैलती है, तो लोग उसकी सच्चाई जानने को बेचैन हो जाते हैं। हल्दीबाड़ी गांव में भी यही हुआ।
देखते ही देखते, ग्राहक सेवा केंद्र पर भीड़ लगनी शुरू हो गई। हर कोई उस बच्ची और उसके अकाउंट की कहानी सुनने को उत्सुक था।
लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल थे – क्या ये पैसे किसी गलती से आ गए? क्या ये किसी बड़े फ्रॉड का मामला है, जिसमें बच्ची का अकाउंट गलती से इस्तेमाल हो गया? या फिर कोई सरकारी योजना का पैसा है जो गलत अकाउंट में चला गया? अफवाहों का बाजार गर्म था और हर कोई अपनी-अपनी राय दे रहा था।
इस पूरी घटना ने एक पल के लिए लोगों को चौंका दिया और साथ ही कई लोगों को सपने देखने पर मजबूर भी किया कि काश उनके साथ भी ऐसा हो जाए। लेकिन, सच तो ये है कि ऐसी 'गलतियां' अक्सर बड़ी उलझनें पैदा कर देती हैं।
बैंक के सिस्टम में हुई ऐसी चूक, चाहे वो मानवीय हो या तकनीकी, हमेशा बड़ी जांच का विषय बन जाती है।
बैंक और पुलिस इस रहस्य को कैसे सुलझा रहे हैं?
इस पूरे मामले की जानकारी मिलते ही बैंक अधिकारी हरकत में आ गए। उन्होंने तत्काल प्रभाव से जांच शुरू कर दी है।
बैंक प्रबंधन इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर ये इतनी बड़ी रकम कहां से और कैसे सुपर्णा के खाते में क्रेडिट हो गई। क्या इसमें बैंक के किसी कर्मचारी की गलती है, या फिर कोई सॉफ्टवेयर बग इसका जिम्मेदार है? ये सब पता लगाना बैंक के लिए एक बड़ा चैलेंज है।
इसके साथ ही स्थानीय पुलिस को भी इस घटना की सूचना दी गई है, और वे भी अपनी तरफ से मामले की छानबीन कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि की संभावना को खारिज किया जा सके।
फिलहाल, सुपर्णा रॉय का परिवार और गांव के लोग इस असमंजस में हैं कि आखिर ये क्या माजरा है। उनके लिए तो आज भी 900 रुपये की स्कॉलरशिप ही असली रकम है, जिससे सुपर्णा को नए जूते मिलने थे।
करोड़ों रुपये का ये बैलेंस उनके लिए एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। अधिकारी भी इस पहेली को सुलझाने में लगे हुए हैं।
देखना होगा कि जांच के बाद कौन सी कहानी सामने आती है और क्या ये पैसा उसी खाते में रहेगा या फिर वापस अपनी सही जगह पर चला जाएगा। यह घटना एक बार फिर बैंकिंग सिस्टम और उसकी सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े करती है, लेकिन फिलहाल इसका जवाब सिर्फ और सिर्फ जांच में छिपा है, जिसके नतीजे का इंतजार सबको है।



































