विश्व डेस्क: क्या आपने कभी सोचा है कि दो देशों की लड़ाई में तीसरा देश अचानक ऐसा क्या कर दे कि पूरी दुनिया की निगाहें उस पर टिक जाएं? अमेरिका और ईरान के बीच तो वैसे ही पुराने 'पंगे' हैं, लेकिन एक बार फिर यहां मामला गरमाया है. पिछले कुछ वक्त से लग रहा था कि शायद 'सीजफायर' से बात बन जाएगी, पर जनाब, वो खुशी ज्यादा देर टिकी नहीं. पश्चिम एशिया में तनाव फिर चरम पर है, सैन्य हमले हो रहे हैं और सबको डर है कि कहीं ये चिंगारी बड़े युद्ध की आग न बन जाए. ऐसे में एक खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. रूस ने अपना एक बेहद खास और खतरनाक विमान ईरान की तरफ भेजा है. अब सवाल ये है कि आखिर रूस इस बीच में क्यों कूदा और इस 'तबाही वाले प्लेन' का क्या माजरा है?
अमेरिका और ईरान के बीच का ये तनाव कोई नया नहीं है. सालों से दोनों देशों के रिश्ते 'नाग-नागिन' जैसे रहे हैं.
कभी शांति का झंडा लहराता है तो कभी सीधे-सीधे हमले होने लगते हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध विराम का ऐलान किया था, जिससे थोड़ी उम्मीद जगी थी कि चलो, अब सब शांत होगा.
लेकिन, जैसा कि अक्सर होता है, राजनीतिक खेल में चीजें इतनी सीधी नहीं होतीं.
रिपोर्ट्स की मानें तो सीजफायर के ऐलान के बावजूद अमेरिका ने ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों पर अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी. और फिर, जब होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग में जहाजों पर हमले हुए, तो रहा-सहा तनाव भी वापस लौट आया.
पिछले हफ्ते हुए इन हमलों के बाद हालात और भी बिगड़ गए हैं. यानी, युद्धविराम सिर्फ कागजों पर ही रह गया और माहौल फिर से गरम हो गया.
आखिर रूस ने ये विमान क्यों भेजा?
इस पूरे गर्मागर्मी के बीच, रूस ने एक ऐसा कदम उठाया है जिस पर सबकी नज़र है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने अपना स्पेशल कमांड प्लेन Tu-214PU (टीयू-214पीयू) ईरान की सरहद के करीब तैनात किया है.
ये विमान कोई आम-सा हवाई जहाज नहीं है, बल्कि किसी बड़े संकट या युद्ध जैसी स्थिति में देश की सरकार के सबसे बड़े अफसरों और सेना के टॉप कमांडर्स के लिए 'कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' का काम करता है. सोचिए, जब हालात इतने बिगड़े हुए हों कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आशंका गहरा रही हो, तब रूस का ये कदम कितना अहम हो जाता है.
यह विमान ठीक उसी वक्त तेहरान पहुंचा है, जब अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव अपने पीक पर है. जानकारों की मानें तो Tu-214PU को अक्सर अमेरिका के उन खास विमानों जैसा ही समझा जाता है, जिनका इस्तेमाल इमरजेंसी के हालात में सरकार और सेना को चलाने के लिए किया जाता है.
ये तो साफ है कि रूस सिर्फ तमाशा देखने वाला नहीं है, बल्कि वो इस पूरे खेल में अपनी भूमिका निभाना चाहता है.
रक्षा मामलों के एक्सपर्ट्स इस रूसी कदम को रूस और ईरान के बीच मजबूत रणनीतिक रिश्तों का सबूत मान रहे हैं. उनका कहना है कि ईरान में इस विमान की मौजूदगी साफ बताती है कि क्षेत्र में चाहे जितना भी तनाव हो, इन दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग एकदम ठोस है और जारी रहेगा.
इससे ईरान को भी एक तरह का सपोर्ट मिलता है और रूस पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करता है.
क्या है ये 'कयामत का प्लेन' Tu-214PU?
अब बात करते हैं इस खास विमान की, जिसे 'डूम्सडे प्लेन' भी कहते हैं. Tu-214PU कोई सामान्य यात्री विमान नहीं है, बल्कि ये रूस के Tupolev Tu-214 यात्री विमान का एक स्पेशल मिलिट्री और कमांड वर्जन है.
इसे अनौपचारिक तौर पर 'डूम्सडे प्लेन' यानी 'कयामत का प्लेन' कहा जाता है, क्योंकि इसे संकट या युद्ध जैसी आपात स्थितियों में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है.
सोचिए, ये विमान रूस के राष्ट्रपति और देश के दूसरे बड़े अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है. इसमें लेटेस्ट कम्युनिकेशन और कमांड सिस्टम लगाए गए हैं.
इनकी मदद से बड़े से बड़े अधिकारी हवा में रहते हुए भी सरकार और सेना के सारे कामकाज को संभाल सकते हैं. यानी, जमीन पर चाहे कुछ भी हो रहा हो, आसमान में बैठे ये अधिकारी पूरे देश का कंट्रोल अपने हाथ में रख सकते.
ये सिर्फ एक उड़ने वाला कंट्रोल रूम नहीं, बल्कि एक सुरक्षित ठिकाना है जहां से किसी भी मुश्किल घड़ी में देश को चलाया जा सकता है.
इस विमान के नाम में जो 'PU' लगा है, उसका रूसी भाषा में मतलब होता है 'उड़ता हुआ कमांड पोस्ट'. बाहर से देखने में ये बिल्कुल आम यात्री विमान जैसा लगता है, लेकिन अंदर से ये पूरी तरह से अलग और बेहद सुरक्षित कमांड सेंटर है.
इसमें एकदम नए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और खास उपकरण फिट किए गए हैं. इनका मकसद यही है कि किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित तरीके से कमांड और नियंत्रण का काम जारी रखा जा सके.
एक तरह से कहें तो ये चलता-फिरता हेडक्वार्टर है, जो किसी भी बड़ी आपदा में देश के नेतृत्व को सुरक्षित रखने और फैसले लेने में मदद करता है.
ये दिखाता है कि रूस अपनी सैन्य शक्ति और रणनीतिक तैयारी को लेकर कितना गंभीर है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान इस तरह के 'डूम्सडे प्लेन' की तैनाती दुनिया को एक कड़ा संदेश देती है कि रूस इस खेल का अहम खिलाड़ी है.
अब देखना होगा कि पश्चिम एशिया की इस 'जंग' में रूस की ये चाल क्या रंग लाती है. क्या ये तनाव को और बढ़ाएगी या फिर किसी नई कूटनीति की शुरुआत होगी, ये तो वक्त ही बताएगा.







































