बैंकॉक: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक, जो अपनी चकाचौंध भरी रात की ज़िंदगी और धमाकेदार पार्टीज़ के लिए दुनियाभर में मशहूर है, पिछले रविवार (12 जुलाई) की देर रात एक ऐसी भयानक त्रासदी का गवाह बन गई, जिसने सबकी रूह कंपा दी। एक पल पहले तक जहां युवा मस्ती में झूम रहे थे और लाइव म्यूजिक की धुन पर थिरक रहे थे, अगले ही पल वो जगह चीखों, धुएं और मौत के तांडव से भर गई। बात हो रही है चातुचक जिले के 'रोंग बीयर ना लात फ्राओ' (Rong Beer Na Lat Phrao) नाम के एक जाने-माने लाइव म्यूजिक पब की, जहां लगी भीषण आग ने कम से कम 27 जिंदगियां छीन लीं और 63 लोगों को अस्पतालों तक पहुंचा दिया। यह घटना देश के मनोरंजन स्थलों पर हुए सबसे भयावह अग्निकांडों में से एक है, जिसने बैंकॉक के नाइटलाइफ को एक गहरा दाग दे दिया है।
रात के ठीक 11:57 बजे का वक्त था। पब में चारों ओर हंसी-खुशी का माहौल था।
लोग अपने दोस्तों के साथ वीकेंड का मज़ा ले रहे थे, तभी अचानक से एक झटके ने सब कुछ बदल दिया। शुरुआत स्टेज के पास लगे एक सर्किट ब्रेकर से हुई, जहां से हल्का धुआं उठना शुरू हुआ।
किसी ने सोचा भी नहीं था कि ये मामूली धुआं कुछ ही पलों में मौत का पैगाम बन जाएगा।
आखिर हुआ क्या था उस रात?
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें, तो पहले बिजली गुल हुई और फिर एक जोरदार धमाका हुआ। जैसे ही धमाका हुआ, पब में मौजूद लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया।
आंखों के सामने अंधेरा छा गया और देखते ही देखते पूरा पब घने, काले धुएं से भर गया। ये धुआं इतना घना था कि लोगों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
जो जहां था, वहीं फंसता चला गया। एक बैंड सदस्य ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, "धमाके के बाद कुछ भी दिख नहीं रहा था।
हर तरफ सिर्फ धुआं ही धुआं था। लोग फर्श पर गिरे हुए थे और मदद के लिए चीख रहे थे।
" ये मंज़र सोचकर ही दिल दहल उठता है। जो लोग कुछ देर पहले गाने गा रहे थे, वो अब अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
मौत का धुंआ और अफरा-तफरी का माहौल
घने धुएं ने लोगों की जान बचाना और भी मुश्किल कर दिया। अक्सर ऐसा होता है कि जब ऐसी कोई घटना होती है, तो लोगों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिलता।
इस पब में भी ठीक ऐसा ही हुआ। कई लोग घबराहट में गलत दिशा में भागने लगे।
लाओस के एक पर्यटक, कान कुटिरात, जो उस रात पब में मौजूद थे, उन्होंने बताया कि उन्होंने स्टेज के पास धुआं देखा और अगले ही पल पूरे पब में चीख-पुकार मच गई। उन्होंने बाद में सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए लिखा, "मैं सिर्फ एक व्यक्ति को ही बाहर निकाल पाया।
मैंने पूरी कोशिश की, लेकिन और कुछ नहीं कर सका। मुझे माफ कर देना।
" उनके इन शब्दों से उस रात की भयावहता और लाचारी साफ झलकती है। हर कोई अपनी जान बचाने की जुगत में था, लेकिन धुएं और अफरा-तफरी ने सबको एक तरह से अंधा कर दिया था।
बाथरूम में क्यों मिले इतने शव?
प्रधानमंत्री अनुटिन चार्नवीराकुल ने घटना स्थल का दौरा किया और 27 शवों की बरामदगी की पुष्टि की। उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि आग लगने के बाद अधिकांश लोग घबराकर इमारत के पिछले हिस्से में स्थित बाथरूम की ओर भागे।
लेकिन अफसोस! वहां बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं था। बैंकॉक के गवर्नर चदचार्ट सिट्टिपुंट ने भी इस बात पर जोर दिया कि कई शव फायर एग्जिट के पास मिले हैं।
यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या आपातकालीन निकास रास्ते ब्लॉक थे? इसकी जांच की जा रही है। अगर ऐसा था, तो यह एक बड़ी लापरवाही है, जिसकी कीमत कई बेगुनाह जिंदगियों ने चुकाई है।
दमकलकर्मियों के लिए भी यह बचाव अभियान एक बड़ा चैलेंज था। घना धुआं, अंधेरा और अंदर रखी मेज-कुर्सियां, ये सब रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी रुकावटें पैदा कर रहे थे।
दमकलकर्मियों ने लगभग आधे घंटे में आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन तब तक पूरा परिसर जानलेवा धुएं से भर चुका था और अंदर फंसे लोग दम घुटने से या भगदड़ में अपनी जान गंवा चुके थे। बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन के आपदा रोकथाम और शमन विभाग के निदेशक सुरियाचाई राविवन ने बताया कि मरने वालों की संख्या 27 पर स्थिर हो गई है, लेकिन 63 घायल लोगों में से 22 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और डॉक्टर्स उन्हें बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
अधिकारियों ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों और किसी भी तरह की लापरवाही की गहन पड़ताल की जा रही है।
बैंकॉक के इस हादसे ने एक बार फिर रात की पार्टियों और मनोरंजन स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उम्मीद है कि इस जांच से सच सामने आएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता कदम उठाए जाएंगे, ताकि कोई और पब इस तरह मौत का कुआं न बने।






































