राष्ट्रीय डेस्क: दुनिया भर में डिफेंस सेक्टर में क्या कुछ नया चल रहा है, इस पर सबकी नज़र रहती है। अब अमेरिका ने एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़ खींच लिया है। बात ये है कि अमेरिकी रक्षा विभाग, यानी पेंटागन, ने यूक्रेन से सीधे-सीधे 2000 F10 अटैक ड्रोन खरीदे हैं। ये कोई छोटी-मोटी डील नहीं, बल्कि यूक्रेन के लिए एक गेमचेंजर मानी जा रही है। ये पहला मौका है जब यूक्रेन ने अपनी ज़मीन पर बने पूरी तरह से असेंबल कॉम्बैट ड्रोन किसी दूसरे देश को एक्सपोर्ट किए हैं।
ये डील अमेरिकी पेंटागन के अरबों डॉलर वाले 'ड्रोन डोमिनेंस' प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका मकसद ड्रोन टेक्नोलॉजी में अमेरिका की बादशाहत कायम करना है। इस कदम से अमेरिकी सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स में भी थोड़ी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि पारंपरिक घरेलू सप्लायर्स से इतर जाकर अमेरिका ने यूक्रेन जैसे देश से इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन लिए हैं।
तो आखिर क्या है ये 'ड्रोन डोमिनेंस' प्रोग्राम और यूक्रेन के लिए क्यों खास है ये डील?
बता दें कि पेंटागन काफी समय से 'ड्रोन डोमिनेंस' नाम के एक बड़े इनिशिएटिव पर काम कर रहा है। इस प्रोग्राम का कुल बजट 1.1 बिलियन डॉलर से ज़्यादा का है।
इसका सीधा-सा मकसद अपनी और अपने सहयोगी देशों की अनमैन्ड कैपेबिलिटीज यानी मानवरहित क्षमताओं को और मजबूत करना है। इसमें नए-नए ड्रोन खरीदना, उनकी टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करना और युद्ध में उनके इस्तेमाल को बेहतर बनाना शामिल है।
इसी प्रोग्राम के तहत शुरुआती फेज में F-Drones नाम की यूक्रेनी कंपनी को पेंटागन का कॉन्ट्रैक्ट मिला, जिसके बाद ये 2000 F10 अटैक ड्रोन अमेरिका तक पहुंचे हैं।
असल में, यूक्रेन के लिए ये निर्यात इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले जो भी परमिट जारी होते थे, वो ज़्यादातर ड्रोन से जुड़ी टेक्नोलॉजी, उनके कंपोनेंट्स या फिर एक्सेसरीज के लिए ही होते थे। ये पहली बार है जब युद्ध से जूझ रहे यूक्रेन ने अपने यहाँ बने पूरे असेंबल कॉम्बैट ड्रोन किसी दूसरे देश को भेजे हैं।
ये दर्शाता है कि यूक्रेन अब न केवल अपनी रक्षा कर रहा है, बल्कि डिफेंस प्रोडक्शन में भी एक ग्लोबल प्लेयर के तौर पर उभर रहा है।
कब मिली हरी झंडी और कैसे हुए ये ड्रोन पार?
इस पूरी डील को हरी झंडी 1 जुलाई 2026 को मिली। यूक्रेन की स्टेट सर्विस फॉर एक्सपोर्ट कंट्रोल ने इस तारीख को परमिट जारी किया था।
इसके बाद F-Drones कंपनी को ये इजाज़त मिल गई कि वो F10 ड्रोन की अपनी खेप अमेरिकी धरती पर भेज सके। कंपनी के एक रिप्रेजेंटेटिव ने इस बात की पुष्टि की है कि परमिट मिलते ही, बिना किसी देरी के, ड्रोन ने बॉर्डर पार कर लिया था।
यानी, कागज़ात पूरे हुए और तुरंत ड्रोन अमेरिका के पास पहुंच गए।
इसमें एक और दिलचस्प बात ये है कि F-Drones ने ये बताया है कि ये मंज़ूरी तब मिली, जब मार्शल लॉ के तहत सैन्य निर्यात को आसान बनाने वाले नए सरकारी नियम अभी औपचारिक रूप से लागू नहीं हुए थे। मतलब, कंपनी ने मौजूदा निर्यात कंट्रोल सिस्टम के तहत ही पूरा अप्रूवल साइकिल कंप्लीट किया।
ये दिखाता है कि यूक्रेन का सिस्टम कितना चुस्त और दुरुस्त है, खासकर ऐसे मुश्किल वक्त में।
यूक्रेन का ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा सपना
आपको शायद पता न हो, लेकिन यूक्रेन की सरकार ने एक बड़ा लक्ष्य रखा है। वो दुनिया का सबसे बड़ा ड्रोन और रोबोट निर्माता बनना चाहता है।
इस डील के ज़रिए वो इस सपने की तरफ़ एक और कदम आगे बढ़ गया है। जंग के मैदान में ड्रोन की अहमियत यूक्रेन ने खूब समझी है और यही वजह है कि वो खुद को इस सेक्टर में सुपरपावर बनाना चाहता है।
F10 ड्रोन जैसी चीज़ें उनकी इस महत्वाकांक्षा को पूरा करने में मदद करेंगी।
हालांकि, इस पूरी बातचीत में एक यूक्रेनी यूएवी एक्सपर्ट की चेतावनी भी ध्यान देने लायक है। उनका कहना है कि अमेरिकी ऑफ-द-शेल्फ ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) में शायद टिक नहीं पाएंगे, और हर यूनिट के पास अपनी खुद की ड्रोन प्रयोगशाला होनी चाहिए।
ये बात भले ही सीधे तौर पर F10 डील से न जुड़ी हो, लेकिन ये ज़रूर दिखाती है कि ड्रोन टेक्नोलॉजी कितनी तेज़ी से बदल रही है और इसमें हमेशा नए चैलेंजेस सामने आते रहते हैं। लेकिन फिलहाल के लिए, अमेरिका और यूक्रेन के बीच ये 2000 F10 अटैक ड्रोन की डील एक बड़ी खबर है, जो डिफेंस सेक्टर में कई नए समीकरण बनाती दिख रही है।
ये डील न केवल अमेरिका की सैन्य ताकत को बढ़ाएगी, बल्कि यूक्रेन के लिए भी आर्थिक और रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। इससे ये संदेश भी जाता है कि यूक्रेन, युद्ध के बीच भी, अपनी औद्योगिक क्षमता को बनाए रखने और आगे बढ़ाने में सक्षम है।
कुल मिलाकर, ये एक ऐसा कदम है जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।





































