बेंगलुरु: सोचिए, आप एक शहर में हों और आपको अपने एयरपोर्ट तक पहुंचने में उतना ही या उससे ज़्यादा वक्त लगे, जितना उस एयरपोर्ट से 2000 किलोमीटर दूर किसी दूसरे शहर तक हवाई जहाज से जाने में लगता है? जी हां, ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि बेंगलुरु की एक हकीकत है, जिसने इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब हंगामा मचा रखा है और लोगों को माथा खुजाने पर मजबूर कर दिया है। शहर के जाने-माने फाइनेंस इन्फ्लुएंसर मनीष कुमार सिंह के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है और लोग इस पर जमकर चटकारे ले रहे हैं।
मनीष को कोलकाता जाना था। वो अपने घर, जो कि एचएसआर लेआउट में है, से निकले और बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ अपनी गाड़ी दौड़ा दी।
इस सफर के दौरान ही उनके दिमाग में एक बात खटकी और उन्होंने तुरंत अपना फोन निकालकर एक वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। इस वीडियो में उन्होंने जो कहा, वो अब बेंगलुरु के ट्रैफिक सिस्टम और शहर की प्लानिंग पर सवालिया निशान लगा रहा है।
उनका यह अनुभव सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि एक बड़े शहरी चैलेंज की झलक है, जिससे हर रोज़ हज़ारों लोग जूझते हैं।
कोलकाता की उड़ान से लंबा एयरपोर्ट का सफर, क्या ये मज़ाक है?
मनीष कुमार सिंह ने अपने वीडियो में सीधा सवाल पूछा, "मैं आप लोगों के साथ एक दिलचस्प बात शेयर करना चाहता हूं। इसे सुनकर शायद आप भी हंस पड़ेंगे।
बैंगलोर शहर से एयरपोर्ट पहुंचने में करीब 2.5 से 3 घंटे लग जाते हैं, जबकि बेंगलुरु से कोलकाता की फ्लाइट सिर्फ 2 घंटे 20 मिनट में पहुंचा देती है।" अब सोचिए, करीब 40 किलोमीटर का सफर तय करने में जहां ढाई से तीन घंटे लग जाएं, वहीं 2000 किलोमीटर की हवाई यात्रा मात्र सवा दो घंटे में पूरी हो जाए।
ये तो हद ही हो गई!
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "आप ही बताइए, क्या किसी शहर की प्लानिंग ऐसी होनी चाहिए कि एयरपोर्ट पहुंचने में ही इतना समय लग जाए? मैंने न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे बड़े शहर भी देखे हैं। वहां भी आबादी और ट्रैफिक है, लेकिन एयरपोर्ट तक पहुंचने में इतना वक्त नहीं लगता।
मेरे हिसाब से यह हमारे देश की सिटी प्लानिंग की एक बड़ी कमी है।" मनीष की ये बात कई लोगों के गले उतर रही है, खासकर उन लोगों के जो बेंगलुरु के ट्रैफिक से रोज़ दो-चार होते हैं और घंटों सड़कों पर फंसे रहते हैं।
उनकी यह बात बिलकुल सटीक बैठती है, जब शहर के बुनियादी ढांचे पर सवाल उठते हैं।
अच्छी कनेक्टिविटी क्यों नहीं, सिर्फ एयरपोर्ट बना देने से काम चलेगा?
मनीष ने अपने वीडियो में इस मुद्दे की जड़ पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में एयरपोर्ट शहर से काफी दूर बनाए जाते हैं, इसमें कोई नई बात नहीं है।
लेकिन, वहां तक पहुंचने के लिए बेहतरीन सड़कें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ऐसा शानदार सिस्टम होता है कि लोग 30 से 40 मिनट में आराम से एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं। उनके मुताबिक, असली समस्या एयरपोर्ट का दूर होना नहीं, बल्कि वहां तक पहुंचने के लिए बेहतर और तेज़ कनेक्टिविटी का न होना है।
यही वो पेंच है, जो बेंगलुरु जैसे शहर को पीछे खींच रहा है।
उन्होंने इस बात को और मजबूती से समझाने के लिए देश में बन रहे नए एयरपोर्ट्स का उदाहरण दिया। उन्होंने नोएडा और नवी मुंबई एयरपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, "सबसे पहले अच्छी ट्रैफिक व्यवस्था और बेहतर सिटी प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए।
पहले एयरपोर्ट बना देना और बाद में उसकी कनेक्टिविटी के बारे में सोचना सही तरीका नहीं है।" उनकी बात में दम तो है, आखिर कोई भी बड़ी योजना बनाने से पहले उसके आस-पास के इंफ्रास्ट्रक्चर पर सोचना कितना ज़रूरी है, ये सब जानते हैं।
शहर का विकास सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतों से नहीं, बल्कि लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को आसान बनाने से होता है।
वायरल वीडियो पर पब्लिक का क्या रिएक्शन है?
मनीष कुमार सिंह ने अपने वीडियो के कैप्शन में साफ-साफ लिखा, "हमारी सिटी प्लानिंग पूरी तरह गड़बड़ है। शहर लोगों की समस्याएं कम करने के बजाय कई बार उन्हें और बढ़ा रहे हैं।
" और बस, ये वीडियो अपलोड होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हजारों लोगों ने इसे देखा, शेयर किया और अपनी-अपनी राय रखी।
कमेंट सेक्शन में तो मानो बेंगलुरु के ट्रैफिक से जूझ रहे लोगों का दर्द उमड़ पड़ा। लोग अपनी आपबीती सुनाने लगे और सिस्टम पर गुस्सा निकालने लगे।
एक यूजर ने लिखा, "मैं तो बेंगलुरु में ही रहता हूं, मुझे हर बार एयरपोर्ट जाने से पहले एक दिन की छुट्टी लेनी पड़ती है।" वहीं, दूसरे ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा, "लगता है बेंगलुरु वाले अब अपनी कारें लेकर उड़ना शुरू कर देंगे।
" कई लोगों ने सरकार और नगर निगम से इस समस्या पर तुरंत ध्यान देने की अपील की। कुल मिलाकर, मनीष कुमार सिंह ने सिर्फ अपनी परेशानी नहीं बताई, बल्कि बेंगलुरु के लाखों लोगों की नब्ज पकड़ ली और उनकी आवाज बनकर सामने आए।
अब देखना ये है कि इस वायरल वीडियो के बाद प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितना ध्यान देता है और क्या आने वाले समय में बेंगलुरु के लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में फ्लाइट से कम समय लगेगा? यह सवाल हर उस बेंगलुरुवासी के मन में है, जो रोज़ इस ट्रैफिक में फंसा रहता है।






































