दिल्ली: भारती एयरटेल... ये नाम सुनते ही आपके दिमाग में क्या आता है? शायद तेज़ 5G इंटरनेट, शानदार कॉलिंग या फिर वो दमदार नेटवर्क जो देश के कोने-कोने तक पहुंचता है। लेकिन कहानी सिर्फ यहीं तक नहीं है। पिछले दस सालों में एयरटेल ने अपनी डिजिटल दुनिया को मजबूत करने के लिए ₹3.3 लाख करोड़ से ज़्यादा का मोटा-मोटा निवेश कर दिया है। ये निवेश सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि कंपनी की आगे की बड़ी सोच का हिस्सा है।
अब भारती एयरटेल ने अपने अगले दशक के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। इस प्लान के तहत तीन ऐसे नए 'इंजन' तैयार किए गए हैं, जिन पर कंपनी को पूरा भरोसा है कि ये एयरटेल को आगे की रेस में सबसे आगे रखेंगे।
कंपनी का कहना है कि उन्होंने पिछले दशक में ताबड़तोड़ निवेश किया है और अब इसका फल मिलने का वक्त आ गया है।
तो आखिर किन तीन क्षेत्रों पर है एयरटेल का सबसे ज़्यादा भरोसा?
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल का कहना है कि अब कंपनी का पूरा फोकस तीन खास सेक्टर्स पर है। ये हैं फाइनेंशियल सर्विसेज़ (वित्तीय सेवाएं), डेटा सेंटर और क्लाउड।
मित्तल साहब का कहना है कि यही वो क्षेत्र हैं जो कंपनी की ग्रोथ के अगले बड़े पिलर बनेंगे और यहां सफलता पक्की है।
कंपनी की सालाना रिपोर्ट में ये बात साफ तौर पर सामने आई है कि एयरटेल अपने Airtel Money (एयरटेल मनी) में ₹20 हजार करोड़ तक के निवेश का ऐलान कर चुकी है। इसके साथ ही, कंपनी अपने डेटा सेंटर बिजनेस, जिसका नाम Nxtra (नेक्स्ट्रा) है, उसे भी बड़े लेवल पर फैला रही है।
कुल मिलाकर, एयरटेल ने अपनी रणनीति को बहुत सोच-समझकर तैयार किया है।
कैसे फाइनेंशियल सर्विसेज़ बनेगा अगला ग्रोथ इंजन?
सालाना रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि एयरटेल मनी को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक बड़ी मंजूरी मिल गई है। इसे नॉन-डिपॉजिट टेकिंग नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर काम करने की हरी झंडी मिल चुकी है।
सुनील मित्तल के मुताबिक, देश में फाइनेंशियल इनक्लूजन का दायरा बढ़ाने के लिए ये एक बहुत ही अहम पड़ाव है।
कंपनी का मानना है कि आने वाले सालों में एयरटेल मनी में जैसी भी पूंजी की जरूरत होगी, उसे लगाया जाएगा। इसका मतलब साफ है कि एयरटेल इस क्षेत्र में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
आप सोचिए, जब एक टेलीकॉम कंपनी फाइनेंशियल सर्विसेज़ में इतना बड़ा दांव लगा रही है, तो इसका मतलब है कि वो सिर्फ कॉलिंग और डेटा से आगे बढ़कर एक पूरा इकोसिस्टम तैयार कर रही है।
डेटा सेंटर Nxtra में क्या चल रहा है बड़ा खेल?
अब बात करते हैं कंपनी के डेटा सेंटर बिजनेस Nxtra की। हाल ही में इस बिजनेस ने $100 करोड़ (जो लगभग ₹9500 करोड़ के बराबर है) जुटाए हैं।
इतनी बड़ी रकम जुटाने के बाद Nxtra अगले कुछ सालों में 1 गीगावाट की कैपेसिटी बनाने की राह पर है। ये कोई छोटी बात नहीं है!
सालाना रिपोर्ट बताती है कि इस बिजनेस को देश में तेज़ी से बढ़ रहे डिजिटाइजेशन (डिजिटलीकरण), क्लाउड के बढ़ते इस्तेमाल और डेटा लोकलाइज़ेशन (डेटा को देश में ही स्टोर करने की जरूरत) से ज़बरदस्त सपोर्ट मिल रहा है। जैसे-जैसे देश में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है, हर छोटी-बड़ी कंपनी को अपने डेटा को सुरक्षित और लोकल सर्वर पर रखने की जरूरत पड़ रही है।
यहीं पर Nxtra जैसा डेटा सेंटर एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
और Airtel Cloud कैसे दे रहा है टक्कर?
कंपनी का तीसरा ग्रोथ इंजन है Airtel Cloud (एयरटेल क्लाउड)। सुनील मित्तल का कहना है कि शुरुआत में इसे बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।
वो बताते हैं कि ये देश की उभरती हुई जरूरतों को पूरा कर रहा है और ग्राहकों को कम खर्च में वर्ल्ड क्लास क्लाउड सर्विस दे रहा है, जिसे देश में ही होस्ट और स्टोर किया जा रहा है।
आजकल हर बिज़नेस, छोटे से छोटा हो या बड़े से बड़ा, अपने डेटा और एप्लीकेशन को क्लाउड पर ले जा रहा है। ऐसे में लोकल और भरोसेमंद क्लाउड सर्विस की डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है।
सुनील मित्तल के मुताबिक, एयरटेल ने अपनी क्लाउड सर्विस के लिए 24 से ज़्यादा कस्टमर डील भी पक्की कर ली हैं। ये दिखाता है कि कंपनी ने मार्केट में अपनी जगह बना ली है।
मित्तल साहब का मानना है कि क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रा को सपोर्ट करने वाली सरकारी पॉलिसीज से निवेश में तेज़ी आने और पूरे इकोसिस्टम के मजबूत होने की उम्मीद है। सरकार ने इन क्षेत्रों में लॉन्ग-टर्म की टैक्स छूट देकर कंपनियों को निवेश करने के लिए और बढ़ावा दिया है।
कुल मिलाकर, एयरटेल अब सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं, बल्कि एक कंप्लीट डिजिटल इकोसिस्टम बनने की राह पर है।




































