पटना: कभी-कभी एक छोटी सी मदद किसी की जिंदगी में इतना बड़ा बदलाव ला देती है कि वो सिर्फ मदद नहीं, एक उम्मीद बन जाती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक दिल छू लेने वाली कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा है। कहानी एक जोमैटो डिलीवरी पार्टनर और एक ग्राहक की है, जहां ग्राहक ने सिर्फ अपना खाना नहीं लिया, बल्कि डिलीवरी करने आए शख्स की परेशानी को समझा और ऐसा कुछ कर दिया, जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की होगी।
यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है जो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रही है। लोगों को ये किस्सा इंसानियत की एक शानदार मिसाल लग रहा है और जिस शख्स ने ये कदम उठाया है, उसकी जमकर तारीफ हो रही है।
एक आम से खाने के ऑर्डर के पीछे छिपी ये कहानी बताती है कि कैसे संवेदनशीलता और सही समय पर की गई मदद किसी की दुनिया बदल सकती है।
डिलीवरी पार्टनर की आंखों में आंसू क्यों थे?
यह पूरा किस्सा एक्स (पहले ट्विटर) यूजर अंकित पांडेय ने अपनी पोस्ट में शेयर किया। अंकित ने बताया कि उन्होंने जोमैटो से खाना ऑर्डर किया था और डिलीवरी लेकर जो शख्स उनके घर आया, वो पहले भी कई बार आ चुका था।
मतलब दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह अंजान नहीं थे।
खाना देने के बाद डिलीवरी पार्टनर ने थोड़ी झिझक के साथ अंकित से पूछा, “भैया, क्या एक गिलास पानी मिल सकता है?” अंकित ने उसे बिना देर किए घर के अंदर बुलाया और पानी दिया। पानी पीते हुए जब अंकित की नजर डिलीवरी पार्टनर पर पड़ी, तो उन्होंने देखा कि उसकी आंखें लाल थीं, जैसे वो काफी देर से रो रहा हो।
इंसानियत का तकाजा था कि उसकी परेशानी पूछी जाए। अंकित ने जब पूछा तो उसने जो बताया, वो सुनकर कोई भी हिल जाता।
मां ICU में थी, और वो बेबस?
डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि उसकी मां सुबह सीढ़ियों से गिर गई थीं और उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें ICU में भर्ती कराया गया है। उसकी आवाज में दर्द और आंखों में बेबसी साफ झलक रही थी।
उसकी सबसे बड़ी चिंता ये थी कि उसे अपने गांव जाना था, जहां उसकी मां अस्पताल में थीं। लेकिन मुश्किल ये थी कि गांव के लिए ट्रेन रात 11 बजे की थी और सफर में करीब 30 घंटे लगने वाले थे।
उसने अंकित को बताया कि उसे डर लग रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि वो समय पर अपनी मां से मिल ही न पाए। सोचिए, एक तरफ मां जिंदगी और मौत से जूझ रही है और दूसरी तरफ बेटा मीलों दूर, एक-एक पल काट रहा है, बस डिलीवरी करके कुछ पैसे जुटाने की कोशिश में।
ग्राहक ने सिर्फ खाना नहीं, फ्लाइट का टिकट भी क्यों बुक कराया?
अंकित पांडेय ने जब उसकी ये दास्तान सुनी, तो उनका दिल पसीज गया। उन्होंने सबसे पहले उससे पूछा कि क्या उसने कुछ खाया है।
डिलीवरी पार्टनर ने इनकार किया तो अंकित ने वही खाना उसे खाने के लिए दिया, जो वो डिलीवर करने आया था। ये पहला छोटा सा कदम था, जो उस वक्त उसके लिए बहुत मायने रखता था।
लेकिन अंकित सिर्फ इतने पर नहीं रुके। उन्होंने बिना सोचे-समझे, बिना किसी देरी के करीब 4 हजार रुपये की फ्लाइट टिकट उसके लिए बुक कर दी।
उनका मकसद साफ था – वो जल्द से जल्द अपनी मां के पास पहुंचे। 30 घंटे के ट्रेन के सफर को चंद घंटों में समेट दिया गया, ताकि वो अपने सबसे मुश्किल वक्त में अपनी मां के साथ हो।
पहली बार हवाई सफर का डर कैसे दूर किया गया?
जब अंकित ने उसे बताया कि उसने फ्लाइट टिकट बुक कर दी है, तो डिलीवरी पार्टनर की खुशी और राहत की कोई सीमा नहीं थी। लेकिन साथ ही उसे एक और टेंशन हो गई।
उसने बताया कि वो पहली बार फ्लाइट में बैठने वाला है और उसे एयरपोर्ट की प्रक्रियाओं को लेकर थोड़ा डर लग रहा है।
यहां भी अंकित ने उसका साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने उसे भरोसा दिलाया कि घबराने की कोई बात नहीं है।
एयरपोर्ट पर उनका एक दोस्त उसकी मदद के लिए तैयार रहेगा। अंकित ने अपने दोस्त से बात की और सारी व्यवस्था कर दी, ताकि डिलीवरी पार्टनर बिना किसी परेशानी के अपनी मां के पास पहुंच सके।
कुछ ही घंटों बाद, वो डिलीवरी पार्टनर, जो कुछ देर पहले अपनी आंखों में आंसू लिए ट्रेन के लंबे सफर की चिंता कर रहा था, हवाई जहाज से अपनी मां के पास पहुंच गया।
मां की तबीयत अब कैसी है?
कुछ दिनों बाद डिलीवरी पार्टनर ने अंकित को फोन करके बताया कि उसकी मां की हालत अब पहले से बेहतर है। डॉक्टरों ने बताया है कि कुछ दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।
ये खबर अंकित के लिए भी उतनी ही सुकून देने वाली थी जितनी उस बेटे के लिए।
डिलीवरी पार्टनर ने फोन पर अंकित को 4 हजार रुपये वापस करने की कोशिश की, जो उन्होंने फ्लाइट टिकट के लिए दिए थे। लेकिन अंकित ने पैसे लेने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि वो रकम अपनी मां के इलाज और देखभाल पर खर्च करे। ये एक ऐसी कहानी है, जो दिखाती है कि आज भी दुनिया में इंसानियत जिंदा है और एक छोटी सी मदद किसी की जिंदगी में कितना बड़ा फर्क ला सकती है।




































