दिल्ली: एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत का मामला फिर सुर्खियों में है। ये वो केस है, जिसकी गुत्थी सुलझाने में सीबीआई लगी है और अब दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम ने एक ऐसी रिपोर्ट दी है, जिसने कई नए सवालों के जवाब दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद केस में एक बड़ा मोड़ आ गया है। आखिर क्या है ये रिपोर्ट और सीबीआई को इसमें क्या मिला है, चलिए पूरी कहानी समझते हैं।
मामला कुछ यूं है कि ट्विशा शर्मा की मौत के बाद जो जांच चल रही थी, उसमें एम्स के मेडिकल बोर्ड ने अपनी आखिरी फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। ये रिपोर्ट बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें उन सबूतों पर मुहर लगी है, जो सीबीआई पहले से ढूंढ रही थी।
रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि जिस जिम्नास्टिक्स बेल्ट को कथित तौर पर फंदा बनाने में इस्तेमाल किया गया था, उस पर मिले स्किन टिश्यू यानी त्वचा के बेहद छोटे कण ट्विशा की गर्दन पर मिले चोट के निशानों से पूरी तरह मेल खाते हैं।
कल्पना कीजिए, एक बेल्ट पर इतने छोटे कण मिले, जिन्हें फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने इतनी बारीकी से जांचा और पाया कि वे वही थे, जो मृतक की गर्दन पर बने चोट और गला घोंटने के निशानों से मिलते हैं। ये कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि एक बड़ा वैज्ञानिक सबूत है।
तो इस रिपोर्ट के बाद सीबीआई का अगला कदम क्या है?
इस रिपोर्ट के आने के बाद सीबीआई की तरफ से हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसी अब पूर्व न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह से हिरासत में पूछताछ की मांग कर रही है।
सीबीआई का मानना है कि इस रिपोर्ट के आधार पर दोनों से कड़ाई से पूछताछ करना बहुत जरूरी है। बता दें कि एजेंसी ने इन दोनों की जमानत का भी जमकर विरोध किया है और उन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
आखिर आरोप क्या हैं, ये जानना भी जरूरी है।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि ट्विशा शर्मा को शादी के बाद से ही लगातार दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था। उन्हें मानसिक तौर पर इतना टॉर्चर किया गया कि शायद उसकी कल्पना भी मुश्किल है।
लेकिन मामला सिर्फ यहीं तक नहीं रुकता। सीबीआई का दावा है कि ट्विशा की मौत से करीब एक हफ्ते पहले, उनका जबरन गर्भपात (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) भी कराया गया था।
सोचिए, एक तरफ मानसिक प्रताड़ना और दूसरी तरफ ऐसा गंभीर आरोप।
इसके साथ ही, सीबीआई ने ये भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक और दूसरे अहम सबूतों को जानबूझकर मिटाया गया या उनसे छेड़छाड़ की गई। सबूतों को नष्ट करने का आरोप अपने आप में बहुत गंभीर होता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर न्याय प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश है।
गला घोंटने में इस्तेमाल हुई चीज की पहचान कैसे होती है, ये जानते हैं?
चलिए, थोड़ा फोरेंसिक साइंस की दुनिया में चलते हैं और समझते हैं कि ऐसे मामलों में जांच कैसे होती है। जब किसी मौत में फांसी या गला घोंटने का शक होता है, तो फोरेंसिक विशेषज्ञ और मेडिकल बोर्ड कई वैज्ञानिक तरीकों से जांच करते हैं।
सबसे पहले, वे मृतक की गर्दन पर बने चोट के निशानों को बहुत बारीकी से नापते हैं। इसमें निशान की चौड़ाई, गहराई और उसका आकार शामिल होता है।
हर एक छोटी सी डिटेल को नोट किया जाता है।
इसके बाद, इन निशानों का मिलान उस संदिग्ध वस्तु से किया जाता है, जिससे गला घोंटने की आशंका होती है। ये कोई बेल्ट हो सकती है, रस्सी हो सकती है, या कोई और चीज।
जैसे इस केस में जिम्नास्टिक्स बेल्ट। जांच के दौरान एक्सपर्ट्स यह भी देखते हैं कि गर्दन पर कोई खास निशान मौजूद हैं या नहीं।
जैसे किसी धातु की रिंग का निशान, बकल का निशान, या कपड़े और फाइबर की बनावट के निशान। इन सभी सबूतों को मिलाकर ही यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि आखिर गला घोंटने के लिए किस चीज का इस्तेमाल हुआ था।
ये सब इतना बारीक काम होता है कि एक छोटी सी गलती पूरे केस को पलट सकती है।
टिश्यू की जांच से क्या पता चलता है?
बात सिर्फ निशानों तक नहीं रुकती, बल्कि टिश्यू की जांच भी बहुत मायने रखती है। फोरेंसिक जांच में विशेषज्ञ गर्दन पर बने निशान वाली जगह से त्वचा का एक छोटा सा नमूना लेते हैं।
इस नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर जांचा जाता है। इस दौरान वे देखते हैं कि वहां खून जमा हुआ है या नहीं, अंदरूनी रक्तस्राव हुआ है या नहीं, और सूजन मौजूद है या नहीं।
अगर ऐसे बदलाव मिलते हैं, तो इससे एक बहुत अहम बात पता चलती है: कि चोट व्यक्ति के जीवित रहते लगी थी। इसका मतलब है कि व्यक्ति मरने से पहले चोट लगने से जूझ रहा था, न कि मरने के बाद चोट लगी।
इसके अलावा, जिस बेल्ट, रस्सी या दूसरी वस्तु से गला घोंटने की आशंका होती है, उसकी भी लैब में पूरी जांच की जाती है। विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि उस पर इंसानी त्वचा के कण, पसीने के निशान या दूसरे जैविक सबूत (जैसे खून या DNA) मौजूद हैं या नहीं।
इस केस में, जिम्नास्टिक्स बेल्ट पर ट्विशा के स्किन टिश्यू मिलना, इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया का नतीजा है। ये सबूत इतने मजबूत होते हैं कि इन्हें अदालत में चुनौती देना बहुत मुश्किल हो जाता है।
कुल मिलाकर, एम्स की इस रिपोर्ट ने ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई के हाथ काफी मजबूत कर दिए हैं और अब देखना होगा कि आगे इस केस में और क्या खुलासे होते हैं।





































