उरुमची, चीन: क्या आपने कभी सोचा है कि दोस्तों की महफ़िल में अगर कोई ज़्यादा नशे में डूब जाए और ख़ुद को संभाल न पाए, तो उसे संभालने की ज़िम्मेदारी किसकी होती है? दोस्ती सिर्फ़ साथ हंसने-खेलने तक सीमित है, या मुश्किल वक़्त में दोस्त का हाथ थामना भी इसी रिश्ते का हिस्सा है? चीन से आए एक अजीबोगरीब मामले ने इन सवालों पर नई बहस छेड़ दी है, और एक अदालत के फ़ैसले ने तो सोशल मीडिया पर मानो आग ही लगा दी है।
मामला कुछ ऐसा है कि चार दोस्त एक साथ शराब पार्टी कर रहे थे, लेकिन जब एक दोस्त की मौत हो गई, तो बाकी तीनों को कोर्ट ने आंशिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया है। अब सवाल ये है कि नशे की हालत में अगर कोई दोस्त ख़तरे में हो, तो उसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी कितनी बनती है?
आखिर उस रात हुआ क्या था?
कहानी शुरू होती है अक्टूबर 2025 में, चीन के उरुमची शहर में। शाम के क़रीब 9 बजे थे, जब मृतक गाओ अपने तीन दोस्तों के साथ एक महजोंग पार्लर पहुंचा।
महजोंग, बातचीत और शराब का दौर शुरू हुआ। जैसे-जैसे वक़्त आगे बढ़ता गया, उनकी महफ़िल में एक और दोस्त शामिल हो गया, जिससे जश्न और रंगीन हो गया।
रात गहरी होती जा रही थी, लेकिन दोस्तों का यह जमावड़ा सुबह क़रीब 6 बजे तक चलता रहा। शराब का नशा सब पर हावी होता जा रहा था।
पार्टी ख़त्म होने से पहले, कहानी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने आगे चलकर एक बड़ी त्रासदी को जन्म दिया।
घर पहुंचने की बजाय नशे का सफ़र और बढ़ा
महजोंग पार्लर से निकलने के बाद, गाओ और उसके तीनों दोस्त बिलियर्ड्स हॉल पहुंच गए। यहां उन्होंने क़रीब आधे घंटे तक वक़्त बिताया।
लेकिन जब वे वहां से निकले, तब तक गाओ की हालत बेहद ख़राब हो चुकी थी। वो पूरी तरह से नशे में धुत था और ख़ुद को संभालने की स्थिति में नहीं था।
दोस्तों ने टैक्सी ली, लेकिन गाओ इतना नशे में था कि उसे पता भी नहीं चला कि टैक्सी उसके घर के आगे से निकल चुकी है। जब टैक्सी रुकी और वे उतरे, तो दोस्तों को गाओ को पैदल उसके घर तक पहुंचाने की कोशिश करनी पड़ी।
यह कोशिश ही आगे चलकर क़ानूनी दांवपेंच का केंद्र बन गई।
सड़क पर लगे CCTV फुटेज ने खोली पूरी कहानी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और अहम सबूत बना सड़क पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग। इस फुटेज में साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा था कि गाओ ठीक से चल भी नहीं पा रहा था।
वो लड़खड़ा रहा था और उसके दोस्त झाओ और डुआन उसे सहारा देकर सड़क पर ले जा रहे थे। वहीं, तीसरा दोस्त डेंग टैक्सी का किराया चुकाने में लगा था।
अदालत ने इस फुटेज को बेहद गंभीरता से लिया। जज का मानना था कि इस वीडियो से ये बात बिल्कुल साफ़ हो गई थी कि गाओ की हालत कितनी ख़राब थी और उसके दोस्तों को इस बात का पूरा-पूरा अंदाज़ा था कि गाओ ने हद से ज़्यादा शराब पी ली है।
ये फुटेज एक तरह से उस रात के पूरे सच को बयां कर रही थी।
'सिर्फ साथ पीना ही नहीं, मुश्किल वक्त में संभालना भी जिम्मेदारी'
अदालत ने अपने फ़ैसले में एक महत्वपूर्ण बात कही। जज ने माना कि गाओ ने शराब पीने का फ़ैसला ख़ुद लिया था और अपनी इस हालत के लिए वह मुख्य रूप से ज़िम्मेदार था।
इसमें कोई दो राय नहीं थी। लेकिन बात यहीं ख़त्म नहीं होती।
कोर्ट ने कहा कि जब गाओ की हालत ऐसी हो गई कि वो अपनी देखभाल करने में बिल्कुल सक्षम नहीं था, तब उसके साथ मौजूद दोस्तों की भी ये ज़िम्मेदारी बनती थी कि वे उसकी सुरक्षा के लिए ज़रूरी क़दम उठाते। यानी, दोस्ती सिर्फ़ मज़े करने का नाम नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर एक-दूसरे को संभालने का नाम भी है।
क्या दोस्तों की लापरवाही ही मौत तक ले गई?
जज ने अपने फ़ैसले में साफ़-साफ़ कहा कि दोस्तों ने गाओ की गंभीर हालत को पहचाना, उन्हें पता था कि वो कितना नशे में है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उसे पर्याप्त मदद नहीं दी। अदालत के अनुसार, उनकी यही लापरवाही गाओ की मौत तक पहुंचने वाली कड़ी बन गई।
मतलब, अगर सही समय पर सही मदद मिल जाती, तो शायद गाओ की जान बच सकती थी।
इसी आधार पर, कोर्ट ने तीनों दोस्तों को पूरी तरह से दोषी नहीं माना, बल्कि आंशिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया है। अदालत ने आदेश दिया है कि तीनों दोस्त मिलकर मृतक गाओ के परिवार को 1 लाख युआन का मुआवज़ा दें, जो भारतीय रुपयों में क़रीब 12 लाख से भी ज़्यादा होते हैं।
फैसले के बाद क्या नई बहस छिड़ गई है?
इस फ़ैसले के बाद चीन में सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि अगर कोई व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा नशे में हो जाए और अपनी देखभाल न कर पाए, तो उसके साथ मौजूद लोगों की क्या ज़िम्मेदारी बनती है? क्या सिर्फ़ मौज-मस्ती के पार्टनर होना ही दोस्ती है, या मुसीबत में दोस्त का सहारा बनना भी दोस्ती की एक कसौटी है?
यह मामला सिर्फ़ चीन का नहीं है, बल्कि दुनिया भर के उन सभी दोस्तों के लिए एक बड़ा सबक है जो ऐसी पार्टियों में शामिल होते हैं। यह दिखाता है कि दोस्तों की सुरक्षा और ख़ैरियत का ध्यान रखना, सिर्फ़ कहने की बात नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी है, जिस पर क़ानूनी नज़रिया भी पड़ सकता है।
यह केस दोस्ती के रिश्ते को एक नए चश्मे से देखने को मजबूर करता।




































