चित्रदुर्ग: कर्नाटक का एक छोटा सा गांव, जहां सुविधाएं इतनी भी नहीं कि आप बड़े सपनों के बारे में सोच पाएं। लेकिन कहते हैं न, अगर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो फिर कोई मुश्किल आपको रोक नहीं सकती। ऐसी ही कुछ कहानी है पृथ्वीराज पी की, जिन्होंने इसी छोटे से गांव से निकलकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक NVIDIA में सालाना 2.6 करोड़ रुपये की नौकरी हासिल की है। और सबसे चौंकाने वाली बात? उन्होंने ये कमाल बिना किसी आईआईटी डिग्री के कर दिखाया है!
उनकी ये असाधारण यात्रा आज सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रही है और नौजवानों के लिए एक बड़ी मिसाल बन रही है। सोचिए, एक लड़का जो चित्रदुर्ग जिले के कटमदेवरकोट गांव में पला-बढ़ा, जहां इंटरनेट और आधुनिक टेक्नोलॉजी सुविधाओं का नामोनिशान तक नहीं था, उसने कैसे अमेरिका तक का सफर तय कर लिया और वो भी ऐसी कंपनी में जो एआई और चिप्स की दुनिया में राज करती है?
ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है जो बताती है कि मेहनत और सीखने की ललक हो, तो आप हर चैलेंज को पार कर सकते हैं। तो चलिए, जानते हैं पृथ्वीराज के इस कमाल के सफर के बारे में, जिसने सबको हैरान कर दिया है।
बिना आईआईटी, फिर भी कैसे मिली इतनी बड़ी उड़ान?
अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर आपको टेक इंडस्ट्री में बड़ा मुकाम हासिल करना है, तो आईआईटी की डिग्री तो चाहिए ही। लेकिन पृथ्वीराज ने इस सोच को गलत साबित कर दिया।
उन्होंने किसी आईआईटी से नहीं, बल्कि बेंगलुरु की पीईएस यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। आप कहेंगे, तो इसमें क्या खास बात है? खास बात ये है कि उन्होंने सिर्फ डिग्री हासिल करने पर फोकस नहीं किया, बल्कि हमेशा नई टेक्नोलॉजी सीखने और अपने प्रैक्टिकल स्किल्स को बेहतर बनाने पर दिन-रात मेहनत की।
वे जानते थे कि सिर्फ किताबों से काम नहीं चलेगा। इसलिए कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने हमेशा कुछ नया सीखने की कोशिश की।
यही लगन और सीखने की इच्छा उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती रही और उन्हें टेक इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाने का मौका मिला। उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि एक बड़ा नामी कॉलेज या कोचिंग संस्थान ही सफलता की गारंटी नहीं होता, बल्कि आपकी अपनी मेहनत और सीखने की भूख ही सबसे बड़ा हथियार है।
ऑनलाइन कोर्सेज और इंटर्नशिप बने सहारा
पृथ्वीराज ने अपनी कामयाबी के लिए किसी बड़े कोचिंग संस्थान या नामी कॉलेज के सहारे पर निर्भर रहने की बजाय अपने दम पर रास्ता बनाया। उन्होंने कई ऑनलाइन कोर्सेज किए, जो उन्हें लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के बारे में जानने में मदद करते थे।
इसके साथ ही उन्होंने कई इंटर्नशिप की, जिससे उन्हें इंडस्ट्री का प्रैक्टिकल अनुभव मिला। इन इंटर्नशिप्स के दौरान उन्होंने जो सीखा, उसे अपने खुद के प्रोजेक्ट्स पर आजमाया।
वे लगातार प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करते रहे, जो उन्हें थ्योरी से कहीं ज्यादा काम आया। कई सालों की इसी कड़ी मेहनत का नतीजा ये रहा कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीप लर्निंग के क्षेत्र में अपनी जबरदस्त पकड़ बना ली।
आप जानते ही हैं, ये दोनों आज के समय के सबसे हॉट टेक्नोलॉजी फील्ड्स में से हैं, और यही उनकी करियर को एक नई दिशा देने में निर्णायक साबित हुए। एक तरह से उन्होंने खुद ही अपना रास्ता बनाया और उस पर मजबूती से चले।
कम संसाधन, फिर भी मास्टर डिग्री की ओर बढ़े कदम
रिपोर्ट्स बताती हैं कि अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद पृथ्वीराज ने मास्टर डिग्री करने के लिए अमेरिका जाने का फैसला किया। लेकिन ये सफर भी आसान नहीं था।
अमेरिका में उन्होंने एक टियर-3 यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। इसका मतलब ये है कि ये कोई बहुत प्रसिद्ध या टॉप की यूनिवर्सिटी नहीं थी, जैसा कि आमतौर पर बड़े सपने देखने वाले छात्र सोचते हैं।
उनके पास आर्थिक संसाधन भी सीमित थे और गाइडेंस भी बहुत ज्यादा नहीं थी। ऐसे में किसी भी आम छात्र के लिए हार मान लेना आसान होता, लेकिन पृथ्वीराज ने हार नहीं मानी।
उन्होंने लगातार अपने तकनीकी कौशल को निखारना जारी रखा और करियर में आगे बढ़ने के लिए दिन-रात मेहनत करते रहे। उनका मानना था कि अगर आप लगातार सीखते रहेंगे और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखेंगे, तो देर-सवेर सफलता आपको जरूर मिलेगी।
और उनकी यह सोच एकदम सही साबित हुई।
NVIDIA में कैसे हुई एंट्री?
यह हर टेक इंजीनियर का सपना होता है कि उसे एनवीडिया जैसी टॉप कंपनी में काम करने का मौका मिले। एनवीडिया अपनी कड़ी चयन प्रक्रिया के लिए जानी जाती है, जहां सिर्फ सबसे बेहतरीन टैलेंट को ही मौका मिलता है।
लेकिन पृथ्वीराज की लगातार मेहनत और सीखने की लगन ने उन्हें इस चुनौती को पार करने में मदद की। उन्होंने एनवीडिया की कठिन चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर लिया।
आज वे कंपनी के अमेरिका स्थित सांता क्लारा मुख्यालय में डीप लर्निंग से जुड़े सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं। सोचिए, एक छोटे से गांव का लड़का, बिना आईआईटी की डिग्री के, दुनिया की सबसे बड़ी एआई कंपनियों में से एक में करोड़ों के पैकेज पर काम कर रहा है! उनकी सालाना आय करीब 2.6 करोड़ रुपये बताई जाती है, जो कि किसी भी भारतीय युवा के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
युवाओं को क्या सलाह देते हैं पृथ्वीराज?
अपनी इस शानदार सफलता के बाद पृथ्वीराज पी ने उन सभी छात्रों और युवाओं को एक खास सलाह दी है, जो उनके जैसा मुकाम हासिल करने का सपना देखते हैं। उनका कहना है कि वे लगातार सीखते रहें, धैर्य रखें और अपनी मेहनत पर भरोसा बनाए रखें।
उनका मानना है कि समर्पण और दृढ़ता से बड़े-बड़े अवसर हासिल किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, पृथ्वीराज पी की कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आप कहां से आते हैं, ये उतना मायने नहीं रखता, जितना ये मायने रखता है कि आप कहां जाना चाहते हैं और उसके लिए कितनी मेहनत करने को तैयार हैं। उनकी ये कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है, जो यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि अगर पृथ्वीराज कर सकते हैं, तो वे क्यों नहीं!





































