तकनीक डेस्क: कल्पना कीजिए एक ऐसे स्टोरेज डिवाइस की, जो इतना बड़ा हो कि आपकी पूरी डिजिटल दुनिया उसमें समा जाए! हम बात कर रहे हैं टेराबाइट (TB) में नहीं, बल्कि सीधे-सीधे 512 टेराबाइट (TB) की। जी हां, वेस्टर्न डिजिटल की सब्सिडियरी कंपनी सैंडिस्क ने एक ऐसा छोटा सा माइक्रोचिप तैयार करना शुरू कर दिया है, जो साल 2027 तक हमें 512TB के सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSDs) दे सकता है। लेकिन, एक बात अभी से गांठ बांध लीजिए, ये जेब पर इतना भारी पड़ेंगे कि आम इंसान के तो बजट में आने से रहे। अनुमान है कि इनकी कीमत 300,000 डॉलर यानी भारतीय रुपये में करीब 2.5 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा हो सकती है!
तो क्या है ये चमत्कारी चिप, और क्यों इसकी चर्चा इतनी गर्म है? दरअसल, यह सिर्फ स्टोरेज बढ़ाने की बात नहीं है, बल्कि डेटा को स्टोर करने के पूरे तरीके में एक बड़ी छलांग है। अगर आप सोच रहे हैं कि आज के 1-2TB के SSD ही काफी हैं, तो भविष्य की दुनिया के लिए ये बहुत कम हैं।
इसलिए सैंडिस्क का ये नया आविष्कार वाकई गेम-चेंजर साबित हो सकता है, खासकर बड़े डेटा सेंटरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के लिए।
आखिर यह BiCS10 चिप इतना खास क्यों है?
बता दें कि सैंडिस्क ने अपने पुराने साथी किओक्सिया (Kioxia) के साथ मिलकर इस BiCS10 नाम के 10वीं जेनरेशन के 3D NAND फ्लैश चिप का 'सेम्पलिंग' शुरू कर दिया है। 'सेम्पलिंग' का मतलब है कि इसके शुरुआती सैंपल्स टेस्टिंग के लिए भेजने लगे हैं।
यह एक 1 टेराबिट (1Tb) TLC चिप है, जिसमें 332 मेमोरी लेयर्स को एक छोटे से डाई (die) में पैक किया गया है। और जब हम 'छोटा' कहते हैं, तो हमारा मतलब होता है कि इसकी एरिया बिट डेंसिटी 29 गीगाबिट (Gb) प्रति वर्ग मिलीमीटर से भी ज़्यादा है।
कंपनी का दावा है कि ये इंडस्ट्री में सबसे आगे है, यानी कोई दूसरा चिप इतनी डेंसिटी अभी नहीं दे रहा।
इसे ऐसे समझिए: पहले डेटा को एक जगह पर स्टोर करने के लिए जितनी जगह लगती थी, अब उससे कम जगह में कहीं ज़्यादा डेटा स्टोर हो पाएगा। इससे सिर्फ आकार ही नहीं घटेगा, बल्कि कुल मिलाकर स्टोरेज की क्षमता भी कई गुना बढ़ जाएगी।
पुराने चिप्स से कितना आगे है यह नया BiCS10?
अगर हम इसकी तुलना पिछली BiCS8 जेनरेशन से करें, जो फिलहाल मास प्रोडक्शन में है, तो BiCS10 की बिट डेंसिटी में 59% का जबरदस्त सुधार हुआ है। मतलब, लगभग दो तिहाई ज़्यादा डेटा अब उतनी ही जगह में आ जाएगा।
यह सिर्फ डेंसिटी की बात नहीं है, डेटा ट्रांसफर स्पीड भी इसमें कमाल की है। सैंडिस्क के अपने अनाउंसमेंट के मुताबिक, इस नए चिप में Toggle DDR6.0 इंटरफेस का इस्तेमाल किया गया है, जो डेटा ट्रांसफर स्पीड को 4.8 गीगाबिट प्रति सेकंड (Gb/s) तक पहुंचा देता है।
यह पिछली जेनरेशन की इंटरफेस स्पीड से सीधे 33% ज़्यादा है। सोचिए, आपका डेटा कितनी तेज़ी से इधर से उधर हो पाएगा!
सिर्फ रफ्तार और क्षमता ही नहीं, बल्कि पावर एफिशिएंसी (बिजली की खपत) के मामले में भी BiCS10 ने कमाल किया है। इनपुट पावर कंजम्पशन में 10% की गिरावट आई है, जबकि आउटपुट पावर कंजम्पशन में तो 34% की भारी कमी देखने को मिली है, वो भी BiCS8 की तुलना में।
इसका सीधा सा मतलब है कि यह नया चिप कम बिजली खाएगा और ज़्यादा काम करेगा। बड़े-बड़े डेटा सेंटर के लिए, जहां हज़ारों-लाखों चिप्स एक साथ काम करते हैं, ये एक बहुत बड़ी बात है।
कम बिजली मतलब कम खर्च और पर्यावरण के लिए भी बेहतर।
कब तक दिखेगा यह सुपर SSD बाजार में?
सैंडिस्क ने इस चिप पर आधारित अपने आगे के प्लान्स भी साफ कर दिए हैं। कंपनी ने एक पूरा रोडमैप तैयार किया है।
उनके मुताबिक, 2026 तक हमें 256TB (टेराबाइट) का SSD देखने को मिल सकता है। और फिर, एक साल बाद, यानी 2027 में, वही 512TB वाला महा-स्टोरेज डिवाइस भी बाजार में आ जाएगा।
कल्पना कीजिए, एक SSD, जो शायद एक मोबाइल फोन जितना बड़ा होगा, लेकिन उसमें इतनी जानकारी भरी होगी जितनी आज के समय में शायद एक छोटे डेटा सेंटर में हो!
हालांकि, जैसा कि हमने शुरू में बताया, इन शुरुआती डिवाइसेस की कीमत आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर रहने वाली है। 300,000 डॉलर से ज़्यादा की कीमत मतलब साफ है कि ये अभी मुख्य रूप से उन बड़ी कंपनियों और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स के लिए बनेंगे, जिन्हें बेहिसाब डेटा स्टोर करने की ज़रूरत है, खासकर AI डेवलपमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग और वैज्ञानिक रिसर्च के लिए।
आम ग्राहकों तक इतनी क्षमता वाले SSDs को सस्ती कीमतों पर पहुंचने में अभी कुछ और साल लग सकते हैं। लेकिन, तकनीक की दुनिया में हमेशा ऐसा ही होता है – जो आज महंगा और विशिष्ट है, वो कल आम और सस्ता हो जाता है।
तो बस इंतज़ार कीजिए, भविष्य का स्टोरेज अब ज़्यादा दूर नहीं!




































